{"_id":"67bcd9d2ebd42afae9070899","slug":"methods-for-identifying-insects-karnal-news-c-18-knl1008-588560-2025-02-25","type":"story","status":"publish","title_hn":"Karnal News: कीटों की पहचान के लिए बताए तरीके","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Karnal News: कीटों की पहचान के लिए बताए तरीके
विज्ञापन
माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। भारतीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान संस्थान (आईआईडब्ल्यूबीआर), करनाल के तत्वावधान में सोमवार को गेहूं व जौ में फसल सुरक्षा परीक्षणों में एकरूप आंकड़े दर्ज करने व उन्हें रिपोर्ट करने पर दो दिवसीय प्रशिक्षण शुरू किया गया। जिससे वैज्ञानिकों को नई किस्मों व रोगों, कीटों की पहचान करने के तरीके बताए गए।
भारतीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान संस्थान के कार्यवाहक निदेशक डॉ. ओम प्रकाश अहलावत बतौर मुख्य अतिथि पहुंचे। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण से गेहूं व जौ अनुसंधान के क्षेत्र में नए शामिल हुए फसल रोग व कीट की पहचान होती है, जिनसे वैज्ञानिकों को नई प्रजातियों खासतौर पर रोगों व कीड़ों के लिए प्रतिरोधी किस्मों के प्रजनन कार्यक्रम को मजबूती मिलती है। जब ये जानकारी किसानों तक पहुंचती है तो नई रोग रोधी किस्मों से आमदनी में बढ़ोत्तरी होती है। पाठ्यक्रम निदेशक डॉ. प्रदीप शर्मा ने निदेशक, वक्ताओं का स्वागत करते हुए प्रशिक्षण की रूपरेखा बताई।
विज्ञापन
करनाल। भारतीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान संस्थान (आईआईडब्ल्यूबीआर), करनाल के तत्वावधान में सोमवार को गेहूं व जौ में फसल सुरक्षा परीक्षणों में एकरूप आंकड़े दर्ज करने व उन्हें रिपोर्ट करने पर दो दिवसीय प्रशिक्षण शुरू किया गया। जिससे वैज्ञानिकों को नई किस्मों व रोगों, कीटों की पहचान करने के तरीके बताए गए।
भारतीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान संस्थान के कार्यवाहक निदेशक डॉ. ओम प्रकाश अहलावत बतौर मुख्य अतिथि पहुंचे। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण से गेहूं व जौ अनुसंधान के क्षेत्र में नए शामिल हुए फसल रोग व कीट की पहचान होती है, जिनसे वैज्ञानिकों को नई प्रजातियों खासतौर पर रोगों व कीड़ों के लिए प्रतिरोधी किस्मों के प्रजनन कार्यक्रम को मजबूती मिलती है। जब ये जानकारी किसानों तक पहुंचती है तो नई रोग रोधी किस्मों से आमदनी में बढ़ोत्तरी होती है। पाठ्यक्रम निदेशक डॉ. प्रदीप शर्मा ने निदेशक, वक्ताओं का स्वागत करते हुए प्रशिक्षण की रूपरेखा बताई।
विज्ञापन