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Hindi News ›   Haryana ›   Karnal News ›   Neither the city nor the dairies could shift Rehdian

न शहर से डेयरियां शिफ्ट हो पाई न ही रेहड़ियां

Fri, 31 Jul 2015 12:29 AM IST
करनाल/अमर उजाला ब्यूरो
करनाल/अमर उजाला ब्यूरो Updated Fri, 31 Jul 2015 12:29 AM IST
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न तो शहर से 12 साल बाद भी डेयरियां शिफ्ट हुई और न ही ओवरब्रिज के नीचे
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रेहड़ियां। अलबत्ता सीएम सिटी अभी भी जाम और गंदगी में फंसी है और जनता त्राहिमाम-त्राहिमाम कर रही है। हालांकि, इनमें से शहर से डेयरियों को शिफ्ट कराने का प्लान 12 साल पुराना है।

इस प्रोजेक्ट को बार-बार हरी झंडी मिलने के बाद भी अधिकारी पूरा नहीं कर पा रहे हैं। वहीं, शहर के ओवरब्रिज के नीचे रेहड़ियों को शिफ्ट करने की योजना को भी करीब 8 माह हो चुके हैं। यह कार्य चलना तो दूर अभी तक रेंग भी नहीं पाया है। यह हाल तब हैं जब सीएम मनोहर लाल खुद दोनों प्रोजेक्ट को लेकर काफी गंभीर है। बावजूद इसके अधिकारी काम के प्रति अपना रवैया नहीं बदल रहे हैं।

योजना के तहत शहर कैथल व काछवा रोड स्थित दोनों पुलों (रेलवे ओवरब्रिज) के नीचे रेहड़ी वालों को शिफ्ट किया जाना था। इसके लिए दिसंबर 2014 में ही योजना बना ली गई थी। नक्शा व एस्टीमेट तक जनवरी माह के पहले ही सप्ताह तक तैयार हो चुके थे। दरअसल, यह प्रस्ताव करनाल के उपायुक्त डॉ. जे. गणेशन का था। सिरसा की तर्ज पर करनाल में ही यह प्रोजेक्ट बनाना था, जोकि अब सपनों तक ही सिमटकर रह गया है। फ्लाईओवर के नीचे 9 शौचालयों के साथ-साथ पीने के पानी की व्यवस्था सहित पार्किंग की व्यवस्था कराने की योजना तैयार की गई थी।

योजना को पूरा करने में अभी कम से कम 6 माह का समय और लगना तय है। हाल यही रहा तो साल भर भी लग सकता है। हालांकि, मार्च माह में दावे किए गए थे कि आगामी दो माह में योजनाएं शिफ्ट कर दी जाएंगी। प्रशासनिक अधिकारी कागजों में शिफ्टिंग कर रहे हैं, कई बार बैठकों के बाद भी जमीनी स्तर पर हकीकत कुछ और है। बता दें कि ये प्रोेजेक्ट भी सीएम के हैं और उनकी दिली तमन्ना है कि शहर जाम मुक्त हो और साफ सुथरा हो। इसके लिए खुद सीएम डीसी समेत आला अधिकारियों की बैठक करके फटकार लगा चुके हैं। बावजूद इसके अधिकारी अपनी ही मस्ती में ही काम कर रहे हैं। देखना यह है कि दो माह में होने वाला कार्य आखिर कर होगा?
यह है डेरियाें का सच
2003 में शहर से डेयरी शिफ्ट करने का खाका तैयार हुआ था। आज तक यह वेटिंग में ही है। जून 2015 के दूसरे सप्ताह में हुई हाउस की बैठक में भी शहर से डेयरी शिफ्ट करने का प्रस्ताव पास कर दिया गया था। इस पर पहले चरण में 3 करोड़ रुपये खर्च करने का नगर निगम का प्रस्ताव था। 3 करोड़ रुपये की यह राशि पहले चरण में शहर में स्थित करीब 235 डेयरियों को पिंगली गांव में शिफ्ट करने पर खर्च होनी थी। इस राशि से इलेक्ट्रिफिकेशन, चार दिवारी कार्य, सीवर लाइन, स्ट्रोम वाटर, सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट इत्यादि का निर्माण कराया जाना था, लेकिन कोई काम शुरू नहीं हो पाया है। बहरहाल, लोगों को अभी भी कम से कम एक साल तक का इंतजार डेयरियों को शिफ्ट करने के लिए करना पड़ेगा। पहले चरण में गांव पिंगली में 32 एकड़ जमीन में नगर निगम की सीमा में आने वाली सभी डेयरियों को शिफ्ट किया जाना था। इस भूमि की कीमत 1.17 करोड़ है। कुल 235 प्लाट, 8 बूथ चिन्हित तो कर लिए गए, लेकिन कार्य शुरू नहीं हो पाया है।
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2003 में कराया गया था सर्व
शहर में फैल रही गंदगी को देखते हुए जिला प्रशासन ने डेयरियों को बाहर शिफ्ट करने की योजना बनाई थी। इसको लेकर 2003 में सर्वे भी कराया गया। उस समय शहर में कुल 186 डेयरियां थी। सर्वे रिपोर्ट आने के 11 साल बाद तक योजना पर कुछ काम नहीं हुआ। यही कारण रहा कि 186 डेयरियों की संख्या बढ़कर इस समय करीब 270 हो गई। इनमें से पहले चरण में 235 डेयरियों को शिफ्ट कराया जाना है। प्लान बन रहे हैं और टूट रहे हैं, डेयरियां वहीं की वहीं हैं।
शहर के चार हिस्सों में शिफ्ट होनी थी डेयरियां
डेयरी संचालकों की सहूलियत को देखते हुए पहले शहर के चार हिस्सों में डेयरी शिफ्ट करने की विभाग की योजना थी। डेयरी संचालकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए दाहा, फूसगढ़ व कैलाश गांव में अलग-अलग हिस्सों में डेयरियों के लिए स्थान देने की योजना बनाई गई थी, लेकिन अब पहले चरण में पिंगली में ही डेयरियां शिफ्ट करने की योजना बनाई गई। यदि जगह कम रहती है तो दूसरे चरण में किसी शेष गांव में डेयरियों के लिए डेयरी संचालकों को स्थान देने का प्लान तैयार किया गया, जोकि भी तक प्लान ही है।
यह है डेयरियों को शिफ्ट करने का सच
जून माह में भी हाउस की बैठक में इन डेयरियों को शिफ्ट करने का प्रस्ताव पारित हुआ, लेकिन इस पर अभी तक कोई भी काम नहीं हुआ है। बेशक नगर निगम की बैठक में डेयरियों को शिफ्ट करने का प्रस्ताव पास हो गया है, लेकिन अभी निगम को इन डेयरियों को शहर से बाहर निकालने के लिए फिर से सर्वे करना होगा। चूंकि करीब 10 माह पहले जो सर्वे हुआ था वह केवल अप्रूवड कॉलोनियां का हुआ था। अनअप्रूवड एरिया में स्थित एक भी डेयरी का रिकार्ड नगर निगम के पास नहीं है। पुराने सर्वे में  करीब 148 डेयरियां पाई गई। जबकि अनप्रूवड एरिया में स्थित डेयरियों का अभी तक कोई सर्वे नहीं हुआ है। शहर में इस समय करीब 75 अनअप्रवूड ऐसी कॉलोनियां हैं जो इस समय बस चुकी हैं और उनमें इन अप्रूवड एरिया से अधिक डेयरी हैं। ऐसे में अब दोबार सर्वे कराने और डेयरी शिफ्टिंग में भी एक साल तक का समय लग सकता है।
रहेड़ियों को अगस्त तक शिफ्ट करने की योजना है। कुछ दिक्कतों के कारण देरी हो सकती है। लेकिन दोनों ही कार्यों को जल्द ही करा दिया जाएगा। रेहड़ी शिफ्टिंग के साथ-साथ डेयरियों को शिफ्ट करने का कार्य भी चल रहा है।
 रेनू बाला गुप्ता, मेयर, नगर निगम करनाल।
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