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Karnal News: शिविर में किया 50 से अधिक लोगों का उपचार
Wed, 19 Nov 2025 01:18 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
Updated Wed, 19 Nov 2025 01:18 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। सेक्टर-9 स्थित सहज योग प्राकृतिक चिकित्सा केंद्र में मंगलवार को अमर उजाला फाउंडेशन ने प्राकृतिक चिकित्सा स्वास्थ्य जांच एवं परामर्श शिविर का आयोजन किया। आयुष विभाग के सहयोग से आयोजित शिविर में 50 से अधिक लोगों ने स्वास्थ्य परीक्षण कराया। एक्यूप्रेशर और षटक्रिया के जरिए प्राकृतिक उपचार किया गया।
अध्यक्षता जिला आयुष अधिकारी डॉ. सतपाल ने की। आयुष विभाग से डॉ. अमित पुंज ने प्राकृतिक चिकित्सा के सिद्धांतों के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक चिकित्सा में मिट्टी-सेवन, जल-उपचार, सूर्य-स्नान, उपवास, योग, मालिश और प्रकृति अनुकूल दिनचर्या को स्वास्थ्य सुधार का प्रमुख माध्यम माना जाता है।
शिविर में 10 से 12 लोगों का एक्यूप्रेशर बिंदुओं पर दबाव के जरिये शरीर की ऊर्जा को संतुलित करने के लिए विशेष उपचार किया गया। इस क्रिया को दिनचर्या में अपनाने की सलाह भी दी गई। कुछ मामलों में शरीर को डिटॉक्स करने के लिए उपवास की सलाह दी गई। बताया गया कि इससे पेट की पाचन क्रिया संतुलित रहेगी। विभाग के मुख्य फार्मासिस्ट नरेश कुमार ने सेवाएं दीं।
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लोगों को करवाई जल धौति क्रिया
सेक्टर-6 स्थित मल्टी थेरेपी सेंटर से डॉ. दीपिका ने षटक्रिया के बारे में बताया। षटक्रिया छह प्राचीन योगिक शुद्धि क्रियाओं को कहा जाता है। इनका उद्देश्य शरीर को शुद्ध करना है। इसमें नेति, धौति, बस्ती, नौलि, त्राटक और कपालभाति शामिल हैं। उन्होंने चार लोगों को जल धौति क्रिया करवाई। एक हठ योग शुद्धि क्रिया है जिसमें गुनगुना नमकीन पानी पीकर पेट साफ करने के लिए उल्टी की जाती है। यह पाचन तंत्र को साफ करने के लिए की जाती है। इसमें मुंह से लेकर आंतों तक की सफाई की जाती है।
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करनाल। सेक्टर-9 स्थित सहज योग प्राकृतिक चिकित्सा केंद्र में मंगलवार को अमर उजाला फाउंडेशन ने प्राकृतिक चिकित्सा स्वास्थ्य जांच एवं परामर्श शिविर का आयोजन किया। आयुष विभाग के सहयोग से आयोजित शिविर में 50 से अधिक लोगों ने स्वास्थ्य परीक्षण कराया। एक्यूप्रेशर और षटक्रिया के जरिए प्राकृतिक उपचार किया गया।
अध्यक्षता जिला आयुष अधिकारी डॉ. सतपाल ने की। आयुष विभाग से डॉ. अमित पुंज ने प्राकृतिक चिकित्सा के सिद्धांतों के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक चिकित्सा में मिट्टी-सेवन, जल-उपचार, सूर्य-स्नान, उपवास, योग, मालिश और प्रकृति अनुकूल दिनचर्या को स्वास्थ्य सुधार का प्रमुख माध्यम माना जाता है।
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शिविर में 10 से 12 लोगों का एक्यूप्रेशर बिंदुओं पर दबाव के जरिये शरीर की ऊर्जा को संतुलित करने के लिए विशेष उपचार किया गया। इस क्रिया को दिनचर्या में अपनाने की सलाह भी दी गई। कुछ मामलों में शरीर को डिटॉक्स करने के लिए उपवास की सलाह दी गई। बताया गया कि इससे पेट की पाचन क्रिया संतुलित रहेगी। विभाग के मुख्य फार्मासिस्ट नरेश कुमार ने सेवाएं दीं।
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लोगों को करवाई जल धौति क्रिया
सेक्टर-6 स्थित मल्टी थेरेपी सेंटर से डॉ. दीपिका ने षटक्रिया के बारे में बताया। षटक्रिया छह प्राचीन योगिक शुद्धि क्रियाओं को कहा जाता है। इनका उद्देश्य शरीर को शुद्ध करना है। इसमें नेति, धौति, बस्ती, नौलि, त्राटक और कपालभाति शामिल हैं। उन्होंने चार लोगों को जल धौति क्रिया करवाई। एक हठ योग शुद्धि क्रिया है जिसमें गुनगुना नमकीन पानी पीकर पेट साफ करने के लिए उल्टी की जाती है। यह पाचन तंत्र को साफ करने के लिए की जाती है। इसमें मुंह से लेकर आंतों तक की सफाई की जाती है।