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जीवन जीना सिखाती है मातृभाषा, हमें पंजाबी पर है नाज

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 22 Feb 2022 02:05 AM IST
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Mother tongue teaches to live life
करनाल। गुरुनानक खालसा कॉलेज में सरदार तारा सिंह की याद में कार्यक्रम का आयोजन किया गया। सबसे पहले शबद गायन किया गया। इसके बाद पूर्व सांसद एवं पूर्व प्रधान सरदार तारा सिंह को श्रद्धा सुमन अर्पित किए गए। इस अवसर पर वक्ताओं ने उनके श्रेष्ठ कार्यों के बारे में जानकारी दी। इस दौरान उन्होंने भाषण के माध्यम से पंजाबी भाषा के इतिहास पर भी प्रकाश डाला। पंजाबी विश्वविद्यालय पटियाला के पूर्व डीन प्रो. डॉ. जसविंदर सिंह ने मुख्य वक्ता के रूप में शिरकत की। उन्होंने कहा कि मातृभाषा हमारे व्यक्तित्व की पहचान है।
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उन्होंने कहा कि मातृभाषा का किसी दूसरी भाषा से विरोध, तुलना या दुश्मनी नहीं हो सकती। डॉ. हरसिमरन सिंह रंधावा ने कहा कि मातृभाषा हमें केवल भाषा ही नहीं सिखाती अपितु हमें जिंदगी जीना भी सिखाती है। अपनी संस्कृति को प्रदर्शित करने में मातृभाषा का महत्वपूर्ण योगदान है। प्राचार्य ने कहा कि पंजाबी भाषा भारत में 11वीं, विश्व में नौवीं, पंजाब में पहली और हरियाणा में दूसरी भाषा है। इसलिए आज मातृभाषा दिवस मनाया जा रहा है। डॉ. गुरिंदर सिंह ने कहा कि 21 फरवरी 1952 में पहली बार मातृभाषा दिवस मनाया गया था। मंच का संचालन प्रो. जतिंद्रपाल ने किया। इस मौके पर कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के पंजाबी विभाग के पूर्व अध्यक्ष डॉ. हरसिमरन सिंह रंधावा, प्राचार्य डॉ. मेजर सिंह ने की, प्रो. प्रवीण कोर, प्रीतपाल, पूर्व प्राचार्य डॉ. एसपी सिंह, कॉलेज प्रबंधन समिति के उप प्रधान सुरेंद्र पाल सिंह पसरीचा, डॉ. बीर सिंह, डॉ. देवी भूषण, इमरान, प्रदीप और दीपक मौजूद रहे।
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