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नवरात्र आज से : अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:52 से दोपहर 12:38 बजे तक
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करनाल। आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा पर वीरवार से नवरात्र का प्रारंभ हो रहा है। पहले दिन मां दुर्गा के स्वरूप मां शैलपुत्री की पूजा-अर्चना कर श्रद्धालु अपनी आध्यात्मिक यात्रा को गति देंगे। पूजन के लिए सुबह 10:15 बजे तक उत्तरा नक्षत्र का पूर्वार्द्ध भाग होगा तथा वैधृति योग दोपहर 3:25 बजे तक है। इसलिए अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:52 से दोपहर 12:38 बजे तक है।
नवरात्र में पूजा-अर्चना को लेकर शहर व जिले भर में मां के मंदिरों को सुंदर एवं भव्य रूप से सजाया गया है। में पूजा की तैयारियां देर शाम तक चलती रहीं। मंदिरों को भव्य तरीके से सजाया गया है। मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं को परेशानी न हो इसके लिए कई बंदोबस्त भी किए गए हैं। कई मंदिरों में दर्शन के लिए पंक्तियां बनाई गई हैं, ताकि कतार में भीड़ न हो। दूसरी ओर बाजारों में भी रौनक रही। पूजन सामग्री, नारियल, घट सहित अन्य वस्तुओं की दुकानों पर लोगों की भीड़ रही।
चांदसमंद गांव के पंडित हरीशचंद्र शास्त्री ने बताया कि कलश स्थापना व ज्योति प्रज्ज्वलन सुबह 11:52 बजे से दोपहर 12:38 के बीच होगी। यह शुभ मुहूर्त दिवाकर पंचांग के अनुसार है। इस बार चतुर्थी का नवरात्रा नहीं है। इस कारण एक नवरात्र कम रहेगा। मलमास का महीना होने से तिथियां घट-बढ़ जाती हैं।
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13 अक्तूबर (बुधवार) को दुर्गाष्टमी मनाई जाएगी। कंजक पूजन एवं ब्रह्म भोज कराने के उपरांत ही श्रद्धालु व्रत खोलेंगे। कुछ लोग दुर्गाष्टमी के अलावा कंजक पूजन एवं अनुष्ठान कार्य को नवमी तिथि को करते हैं। यह इस बार 14 अक्तूबर को है। उन्होंने बताया कि सुबह स्नान के उपरांत मां दुर्गा की पूजा-अर्चना करें। तदोपरांत कलश स्थापना व ज्योति प्रज्ज्वलित करें। यह ज्योति नवरात्र संपन्न होने तक दिन-रात जलेगी। इसमें देसी शुद्ध घी नियमित रूप से डालें। व्रत रखने वालों के लिए अन्न ग्रहण करना वर्जित होता है। नियमानुसार फलाहार करने का विधान है।
ऐसे करें घट स्थापना
घट स्थापना करने के लिए मिट्टी के बर्तन में सात प्रकार के अनाज रखें। फिर कलश में पानी भरकर उसे मिट्टी के पात्र के ऊपर रख दें। अब कलश के ऊपर पत्ते रखें और लाल वस्त्र में नारियल बांध कर रखें। अब भगवान गणेश व कलश की पूजा कर देवी का आह्वान करें।
डोली में सवार होकर आ रही मां दुर्गा
नवरात्र को लेकर इस साल की स्थितियां शुभ नहीं मानी जा रहीं। इसके मुख्य दो कारण है। पहला नवरात्र वीरवार से शुरू हो रहे हैं और अबकी नवरात्र आठ दिनों के हैं। वीरवार से शुरू होने वाले नवरात्र के बारे में कहा जाता है कि मां दुर्गा डोली पर सवार होकर आएंगी। यह शुभ संकेत नहीं माना जाता।
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नवरात्र में पूजा-अर्चना को लेकर शहर व जिले भर में मां के मंदिरों को सुंदर एवं भव्य रूप से सजाया गया है। में पूजा की तैयारियां देर शाम तक चलती रहीं। मंदिरों को भव्य तरीके से सजाया गया है। मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं को परेशानी न हो इसके लिए कई बंदोबस्त भी किए गए हैं। कई मंदिरों में दर्शन के लिए पंक्तियां बनाई गई हैं, ताकि कतार में भीड़ न हो। दूसरी ओर बाजारों में भी रौनक रही। पूजन सामग्री, नारियल, घट सहित अन्य वस्तुओं की दुकानों पर लोगों की भीड़ रही।
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चांदसमंद गांव के पंडित हरीशचंद्र शास्त्री ने बताया कि कलश स्थापना व ज्योति प्रज्ज्वलन सुबह 11:52 बजे से दोपहर 12:38 के बीच होगी। यह शुभ मुहूर्त दिवाकर पंचांग के अनुसार है। इस बार चतुर्थी का नवरात्रा नहीं है। इस कारण एक नवरात्र कम रहेगा। मलमास का महीना होने से तिथियां घट-बढ़ जाती हैं।
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13 अक्तूबर (बुधवार) को दुर्गाष्टमी मनाई जाएगी। कंजक पूजन एवं ब्रह्म भोज कराने के उपरांत ही श्रद्धालु व्रत खोलेंगे। कुछ लोग दुर्गाष्टमी के अलावा कंजक पूजन एवं अनुष्ठान कार्य को नवमी तिथि को करते हैं। यह इस बार 14 अक्तूबर को है। उन्होंने बताया कि सुबह स्नान के उपरांत मां दुर्गा की पूजा-अर्चना करें। तदोपरांत कलश स्थापना व ज्योति प्रज्ज्वलित करें। यह ज्योति नवरात्र संपन्न होने तक दिन-रात जलेगी। इसमें देसी शुद्ध घी नियमित रूप से डालें। व्रत रखने वालों के लिए अन्न ग्रहण करना वर्जित होता है। नियमानुसार फलाहार करने का विधान है।
ऐसे करें घट स्थापना
घट स्थापना करने के लिए मिट्टी के बर्तन में सात प्रकार के अनाज रखें। फिर कलश में पानी भरकर उसे मिट्टी के पात्र के ऊपर रख दें। अब कलश के ऊपर पत्ते रखें और लाल वस्त्र में नारियल बांध कर रखें। अब भगवान गणेश व कलश की पूजा कर देवी का आह्वान करें।
डोली में सवार होकर आ रही मां दुर्गा
नवरात्र को लेकर इस साल की स्थितियां शुभ नहीं मानी जा रहीं। इसके मुख्य दो कारण है। पहला नवरात्र वीरवार से शुरू हो रहे हैं और अबकी नवरात्र आठ दिनों के हैं। वीरवार से शुरू होने वाले नवरात्र के बारे में कहा जाता है कि मां दुर्गा डोली पर सवार होकर आएंगी। यह शुभ संकेत नहीं माना जाता।