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नवरात्र देवियों के शुभागमन का यादगार पर्व : प्रेम दीदी

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 10 Oct 2024 06:13 AM IST
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Navratri is a memorable festival of auspicious arrival of goddesses: Prem Didi
माई सिटी रिपोर्टर
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करनाल। प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय सेक्टर सात के सेवा केंद्र में नवरात्र पर्व पर कार्यक्रम हुआ। जिसमें केंद्र संचालिका राजयोगिनी ब्रह्माकुमारी प्रेम दीदी ने कहा कि नवरात्र और शिवरात्रि पर्व साल में दो बार मनाया जाता है, जबकि अन्य सभी पर्व केवल एक बार मनाए जाते हैं। वास्तव में शिवरात्रि परमात्मा शिव के शुभागमन तथा नवरात्र देवियों के शुभागमन का यादगार पर्व है। शिव और शक्तियों का आपस में संबंध के कारण शिवशक्ति कहा जाता है।
उन्होंने कहा कि नवरात्र में दुर्गा, अंबा, काली, चिंतपुर्णी, मंसा देवी, ज्वाला देवी, वैष्णो देवी, नैना देवी व गायत्री देवी आदि की पूजा होती है। वास्तव में सभी देवियों में सर्वगुण होते हैं, लेकिन किसी एक गुण में वो स्पेशलिस्ट होती हैं, जिस पर उनका नाम पड़ता है। दुर्गा अर्थात दुर्गुणों को दूर करने वाली, अंबा अर्थात सारे विश्व की मां, काली अर्थात विकारों पर विकराल रूप धारण करने वाली, संतोषी अर्थात स्वयं भी संतुष्ट तथा दूसरों को भी संतुष्ट करने वाली, वैष्णो अर्थात विषय विकारों को हरने वाली, नैना देवी सबको नजर से निहाल करने वाली, गायत्री यानी सबमें उमंग उत्साह भरने वाली। सभी देवियों के नाम गुण व कर्तव्यवाचक है।
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देवियां सदा ब्रह्मचारी तन और मन से पवित्र होती हैं। वो एक कन्या का रूप होती हैं तब ही भक्तजन जागरण करने वाले दिन उनको मां-मां कहकर पुकारते हैं, क्योंकि वो कोई दो बच्चों को पैदा करने वाली मां नहीं वह तो सारे विश्व की आत्माओं का ज्ञान और शक्तियों तथा स्नेह से रूहानी पालना करती हैं। देवियों की अष्टभुजा उनकी आठ शक्तियों की निशानी है तथा शेर पर सवारी जीवन मेें शेर जैसी भयानक परिस्थितियां आने पर भी वह उन पर अपनी सूझबूझ और ज्ञान से विजय पा लेती हैं। उनका लाल पहरवास उनकी रूहानियत की लाली का प्रतीक हैं। देवियों के हाथ में तलवार, भाला, त्रिशूल जो दिखाया जाता है वह किसी हिंसा के लिए नहीं अपितु अपने अंदर होने वाले विकारों, कमजोरियों, व्यसनों को सदा के लिए खत्म करने के ज्ञान योग के अस्त्र शस्त्र का प्रतीक है।
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मौके पर ब्रह्माकुमारी बहनों का लाल चुनरी ताज, हार आदि से दिव्य शृंगार किया गया। नन्हें बच्चे जीविका, श्रेया, दिक्षा ने बहुत ही सुंदर माता के भजनों पर नृत्य कर सबको भाव विभोर कर दिया। इस अवसर पर पवन मिश्रा, रामलाल कटारिया, महिंद्र संधु, ऋषिराज शर्मा, जयगोपाल अरोड़ा, हरी कांबोज, ललित सरदाना, शाम भाटिया, कृष्ण खन्ना, संजीव चुटानी, राम कुमार शर्मा, हर्षवर्धन भटनागर, राजेंद्र हांडा, ईश्वर सिंह आदि शामिल रहे।
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