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मुलाना मेडिकल कालेज ने अब गंभीर मरीजों को भी लेने से किया इंकार
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प्रदेश सरकार की ओर से कोविड अस्पताल बनाए गए एमएम मुलाना मेडिकल कालेज ने अब करनाल के कोरोना के गंभीर मरीजों को भी दाखिल करने से इंकार कर दिया है। मेडिकल कालेज प्रबंधन का कहना है कि उनके पास गंभीर मरीजों के लिए वेंटीलेटर नहीं है, जो सात वेंटीलेटर हैं, वो पहले से फुल हैं। ऐसे में करनाल के गंभीर मरीजों के सामने समस्या ये है कि आखिर वे दाखिल कहां पर होंगे? क्योंकि करनाल स्थित कल्पना चावला मेडिकल कालेज को कोविड अस्पताल घोषित नहीं किया गया है, इसलिए यहां पर कोविड के सामान्य मरीजों को ही दाखिल किया जाता है और गंभीर मरीजों को मुलाना रेफर किया जाता रहा है।
12 जून को कहा था गंभीर मरीज ही लेंगे
सरकार से हुए अनुबंध के अनुसार, मुलाना मेडिकल कालेज ने कोरोना संक्रमित लोगों के लिए 200 बेड रिजर्व किये थे, लेकिन जिस प्रकार से आसपास के जिलों में कोरोना के केस बढ़ रहे हैं, उससे ये बेड कम पड़ते नजर आ रहे हैं। स्थिति यह है कि मेडिकल कालेज के करीब सभी बेड भर चुके हैं। अब तक करनाल जिले से मिलने वाले सभी कोरोना पाजिटिव मरीजों (लक्षणों और बिना लक्षणों वाले) को मुलाना मेडिकल कालेज भेजा जाता रहा है। करनाल से 80 के करीब मरीज मुलाना मेडिकल कालेज में दाखिल हो चुके हैं। इसके अलावा, वहां पर कैथल, अंबाला और कुरुक्षेत्र जिले से भी मरीज पहुंच रहे हैं। गत 12 जून को एमएम मेडिकल कालेज ने करनाल सीएमओ को पत्र लिखकर कहा था कि वे कोविड के गंभीर मरीजों को भेजें, सामान्य के लिए खुद व्यवस्था करें।
वजह क्या, मरीजों की मौत या फिर पैसे नहीं मिलना
कोरोना के गंभीर मरीजों को लेने से इंकार करने के पीछे एमएम मेडिकल कालेज मुलाना का तर्क है कि सरकार से अनुबंध के अनुसार, उनके पास पांच वेंटीलेटर तय हैं, लेकिन सात वेंटीलेटर लगा रखे हैं और सभी पर मरीज हैं। ऐसे में एक भी वेंटीलेटर खाली नहीं है। उधर, सूत्रों का दावा है कि एमएम मेडिकल कालेज का सरकार की तरफ लाखों रुपये बकाया है। पैसा नहीं आना भी एक वजह है। दूसरा पहले लगातार कोरोना के मरीज ठीक होकर घर जा रहे थे, लेकिन अब अचानक से कोरोना के मरीजों में मरने वालों की संख्या बढ़ी है। ऐसे में कालेज की छवि खराब न हो जाए, इसलिए भी गंभीर मरीज लेेने से इंकार कर रहा है।
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हमारे पर जितने वेंटीलेटर हैं, उन सभी पर मरीजों को रखा गया है। करनाल के स्वास्थ्य विभाग को इस बारे में पत्र लिखकर अवगत करा दिया गया है कि अब वे गंभीर मरीजों को एमएम मुलाना मेडिकल कालेज न भेजें। इसके साथ ही विभाग के एसीएस को भी इसकी जानकारी दे दी गई है। हम जो कर रहे हैं वो सब सरकार से अनुबंध के अनुसार किया जा रहा है। अभी तक मरीजों की पेमेंट नहीं आई है। -डा. एलएन गर्ग, डिप्टी एमएस, एमएम कालेज, मुलाना।
एमएम मेडिकल कालेज की ओर से पत्र आया है कि अब वे करनाल के गंभीर मरीजों को नहीं लेंगे। रविवार को एक मरीज को अंबाला भेजा जाना था, लेकिन उन्होंने वेंटीलेटर नहीं होने की बात कही है। ऐसे में गंभीर मरीजों को कल्पना चावला मेडिकल कालेज में ही इलाज के लिए दाखिल किया गया है। हालांकि, मेडिकल कालेज को कोविड अस्पताल घोषित नहीं किया गया है। इस बारे में उच्च अधिकारियों से बात की जाएगी और इसका समाधान किया जाएगा।-डा. जगदीश दुरेजा, निदेशक, कल्पना चावला मेडिकल कालेज।
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12 जून को कहा था गंभीर मरीज ही लेंगे
सरकार से हुए अनुबंध के अनुसार, मुलाना मेडिकल कालेज ने कोरोना संक्रमित लोगों के लिए 200 बेड रिजर्व किये थे, लेकिन जिस प्रकार से आसपास के जिलों में कोरोना के केस बढ़ रहे हैं, उससे ये बेड कम पड़ते नजर आ रहे हैं। स्थिति यह है कि मेडिकल कालेज के करीब सभी बेड भर चुके हैं। अब तक करनाल जिले से मिलने वाले सभी कोरोना पाजिटिव मरीजों (लक्षणों और बिना लक्षणों वाले) को मुलाना मेडिकल कालेज भेजा जाता रहा है। करनाल से 80 के करीब मरीज मुलाना मेडिकल कालेज में दाखिल हो चुके हैं। इसके अलावा, वहां पर कैथल, अंबाला और कुरुक्षेत्र जिले से भी मरीज पहुंच रहे हैं। गत 12 जून को एमएम मेडिकल कालेज ने करनाल सीएमओ को पत्र लिखकर कहा था कि वे कोविड के गंभीर मरीजों को भेजें, सामान्य के लिए खुद व्यवस्था करें।
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वजह क्या, मरीजों की मौत या फिर पैसे नहीं मिलना
कोरोना के गंभीर मरीजों को लेने से इंकार करने के पीछे एमएम मेडिकल कालेज मुलाना का तर्क है कि सरकार से अनुबंध के अनुसार, उनके पास पांच वेंटीलेटर तय हैं, लेकिन सात वेंटीलेटर लगा रखे हैं और सभी पर मरीज हैं। ऐसे में एक भी वेंटीलेटर खाली नहीं है। उधर, सूत्रों का दावा है कि एमएम मेडिकल कालेज का सरकार की तरफ लाखों रुपये बकाया है। पैसा नहीं आना भी एक वजह है। दूसरा पहले लगातार कोरोना के मरीज ठीक होकर घर जा रहे थे, लेकिन अब अचानक से कोरोना के मरीजों में मरने वालों की संख्या बढ़ी है। ऐसे में कालेज की छवि खराब न हो जाए, इसलिए भी गंभीर मरीज लेेने से इंकार कर रहा है।
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हमारे पर जितने वेंटीलेटर हैं, उन सभी पर मरीजों को रखा गया है। करनाल के स्वास्थ्य विभाग को इस बारे में पत्र लिखकर अवगत करा दिया गया है कि अब वे गंभीर मरीजों को एमएम मुलाना मेडिकल कालेज न भेजें। इसके साथ ही विभाग के एसीएस को भी इसकी जानकारी दे दी गई है। हम जो कर रहे हैं वो सब सरकार से अनुबंध के अनुसार किया जा रहा है। अभी तक मरीजों की पेमेंट नहीं आई है। -डा. एलएन गर्ग, डिप्टी एमएस, एमएम कालेज, मुलाना।
एमएम मेडिकल कालेज की ओर से पत्र आया है कि अब वे करनाल के गंभीर मरीजों को नहीं लेंगे। रविवार को एक मरीज को अंबाला भेजा जाना था, लेकिन उन्होंने वेंटीलेटर नहीं होने की बात कही है। ऐसे में गंभीर मरीजों को कल्पना चावला मेडिकल कालेज में ही इलाज के लिए दाखिल किया गया है। हालांकि, मेडिकल कालेज को कोविड अस्पताल घोषित नहीं किया गया है। इस बारे में उच्च अधिकारियों से बात की जाएगी और इसका समाधान किया जाएगा।-डा. जगदीश दुरेजा, निदेशक, कल्पना चावला मेडिकल कालेज।