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Karnal News: एनडीआरआई ने 70 वर्षों में देश को दिए सैकड़ों वैज्ञानिक और उद्यमी

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 22 Apr 2025 03:08 AM IST
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NDRI has given hundreds of scientists and entrepreneurs to the country in 70 years
- दीक्षांत समारोह आज, केंद्रीय कृषि मंत्री के हाथों उपाधियों से अलंकृत होंगे 201 होनहार, लगातार देश में पांच बार मिला पहला रैंक
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गगन तलवार
करनाल। विश्व भर में करनाल की पहचान बनाने वाले एनडीआरआई ने अब तक के 70 साल के सफर में देश को सैकड़ों वैज्ञानिक और 300 से ज्यादा उद्यमी दिए हैं। अब देश के लिए डेयरी क्षेत्र में कुछ नया करने का जुनून लिए 201 विद्यार्थियों का एक बैच और तैयार है। जिन्हें केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के हाथों उपाधि मिलेगी।
डेयरी प्रौद्योगिकी की पढ़ाई पूरी कर चुके विभिन्न प्रदेशों के विद्यार्थियों के लिए मंगलवार को होने वाले राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान के 21वें दीक्षांत समारोह की तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। कार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को सम्मानित भी किया जाएगा।
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संस्थान के इतिहास पर नजर दौड़ाएं तो राष्ट्रपिता महात्मा गांधी, मदन मोहन मालवीय भी संस्थान से डेयरी प्रशिक्षण ले चुके हैं। वहीं देश की पहली महिला प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और मौजूदा राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू भी यहां पहुंचकर विकसित की गई गायों की नस्लों के बारे में जानकारी प्राप्त कर चुकी हैं। बड़ी उपलब्धियों में वर्ष 2017 से 2022 तक संस्थान देश के सभी कृषि विश्वविद्यालयों और आईसीएआर के चार मानद विश्वविद्यालयों में लगातार प्रथम स्थान पर रहा।
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संस्थान के निदेशक एवं कुलपति डॉ. धीर सिंह का कहना है कि दीक्षांत समारोह शिक्षा की पराकाष्ठा और विद्यार्थियों की उपलब्धियों की आधिकारिक स्वीकृति का प्रतीक है। जिन 201 विद्यार्थियों को डिग्री दी जाएगी, इनमें 98 बेटियां हैं। इनमें बीटेक (डेयरी प्रौद्योगिकी) के 32, परास्नातक के 98 और पीएचडी के 71 विद्यार्थी डिग्री प्राप्त करेंगे। इसके अलावा मार्च के दौरान सर्वश्रेष्ठ डिवीजन प्रस्तुतियों और सर्वश्रेष्ठ मास्टर और पीएचडी थीसिस के लिए पुरस्कारों का मूल्यांकन किया गया और इसके लिए भी विद्यार्थी पुरस्कृत होंगे। विदित हो कि एनडीआरआई में संचालित कोर्स में देश के विभिन्न प्रदेशों के अलावा विदेशी विद्यार्थी भी पढ़ाई करते हैं।
कर्ण नगरी में बना विश्व में भैंस का पहला क्लोन
देश में डेयरी विकास कार्यक्रमों में अनुसंधान एवं विकास तथा मानव संसाधन विकास में सहयोग के लिए समर्पित संस्थान की स्थापना वर्ष 1923 में पशुपालन एवं डेयरी इंपीरियल इंस्टीट्यूट के नाम से बैंगलोर में हुई थी। वर्ष 1955 में संस्थान के मुख्यालय को करनाल स्थानांतरित कर इसे राष्ट्रीय डेरी अनुसंधान संस्थान नाम दिया गया। इसके दो क्षेत्रीय केंद्र बैंगलुरु और कल्याणी में स्थित हैं। वर्ष 1985 को शैक्षिक कार्यक्रमों के संचालन के लिए संस्थान को मान्य विश्वविद्यालय का दर्जा प्राप्त है।

संस्थान के पहले निदेशक विलियम स्मिथ रहे हैं। विश्व में भैंस का प्रथम क्लोन (2010) में एनडीआरआई में तैयार किया गया। अब तक करीब 22 क्लोन तैयार किए जा चुके हैं। संस्थान में करीब 2000 पशु रखे हुए हैं, जिन पर शोध कार्य किया जा रहा है। ईटीर्टी, आईवीएफ, ओपीयू के द्वारा उत्तम नस्ल के दुधारू पशुओं का प्रजनन पशु जैव-प्रौद्योगिकी, पशु आनुवांशिकी एवं प्रजजन विभागों द्वारा किया जा रहा है। राष्ट्रीय दुग्ध गुणवत्ता एवं रैफरल केंद्र स्थापित है, जहां दूध व दूध से बने पदार्थों की गुणवत्ता की जांच होती है।
ऐसे आगे बढ़ा संस्थान

- 1957 में बीएएसी डेयरी की शिक्षा शुरू हुई।

- 1966 में आईसीएसआर के अधीन लाया गया।

- 1980 में कर्ण स्विस गाय की नस्ल का विकास।

- 1982 में कर्ण फ्रिज गाय की नस्ल का विकास।

- 1985 में पशु जैव प्रौद्योगिकी में उच्च शिक्षा केंद्र के रूप में मान्यता मिली।

- 1989 में संस्थान को मानद विश्वविद्यालय का दर्जा और डेयरी विज्ञान राष्ट्रीय पुस्तकालय स्थापित।

- 1990 में दुनिया के पहले आईवीएफ विधि से भैंस का बछड़ा प्रथम का जन्म।

- 1997 में एक लाख लीटर प्रतिदिन क्षमता वाला एक वाणिज्यिक मॉडल डेयरी प्लांट स्थापित।

- 2003 में अत्याधुनिक दुग्ध पार्लर प्रणाली शुरू हुई।

- 2004 में आईवीएफ विधि से पहला बकरी का बच्चा।

- 2009 में विश्व का पहला और दूसरा क्लोन से विकसित भैंस का बछड़ा गरिमा हैड गाइडेड क्लोन तकनीक से विकसित।

- 2012 में साहीवाल बछड़ा होली ओवम पिक तकनीक से पैदा हुआ।

- 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सरदार पटेल सर्वश्रेष्ठ आईसीएआर संस्थान का पुरस्कार मिला।

- 2016 में लालू खेड़ी मुजफ्फरनगर और पिपरकोठी पूर्वी चंपारण में सेवा केंद्र की स्थापना।

- 2018 में दुग्ध की गुणवत्ता एवं संरक्षा के लिए राष्ट्रीय रेफरल केंद्र की शुरुआत।

- 2017 से 2022 तक देश के सभी कृषि विश्वविद्यालयों और आईसीएआर के चार मानद विश्वविद्यालयों में लगातार प्रथम स्थान मिला।
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