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मांगों को लेकर दो घंटे गरजीं मिड डे मिल वर्कर्स

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 14 Nov 2021 02:42 AM IST
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Mid day mill workers roared for two hours for demands
71: सैक्टर 9 से लघु सचिवालय तक मिड डे मील वर्कर्स यूनियन के लोगों ने किया प्रदर्शन निकाला पैदल मार्च
मांगों को लेकर प्रदेश भर की मिड डे मील वर्कर्स ने शनिवार को करनाल में प्रदर्शन किया। मिड डे मील वर्कर्स अटल पार्क के नजदीक एकत्रित हुईं और जुलूस के रूप में लघु सचिवालय पहुंची। यहां पर उन्होंने करीब दो घंटे तक नारेबाजी की। नाराज वर्कर्स ने यहां पर पड़ाव डालना था, लेकिन इससे पहले ही उन्हें शिक्षा मंत्री की ओर से मुलाकात का समय मिल गया। अब 17 नवंबर को वर्कर्स का प्रतिनिधिमंडल चंडीगढ़ में शिक्षा मंत्री से मुलाकात करेगा। वर्करों की मांग है कि स्कूलों में बच्चों के लिए तुरंत खाना बनना शुरू हो, वर्करों को न्यूनतम वेतन 12 महीने मिले और नई शिक्षा नीति 2020 रद्द हो।
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मिड-डे-मील वर्कर्स फेडरेशन के राष्ट्रीय महासचिव जय भगवान ने कहा कि सरकार मिड-डे-मील योजना का नाम बदलकर इसे खत्म करना चाहती है। योजना को ठेकेदारों को देने का प्रयास किया जा रहा हैं। सरकार योजना के तहत केंद्रीय रसोई घर और डीबीटी शुरू कर रही है। मिड-डे-मील योजना के खाते बंद कर दिए गए हैं। केंद्र सरकार नई शिक्षा नीति लेकर आई है। इससे बड़े पैमाने पर सरकारी स्कूल बंद हो जाएंगे। ये सब करके सरकार मिड डे मील वर्कर्स के रोजगार को खत्म करना चाहती है। जिसे किसी भी रूप में स्वीकार नहीं किया जाएगा। इस मौके पर यूनियन की प्रदेश अध्यक्ष सरोज, महासचिव सरबती देवी, सीआईटीयू प्रदेश अध्यक्ष सुरेखा मौजूद रहीं। इसके अलावा धर्मेंद्र डांडा, इंदर सिंह बधाना, सुनीता, कृष्ण शर्मा, जगमाल सिंह, सतपाल सैनी भी प्रदर्शन में शामिल रहे।
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पंजीकरण में भी नहीं किया शामिल
संगठन नेताओं ने कहा कि सरकार असंगठित क्षेत्र के मजदूरों का पंजीकरण कर रही है, लेकिन इसमें मिड डे मील वर्कर्स का नाम शामिल नहीं है। जबकि आंगनबाड़ी वर्कर-हेल्पर और आशा वर्कर को शामिल किया गया है। सरकार मिड डे मिल को मजदूर का दर्जा भी नहीं दे रही है। इससे भी वर्करों में रोष है।
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