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माइम की प्रस्तुति से कन्या भ्रूण हत्या पर किया कटाक्ष

Sun, 28 Feb 2016 12:12 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, करनाल
ब्यूरो/अमर उजाला, करनाल Updated Sun, 28 Feb 2016 12:12 AM IST
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करनाल के सरस मेले के सांस्कृतिक मंच से जैसे ही आरपीआईआईटी के बच्चों ने कन्या भ्रूण हत्या के खिलाफ हो री चिरिया, अंगना में फिर आजा रे की धुन पर माइम की प्रस्तुति दी तो पंडाल में बैठा हर दर्शक  भावुक हो उठा। माइम के मूक दृश्यों में मां मुझे जी लेने दो की ध्वनि गूंजी तो उस समय दर्शकों की आंखें भर आई। 

केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय, राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन तथा जिला प्रशासन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित सरस मेले में भिन्न-भिन्न प्रदेशों से आये कलाकारों के साथ-2 स्थानीय कॉलेज व स्कूलों के बच्चे सांस्कृ तिक कार्यक्रमों के माध्यम से भारत की विभिन्न लोक कला व सामाजिक कुरीतियों को दूर करने का संदेश दे रहे हैं। सांस्कृतिक कार्यक्रम के प्रात:कालीन सत्र में लोक कलाकारों के साथ कॉलेज व स्कूल के बच्चों ने कार्यक्रम प्रस्तुत किए। 

कार्यक्रम का शुभारंभ आरपीआईआईटी कॉलेज की छात्राओं द्वारा सरस्वती वंदना से हुआ। उसके बाद विशाल ने अपने गीत घघरे वी गए, फूलकारियां वी गईयां, कन्ना विच घुंघरू ते वालियां वी गईयां के माध्यम से लुप्त हो रहे पारंपरिक परिधानों व शृंगारिक गहनों के महत्व को दर्शाया है। इसी प्रकार सतीश व विशेष ने लोक गीतों के माध्यम से दर्शकों का मन मोह लिया। राजस्थानी लोक नृत्य कालबेलिया के जरिये कलाकारों ने दर्शकों का खूब मनोरंजन किया। सरस मेले में पहुंच पंजाबी कलाकार जगजीत बोपाराय ग्रुप ने पारंपरिक वाद्य यंत्र टट व सारंगी के मधुर स्वरों में लयबद्ध हीर-रांझा का किस्सा सुनाया। इसी प्रकार लोक कलाकारों द्वारा बजाई गई बीन की धुन पर हर दर्शक झूमता नजर आया।

हरियाणवी स्किट से लूटी वाहवाही

धर्म भेदभाव व अन्य सामाजिक कुरीतियों पर कटाक्ष करती हुई हरियाणवी स्किट डीएवी कॉलेज के छात्रों ने पेश की तो सारा पंडाल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। उनके द्वारा प्रस्तुत स्किट के हर शब्द में दर्शकों को एक नया संदेश मिल रहा था। कार्यक्रम में पंकज के गीत व स्वीटी के सोलो डांस ने माहौल को और खुशनुमा बना दिया। मंच संचालन कर रहे संजीव शाद ने अपने चिर-परिचित अंदाज में देश भक्ति शायरी के माध्यम से युवाओं में नव ऊर्जा संचार करने का काम किया।

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राजस्थान की कठपुतली के सभी हुए कायल

सरस मेले में विभिन्न राज्यों के शिल्पकार पर्यटकों को अपनी-2 कलाकृतियों से पर्यटकों को रूबरू करवा रहे हैं। मेले में स्टाल नंबर 135 पर राजस्थान के जयपुर से पहुंची शांति भट्ट व सरस्वती की राजस्थानी की लोक कला कठपुतली के पर्यटक कायल हो रहे हैं। 

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सरस्वती ने कहा कि यह लोक कला राजस्थान की पारंपरिक लोक कला है। पुराने समय में राजा-महाराजाओं व रजवाड़ों के दरबारों में कठपुतली के माध्यम से मनोरंजन किया जाता था। कठपुतली में राजा-रानी व नृत्यांगनाओं का चित्रण किया जाता है। कठपुतली को शुभ माना जाता है। लोग इन्हें अपने घरों में सजाते हैं। उन्होंने बताया कि उनका पूरा परिवार इस लोक कला से जुड़ा हुआ है व यही कला उनके जीवन यापन का सहारा बनी हुई है। उनके परिवार के सदस्य राजस्थान में कठपुतली शो भी दिखाते हैं। कठपुतली को बनाने में घोटा, रेशम धागा, लकड़ी व विभिन्न रंग के कपड़ों का प्रयोग किया जाता है। एक कठपुतली का जोड़ा वह 200 रुपये में बेचती हैं। उन्होंने बताया कि वे देश भर में लगने वाले सरस मेलों व अन्य बड़े-2 महोत्सवों में कठपुतलियां लेकर जाती हैं। कठपुतली के साथ-2 बाल हैंगिंग व राजस्थानी तोरन भी लाई हैं। सरस्वती ने बताया कि करनाल के सरस मेले में पर्यटकों ने भारी उत्साह के साथ उनकी लगभग सभी कठपुतलियां खरीद ली हैं।

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महिलाओं को भा रहे प्योर टसर और सिल्क के कपड़े

सरस मेले में स्टाल नंबर 252 पर भागलपुर बिहार से मोहम्मद सिराज अंसारी अपने गांव में ही बनाए गए प्योर टसर और सिल्क के वस्त्रों को लेकर पहुंचे हैं, जिन्हें पर्यटक विशेषकर महिलाएं खूब चाव से खरीद रही हैं। 

अंसारी ने बताया कि उनके पास प्योर टसर से बनी साड़ियां हैं, जिन्हें वह दिल्ली में बड़ी-2 महिला राजनेताओं को दे चुके हैं। उनके पास सिल्क के वस्त्र हैं इन वस्त्रों की विशेषता यह है कि ये आग जल्दी नहीं पकड़ते। उनके वस्त्र देश के साथ-2 विदेशों में भी बड़े पसंद किए जाते हैं। 



वस्त्रों की विशेषता बताते हुए उन्होंने बताया कि उनके पास सिल्क मटका, मालवरी सिल्क, कटिया, विष्णुपुरी कटिया, आसाम कटिया, कॉटन टसर जैसी अनेक वैरायटी मौजूद हैं। वह दिल्ली के सरोजनी नगर में स्थापित कलस्टर में बैठते हैं उनके पास एक हजार से लेकर 10 हजार रुपये तक की साड़ी मौजूद है। उन्होंने बताया कि पिछले दिनों कुरू क्षेत्र में आयोजित राज्य स्तरीय गीता जयंती समारोह में उन्होंने स्टाल लगाई थी। करनाल के सरस मेले में कुरुक्षेत्र व आसपास के पर्यटक विशेषतौर पर उनके पास पहुंचकर उनके वस्त्रों को दिलचस्पी से खरीद रहे हैं। उनकी स्टाल पर कुरुक्षेत्र से पहुंची महिला पर्यटक मोनिका, सोनिया, ट्विंकल आदि ने बताया कि वे विशेषतौर से करनाल सरस मेले में मोहम्मद सिराज अंसारी के बने वस्त्र लेने आई हैं।


मेले के पलों को किया सेल्फी में कैद 

सरस मेले में युवा पर्यटकों की भारी भीड़ उमड़ रही है। मेले में लोक कलाकार इन युवाओं का मनोरंजन कर रहे हैं वहीं मेले में विभिन्न राज्यों से आए हथकरघा व शिल्पकार अपनी कला से इन युवाओं को अपनी ओर आकर्षित कर रहे हैं। मेले में पहुंचा युवा वर्ग इन पलों को अपने मोबाइल में सेल्फी के साथ कैद करता हुआ नजर आ रहा है। मेले में पहुंची डीएवी बीएड गर्ल्स कॉलेज की छात्राओं ने सेल्फी लेने के बाद बताया कि उन्हें यहां पूरे भारत के दर्शन हो रहे हैं तथा विभिन्न राज्यों की लोक संस्कृति को जानने का अवसर मिल रहा है।

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