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Karnal News: एनएचएआई के पास सिर्फ दो एंबुलेंस, हादसों में पुलिस और निजी वाहन बनते हैं मददगार

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 03 Dec 2025 12:35 AM IST
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NHAI has only two ambulances, police and private vehicles help in accidents.
माई सिटी रिपोर्टर
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करनाल। नेशनल हाईवे-44 हो या फिर कैथल, इंद्री, मेरठ राजमार्ग। सड़क हादसा होते ही सरकारी से पहले निजी एंबुलेंस पहुंच जाती हैं। जो घायलों को सरकारी के बजाय निजी अस्पताल लेकर जाती हैं। यदि घायल जागरूक है या लोग सतर्कता बरतें तो ही मरीज सरकारी अस्पताल पहुंच पाता है। क्योंकि एनएचएआई के पास केवल दो ही एंबुलेंस हैं। इन्हें करनाल सीमा के 70 किलोमीटर के हाईवे में दुर्घटनास्थल पर पहुंचने में आधे से लेकर एक घंटे तक का समय लगता है। कई बार पुलिस की गाड़ी या लोगों के निजी वाहन से घायल को अस्पताल पहुंचाया जाता है। कई बार एंबुलेंस के नहीं से घायल की मौत भी हो चुकी है।

अमर उजाला टीम ने मंगलवार को नेशनल हाईवे-44 के कर्ण लेक से लेकर बसताड़ा टोल प्लाजा तक का सफर किया। दोपहर 12 से 1:30 बजे तक तय हुए इस सफर में बसताड़ा टोल से लेकर कर्ण लेक तक कहीं पर भी सरकारी एंबुलेंस खड़ी दिखाई नहीं दी। हालांकि निजी अस्पताल की एंबुलेंस मरीजों को लेकर हाईवे से गुजरती रहीं। एनएचएआई की ओर से टोल के बूथ और कर्ण लेक पर ही एंबुलेंस के खड़े होने का स्थान निर्धारित है। यहीं से ही एंबुलेंस हादसा होने पर दुर्घटनास्थल के लिए रवाना होती है। दावा है कि दुर्घटनास्थल पर 20 मिनट में एंबुलेंस पहुंच जाती है। टोल प्लाजा पर एंबुलेंस खड़ी नहीं थी।
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इधर, कल्पना चावला राजकीय मेडिकल कॉलेज के बाहर भी निजी अस्पतालों की एंबुलेंस की कतार लगी रहती है। सड़क सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले दिनों में घना कोहरा छाएगा। ऐसे में हादसों की आशंका और बढ़ जाएगी। नेशनल हाईवे के अलावा स्टेट हाईवे पर भी कई खामियां हैं, जो हादसों का कारण बन रही हैं। सुरक्षा इंतजाम और एंबुलेंस की संख्या बढ़ाई जानी चाहिए।
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राजमार्गों पर तो सुविधा ही नहीं

नेशनल हाईवे-44 पर तो एनएचएआई की दो एंबुलेंस और दो पेट्रोलिंग वाहन आपात स्थिति में मदद के लिए फिर भी दौरा लगाते रहते हैं लेकिन स्टेट हाईवे पर कोई सुविधा नहींं है। कैथल रोड, इंद्री रोड और मेरठ रोड पर ऐसे किसी भी सरकारी वाहन की पेट्रोलिंग नहीं है। केवल पुलिस की 112 नंबर की ईआरवी ही गश्त करती है। यहां पर होने वाले हादसों में घायलों के लिए निजी एंबुलेंस ही पहुंचती हैं।




निजी अस्पताल देते हैं महंगा उपचार

सड़क सुरक्षा विशेषज्ञ एडवोकेट संदीप राणा का कहना है कि निजी एंबुलेंस के संचालक मरीज को ले जाने के लिए मोटी रकम वसूलते हैं।मरीज को भी निजी अस्पताल में इलाज के लिए लेकर जाते हैं। आपात स्थिति होने पर मरीज व तीमारदार ज्यादा सोच नहीं पाते। इसलिए कुछ निजी अस्पताल संचालक महंगा उपचार देते हैं। जबकि नियम के अनुसार, घायलों को सबसे पहले ट्रामा सेंटर लाना चाहिए। ताकि सरकारी रिकार्ड में भी हादसा दर्ज हो जाए। उनका यह भी कहना है कि गंभीर मरीजों को सरकारी अस्पताल में उपचार न मिलने के कारण कई बार रेफर भी किया जाता है।



प्रतिदिन औसतन दो लोग हो रहे घायल : जिले में सड़क हादसों की संख्या लगातार बढ़ रही है। पिछले 11 माह में जिले में 587 सड़क हादसे हुए हैं, जिनमें करीब 263 लोगों की मौत हो चुकी है और 574 लोग गंभीर रूप से घायल हुए। यानी औसतन दो लोग प्रतिदिन सड़क हादसे में घायल हो रहे हैं। मौत का आंकड़ा भी दो दिन में तीन लोगों का है। 75 प्रतिशत तक हादसे राष्ट्रीय राजमार्ग व तीनों राजमार्गों पर हुए हैं।





---------हाईवे पर पेट्रोलिंग और एंबुलेंस सेवाएं हर समय मौजूद रहती हैं। कई बार जाम की स्थिति होने पर देरी हो सकती है लेकिन ज्यादातर मामलों में 15 से 20 मिनट के अंदर ही एंबुलेंस मौके पर पहुंच जाती है। पुलिस के अलावा टोल प्लाजा पर भी एजेंसियों के पास अपनी एंबुलेंस होती हैं। यदि बूथ पर एंबुलेंस नहीं होती तो इसकी जांच कराई जाएगी। - उत्तम सिंह, उपायुक्त

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