फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Karnal News ›   NCERT is not ordering books from private publishers which are eight times more expensive.

Karnal News: एनसीईआरटी नहीं मंगा रहे निजी प्रकाशकों की आठ गुना महंगी किताबें

Wed, 25 Mar 2026 01:01 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल Updated Wed, 25 Mar 2026 01:01 AM IST
विज्ञापन
NCERT is not ordering books from private publishers which are eight times more expensive.
प्रताप प​ब्लिक स्कूल में लगने वाली किताबों की सूवी
काजल पांचाल
विज्ञापन

करनाल। नए शैक्षणिक सत्र के पहले ही स्कूलों में किताबों की व्यवस्था ने अभिभावकों का बजट बिगाड़ दिया है। एनसीईआरटी की सस्ती एवं निर्धारित पुस्तकों के बजाय प्राइवेट पब्लिशर्स की महंगी किताबें लगाई जा रही है। इससे पढ़ाई का खर्च कई गुना बढ़ गया है।

स्कूलों की ओर से तैयार की जा रही सूची में एनसीईआरटी के साथ निजी प्रकाशकों की किताबें प्रमुखता से शामिल हैं। इससे एक ही कक्षा के लिए अभिभावकों को ज्यादा महंगी पुस्तकें खरीदनी पड़ रही हैं और सस्ती किताबों का विकल्प सीमित हो गया है। एनसीईआरटी की एक पुस्तक जहां करीब 65 रुपये और बाइंडिंग सहित 85 रुपये में मिल रही है। इस हिसाब से 6-7 पुस्तकें 390 से 595 रुपये तक में बेची जा रही हैं, जबकि निजी प्रकाशकों की पुस्तकों का पांच हजार रुपये तक है।
विज्ञापन


नियम के अनुसार, सभी स्कूलों में एनसीआरटी की पुस्तकों से ही पढ़ाई कराना अनिवार्य है लेकिन स्थानीय स्तर पर की गई पड़ताल में सामने आया कि निजी स्कूलों ने एक-एक विक्रेता को अपने स्कूल की पुस्तकें बेचने का ठेका दिया हुआ है। इनमें बड़े नामी स्कूल शामिल हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

पुस्तकों के दाम की बात की जाए तो जैसे कक्षा छह की 3205 रुपये और कक्षा सात में पढ़ने वाले बच्चों की सभी पुस्तकें 3217 रुपये में लगवाई हैं। इन पुस्तकों के साथ-साथ स्टेशनरी जोड़ने पर यह 4395 से 4767 रुपये और वैकल्पिक विषयों के साथ खर्च पांच हजार रुपये से ऊपर पहुंच जाता है।


- एक दुकान से खरीद की मजबूरी

अभिभावक प्रीतम, एडवोकेट राजेश शर्मा और अर्पिता का कहना है कि किताबों की खरीद के लिए कई स्कूलों की ओर से एक ही दुकान तय कर दी जाती है। वहां पहले से तैयार सेट एमआरपी पर दिया जाता है, जिससे अभिभावकों को छूट का लाभ नहीं मिल पाता।

- हर साल नई किताबों की मजबूरी

हर साल सिलेबस में छोटे-छोटे बदलाव कर नई किताबें लागू की जाती हैं। इससे पुरानी किताबों का दोबारा उपयोग नहीं हो पाता और हर साल नई खरीद करनी पड़ती है। इस पूरी व्यवस्था का सबसे ज्यादा असर मध्यमवर्गीय परिवारों पर पड़ रहा है। एक से अधिक बच्चों की पढ़ाई करवा रहे अभिभावकों के लिए यह खर्च हजारों रुपये तक बढ़ गया है।

- प्राइवेट प्रकाशकों की पुस्तकों के दाम (दुकान सूची के अनुसार)
विषय और पुस्तक कक्षा 6 कक्षा 7

अंग्रेजी रीडर 512 524

विज्ञान 525 525

हिंदी रीडर 390 390

सामाजिक विज्ञान 275 275

हिंदी व्याकरण 450 450

गणित 532 532

जीके 390 305

मोरल 276 395

आर्ट व साइंस लैब सहित चार पुस्तकें 295 295

कुल (किताबें) - 3205 3217

स्टेशनरी 930 1355

कुल खर्च 4395-4822 4767-5252



वर्जन-

खंड शिक्षा अधिकारियों के साथ बैठक की जाएगी। साथ ही नए सत्र के शुरू होते ही स्कूलों में जांच करवाई जाएगी। पता किया जाएगा कि उनमें कौनसी किताबें लगाई गई हैं। - नीलम कुंडू, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी
---



- ये होगी कार्रवाई : यदि कोई निजी स्कूल अभिभावकों पर निजी प्रकाशकों की किताबें थोपता है या किसी एक दुकान से खरीदने के लिए बाध्य करता है तो उसे कारण बताओ नोटिस जारी किया जाएगा। जांच में आरोप सही पाए जाने पर स्कूल पर जुर्माना लगाया जा सकता है। गंभीर या बार-बार उल्लंघन की स्थिति में स्कूल की मान्यता पर भी प्रभाव पड़ सकता है। इसके अलावा अभिभावकों से जबरन वसूली गई अतिरिक्त राशि वापस करने के निर्देश भी दिए जा सकते हैं।


- यहां कर सकते हैं शिकायत : अभिभावक या कोई भी उपभोक्ता इस तरह की शिकायत जिला शिक्षा अधिकारी या खंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय में लिखित रूप से दर्ज करवा सकता है। इसके अलावा हरियाणा में सीएम विंडो, राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग की वेबसाइट पर भी शिकायत दर्ज की जा सकती है। शिकायत करते समय स्कूल का नाम, घटना का विवरण और उपलब्ध सबूत (रसीद, मैसेज आदि) संलग्न करना जरूरी होता है ताकि विभाग प्रभावी कार्रवाई कर सके।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed