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एमसीआई के भी नियम नहीं मानता कल्पना चावला मेडिकल कालेज
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कल्पना चावला राजकीय मेडिकल कॉलेज, मेडिकल काउंसिल ऑॅफ इंडिया (एमसीआई) के नियमों की धज्जियां उड़ा रहा है। एमसीआई ने मरीजों और उनके तीमारदारों के साथ-साथ कॉलेज में पढ़ने वाले विद्यार्थियों तक के लिए नियम बनाए हैं, लेकिन कॉलेज प्रबंधन इन नियमों को परवाह किए बगैर मनमर्जी कर रहा है। बात हो रही है मेडिकल कॉलेज की वेबसाइट की। कॉलेज की वेबसाइट अधूरी जानकारी दे रही है। यहां पर केवल मेडिकल के डायरेक्टर का संदेश है। न शिकायत के लिए कोई पता है और न ही ईमेल एड्रेस, टेलीफोन नंबर तो दूर की बात है।
कल्पना चावला मेडिकल कॉलेज को दो साल पहले करीब 650 करोड़ से तैयार नए भवन में शिफ्ट किया गया था। उस समय सीएम मनोहर लाल और स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज ने दावा किया था कि कॉलेज आसपास के क्षेत्र के स्वास्थ्य को लेकर बेहतर काम करेगा। हालांकि, बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं की बजाए कालेज सिक्योरिटी गार्डों के विवादों समेत डाक्टरों द्वारा मरीजों को गलत तरीके से रेफर करने को सुर्खियों में रहा है। अब एक नई बात सामने आई है कि कॉलेज ने अपनी वेबसाइट से कई चीजों को छिपाया हुआ है। नियमों के अनुसार, इनमें कॉलेज के प्रिंसिपल और डायरेक्टर समेत डीन, चिकित्सा अधीक्षक के नाम और पते समेत उनकी क्वालिफिकेशन के साथ उनके फोन नंबर तक वेबसाइट पर होने जरूरी हैं। कॉलेज द्वारा केवल डायरेक्टर का ही संदेश दिखाई दे रहा है। कॉलेज के डीन और चिकित्सा अधीक्षक के बारे में कोई भी जानकारी नहीं है, जबकि कॉलेज के लिए दोनों की पद काफी महत्वपूर्ण हैं। साथ ही स्टाफ की बायोमेट्रिक हाजिरी का रिकार्ड भी डालना होता है। यह रिकार्ड सभी कालेजों को माह के पहले सप्ताह में अपडेट करना होता है।
ये हैं एमसीआई नियम
एमसीआई के नियमों के तहत हर मेडिकल कॉलेज को संस्थान में होने वाले प्रोग्राम, कान्फ्रेंस और शैक्षणिक गतिविधियों की जानकारी देनी होती है। साथ ही फैकल्टी और स्टूडेंट्स द्वारा प्राप्त किए अवार्ड और उपलब्धियों की जानकारी देनी होती है। संबंधित यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर और रजिस्ट्रार समेत पिछले एक साल के परिणाम की जानकारी देनी होती है। इसके अलावा, अस्पताल के क्लीनिकल मेटेरियल की जानकारी देनी होती है, जिसमें सभी विभागों को शामिल किया गया है। इसके तहत ये बताना होता है कि किस विभाग में कितने आपरेशन हुए, कितनी डिलिवरी हुई और कितने मरीजों का इलाज किया गया और कितनों को किस कारण रेफर किया गया। लेकिन कॉलेज द्वारा इस प्रकार की कोई जानकारी नहीं दी जा रही है।
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नहीं मिलती एक दिन पहले ओपीडी के डॉक्टरों की जानकारी
बता दें कि मेडिकल कॉलेज की ओर से ओपीडी में बैठने वाले डाक्टरों की जानकारी मिलनी चाहिए थी। इसको लेकर खुद चिकित्सा अधीक्षक ने सभी विभागाध्यक्षों को पत्र लिखकर संबंधित स्टॉफ की जानकारी मांगी थी, ताकि एक दिन पहले ही पूरी जानकारी वेबसाइट पर डालनी होती है। इससे मरीजों को संबंधित विभाग के संबंधित डाक्टर की जानकारी मिल सकेगी कि वह ओपीडी में मिलेंगे की नहीं। लेकिन दो साल से ज्यादा का समय होने के बाद भी ये सिस्टम शुरू नहीं किया गया और मरीजों की परेशानी झेलनी पड़ रही है।
जल्द करेंगे अपडेट : डॉ. गर्ग
इस बारे में मेडिकल कालेज के प्रवक्ता डॉ. गुलशन गर्ग का कहना है कि कॉलेज की ओर से नियमों के तहत की कार्य किया गया है। अगर पता और मोबाइल नंबर नहीं है तो इस बारे में आईटी सैल से बात की जाएगी और जो भी जानकारी जरूरी होगी, उसको वेबसाइट पर अपडेट किया जाएगा।
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कल्पना चावला मेडिकल कॉलेज को दो साल पहले करीब 650 करोड़ से तैयार नए भवन में शिफ्ट किया गया था। उस समय सीएम मनोहर लाल और स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज ने दावा किया था कि कॉलेज आसपास के क्षेत्र के स्वास्थ्य को लेकर बेहतर काम करेगा। हालांकि, बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं की बजाए कालेज सिक्योरिटी गार्डों के विवादों समेत डाक्टरों द्वारा मरीजों को गलत तरीके से रेफर करने को सुर्खियों में रहा है। अब एक नई बात सामने आई है कि कॉलेज ने अपनी वेबसाइट से कई चीजों को छिपाया हुआ है। नियमों के अनुसार, इनमें कॉलेज के प्रिंसिपल और डायरेक्टर समेत डीन, चिकित्सा अधीक्षक के नाम और पते समेत उनकी क्वालिफिकेशन के साथ उनके फोन नंबर तक वेबसाइट पर होने जरूरी हैं। कॉलेज द्वारा केवल डायरेक्टर का ही संदेश दिखाई दे रहा है। कॉलेज के डीन और चिकित्सा अधीक्षक के बारे में कोई भी जानकारी नहीं है, जबकि कॉलेज के लिए दोनों की पद काफी महत्वपूर्ण हैं। साथ ही स्टाफ की बायोमेट्रिक हाजिरी का रिकार्ड भी डालना होता है। यह रिकार्ड सभी कालेजों को माह के पहले सप्ताह में अपडेट करना होता है।
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ये हैं एमसीआई नियम
एमसीआई के नियमों के तहत हर मेडिकल कॉलेज को संस्थान में होने वाले प्रोग्राम, कान्फ्रेंस और शैक्षणिक गतिविधियों की जानकारी देनी होती है। साथ ही फैकल्टी और स्टूडेंट्स द्वारा प्राप्त किए अवार्ड और उपलब्धियों की जानकारी देनी होती है। संबंधित यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर और रजिस्ट्रार समेत पिछले एक साल के परिणाम की जानकारी देनी होती है। इसके अलावा, अस्पताल के क्लीनिकल मेटेरियल की जानकारी देनी होती है, जिसमें सभी विभागों को शामिल किया गया है। इसके तहत ये बताना होता है कि किस विभाग में कितने आपरेशन हुए, कितनी डिलिवरी हुई और कितने मरीजों का इलाज किया गया और कितनों को किस कारण रेफर किया गया। लेकिन कॉलेज द्वारा इस प्रकार की कोई जानकारी नहीं दी जा रही है।
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नहीं मिलती एक दिन पहले ओपीडी के डॉक्टरों की जानकारी
बता दें कि मेडिकल कॉलेज की ओर से ओपीडी में बैठने वाले डाक्टरों की जानकारी मिलनी चाहिए थी। इसको लेकर खुद चिकित्सा अधीक्षक ने सभी विभागाध्यक्षों को पत्र लिखकर संबंधित स्टॉफ की जानकारी मांगी थी, ताकि एक दिन पहले ही पूरी जानकारी वेबसाइट पर डालनी होती है। इससे मरीजों को संबंधित विभाग के संबंधित डाक्टर की जानकारी मिल सकेगी कि वह ओपीडी में मिलेंगे की नहीं। लेकिन दो साल से ज्यादा का समय होने के बाद भी ये सिस्टम शुरू नहीं किया गया और मरीजों की परेशानी झेलनी पड़ रही है।
जल्द करेंगे अपडेट : डॉ. गर्ग
इस बारे में मेडिकल कालेज के प्रवक्ता डॉ. गुलशन गर्ग का कहना है कि कॉलेज की ओर से नियमों के तहत की कार्य किया गया है। अगर पता और मोबाइल नंबर नहीं है तो इस बारे में आईटी सैल से बात की जाएगी और जो भी जानकारी जरूरी होगी, उसको वेबसाइट पर अपडेट किया जाएगा।