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नवरात्र आत्मिक शुद्धि, संचम और सदाचार का अवसर : ओमप्रकाश
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शिव मंदिर में पूजा अर्चना करते श्रद्धालु। संवाद
सीवन। शारदीय नवरात्र के चौथे दिन बुधवार को श्रद्धालुओं ने मां दुर्गा के चतुर्थ स्वरूप मां कूष्मांडा की पूजा-अर्चना कर परिवार की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की। स्वर्ग द्वार शिव मंदिर में श्रद्धालुओं ने मां भगवती के दरबार में माथा टेका और आशीर्वाद लिया। इस दौरान मंदिर में भक्तिमय माहौल बना रहा।
मंदिर के पुजारी ओमप्रकाश ने बताया कि नवरात्र केवल पूजा-अर्चना का पर्व नहीं, बल्कि आत्मिक शुद्धि, संयम और सदाचार अपनाने का अवसर भी है। सच्ची भक्ति तभी सार्थक होती है, जब व्यक्ति अपने आचरण में अच्छे संस्कार अपनाए और दूसरों के प्रति सद्भाव रखे। उन्होंने बताया कि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां कूष्मांडा को सृष्टि में ऊर्जा और प्रकाश का संचार करने वाली देवी माना जाता है। मां की आराधना से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और शांति का संचार होता है।
उन्होंने श्रद्धालुओं से जरूरतमंदों की सहायता करने, आपसी भाईचारा बनाए रखने और समाज में प्रेम व सद्भाव बढ़ाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि धार्मिक पर्व मानवता और सेवा के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देते हैं। इस अवसर पर ओमप्रकाश रहेजा, मास्टर प्रवेश, कृष्ण वधवा और वीरेंद्र मदान सहित अनेक श्रद्धालु मौजूद रहे।
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मंदिर के पुजारी ओमप्रकाश ने बताया कि नवरात्र केवल पूजा-अर्चना का पर्व नहीं, बल्कि आत्मिक शुद्धि, संयम और सदाचार अपनाने का अवसर भी है। सच्ची भक्ति तभी सार्थक होती है, जब व्यक्ति अपने आचरण में अच्छे संस्कार अपनाए और दूसरों के प्रति सद्भाव रखे। उन्होंने बताया कि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां कूष्मांडा को सृष्टि में ऊर्जा और प्रकाश का संचार करने वाली देवी माना जाता है। मां की आराधना से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और शांति का संचार होता है।
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उन्होंने श्रद्धालुओं से जरूरतमंदों की सहायता करने, आपसी भाईचारा बनाए रखने और समाज में प्रेम व सद्भाव बढ़ाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि धार्मिक पर्व मानवता और सेवा के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देते हैं। इस अवसर पर ओमप्रकाश रहेजा, मास्टर प्रवेश, कृष्ण वधवा और वीरेंद्र मदान सहित अनेक श्रद्धालु मौजूद रहे।
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