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नई वेंटिलेटर मशीन की डॉक्टरों को दी ट्रेनिंग
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करनाल। कल्पना चावला राजकीय मेडिकल कॉलेज के मुख्य सभागार में एनेस्थीसिया (बेहोशी) विभाग की और से एक दिवसीय नॉन इनवेसिव वेंटिलेशन सेमिनार का आयोजन किया गया। सेमिनार में कल्पना चावला राजकीय मेडिकल कॉलेज के निदेशक डॉ. सुरेंद्र कश्यप ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। साथ ही अध्यक्षता एमएस डॉ. जगदीश दुरेजा ने की। कार्यशाला का संचालन डॉ. गुंजन चौधरी ने किया। इसमें सुबह 9 से दोपहर दो बजे तक लेक्चर प्रोग्राम किया गया तो दो बजे से 4 बजे तक वेंटिलेटर की नई मशीन की जानकारी दी गई। बताया गया कि इस मशीन से मरीज को मॉस्क द्वारा ही ऑक्सीजन दी जा सकती है, मरीज की सांस की नली में पाइप नहीं डालनी पड़ती। इस सेमिनार में दिल्ली, चंडीगढ़ के डॉक्टर भी शामिल रहे। डाक्टरों को मशीन के तकनीकी पहलू के बारे में भी विस्तार से प्रशिक्षण दिया गया। इस दौरान डॉ. अशोक गुप्ता, डॉ. अतुल्य अत्रेजा भी शामिल रहे।
मेडिकल कॉलेज में भी आयेगी ये मशीन
निदेशक डॉ. सुरेंद्र कश्यप ने बताया कि यह बहुत अच्छी मशीन है। जल्द ही यह मशीन मेडिकल कॉलेज में भी लाई जायेगी, ताकि सांस के मरीजों को इसका फायदा हो। मेडिकल कॉलेज के एमएस डॉ. जगदीश दुरेजा ने बताया कि उन्होंने खानपुर मेडिकल कॉलेज में इस मशीन का प्रयोग किया है। मरीजों के लिये यह बहुत फायदेमंद रहेगी। उन्होंने बताया कि प्रदूषण के कारण सांस रोगियों की संख्या बढ़ती जा रही है। डॉ. गुंजन ने बताया कि मेडिकल कॉलेज बनाने के लिये सरकार के तीन उद्देश्य होते हैं। नये डॉक्टर तैयार करना, उपचार विधियों पर शौध करना और महत्वपूर्ण मरीजों का इलाज करना। उन्होंने बताया कि इस तरह के सेमिनार निरंतर आयोजित किए जाएंगे। इस तरह के सेमिनार से दूसरे जिले व राज्य के डॉक्टर को अपना अनुभव एक दूसरे से सांझा करने का मौका मिलता है।
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मेडिकल कॉलेज में भी आयेगी ये मशीन
निदेशक डॉ. सुरेंद्र कश्यप ने बताया कि यह बहुत अच्छी मशीन है। जल्द ही यह मशीन मेडिकल कॉलेज में भी लाई जायेगी, ताकि सांस के मरीजों को इसका फायदा हो। मेडिकल कॉलेज के एमएस डॉ. जगदीश दुरेजा ने बताया कि उन्होंने खानपुर मेडिकल कॉलेज में इस मशीन का प्रयोग किया है। मरीजों के लिये यह बहुत फायदेमंद रहेगी। उन्होंने बताया कि प्रदूषण के कारण सांस रोगियों की संख्या बढ़ती जा रही है। डॉ. गुंजन ने बताया कि मेडिकल कॉलेज बनाने के लिये सरकार के तीन उद्देश्य होते हैं। नये डॉक्टर तैयार करना, उपचार विधियों पर शौध करना और महत्वपूर्ण मरीजों का इलाज करना। उन्होंने बताया कि इस तरह के सेमिनार निरंतर आयोजित किए जाएंगे। इस तरह के सेमिनार से दूसरे जिले व राज्य के डॉक्टर को अपना अनुभव एक दूसरे से सांझा करने का मौका मिलता है।
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