{"_id":"5dc32eb28ebc3e5afc2f0381","slug":"medical-college-karnal-karnal-news-knl108438165","type":"story","status":"publish","title_hn":"हाईकोर्ट पहुंचा मामला, सरकार से दो दिन में मांगा जवाब","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
हाईकोर्ट पहुंचा मामला, सरकार से दो दिन में मांगा जवाब
विज्ञापन
कल्पना चावला राजकीय मेडिकल कॉलेज के निदेशक पद का मामला हाई कोर्ट में पहुंच गया है। फिलहाल मेडिकल कॉलेज के निदेशक पद का अतिरिक्त कार्यभार कालेज के बायोकेमिस्ट्री विभाग की प्रोफेसर एवं कालेज की डीन डॉ. हिमांशु मदान को दिया हुआ है। मेडिकल कॉलेज के सीनियर प्रोफेसरों ने नाराजगी जाहिर कर आरोप लगाये थे कि डॉ. मदान को निदेशक का अतिरिक्त कार्यभार देने में एमसीआई और विभाग के नियमों को दरकिनार किया गया है। इस कारण उन्होंने कोर्ट में याचिका दायर की थी। उसे पंजाब एंड हरियाणा हाई कोर्ट ने स्वीकार कर लिया है और स्टेट ऑफ हरियाणा को नोटिस भेजकर जवाब मांगा है। सीनियर प्रोफेसर डॉ. जगदीश दुरेजा ने आरोप लगाए हैं कि डॉ. हिमांशु मदान का प्रोफेसर पद का अनुभव करीब तीन साल का है, जबकि एमसीआई का नियम है कि निदेशक पद के लिए कम से कम पांच साल का प्रोफेसर पद का अनुभव हो। फिर भी एमसीआई व विभाग के नियमों को दरकिनार कर उन्हें निदेशक का अतिरिक्त पद दिया गया है। मेडिकल कॉलेज में उनसे भी ज्यादा अनुभव के प्रोफेसर हैं। हाई कोर्ट ने नोटिस के द्वारा सरकार से जवाब मांगा है। 8 नवंबर को इस मामले में सुनवाई की जाएगी। दूसरी तरफ बुधवार को कल्पना चावला राजकीय मेडिकल कॉलेज की नवनियुक्त कार्यकारी निदेशक डॉ. हिमांशु मदान ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि मेडिकल कॉलेज में मरीजों किसी तरह की कोई परेशानी नहीं आने दी जाएगी। इसके अलावा जल्द से जल्द डॉक्टरों की भर्ती की जाएगी।
18 प्रतिशत डॉक्टरों की है कमी
कार्यकारी निदेशक डॉ. हिमांशु मदान ने कहा कि मेडिकल काउंसिल आफ इंडिया की गाइड लाइन के अनुसार 18 प्रतिशत डॉक्टर्स की कमी है। रेगुलर डॉक्टर्स और डेमोस्ट्रेटर को मिलाकर 90 का स्टाफ है। जरूरत 108 की है। उन्होंने कहा कि उनका दूसरा चैलेंज यह है कि मरीजों और उनके अटेडेंट में कॉलेज में मिलने वाले इलाज के प्रति विश्वास कैसे पैदा किया जाए। लोगों में धारणा है कि मेडिकल कॉलेज में मरीजों को रेफर किया जाता है इसके लिये एक टीम का गठन किया हुआ है। जो इस पर निगरानी रख रही है।
टोकन और पर्ची लेने में होने वाली देरी पर किया जाएगा विचार
डॉ. हिमांशु ने कहा कि ओपीडी में मरीजों को टोकन और पर्ची लेने में काफी समय लगता है। इसके लिये विचार किया जा रहा है कि इस समय को कैसे कम किया जाए। फिलहाल ओपीडी में करीब 12 काउंटर हैं। इसके साथ जो डॉक्टर स्वीकृत हैं उन्हें जल्द भर्ती किया जाएगा। इनमें चार सुपर स्पेशलिस्ट डॉक्टर्स भी शामिल हैं। इस मौके पर उनके साथ डॉ. गुलशन, डॉ. अशोक जागलान, डॉ. जयंत मौजूद रहे।
विज्ञापन
विज्ञापन
18 प्रतिशत डॉक्टरों की है कमी
कार्यकारी निदेशक डॉ. हिमांशु मदान ने कहा कि मेडिकल काउंसिल आफ इंडिया की गाइड लाइन के अनुसार 18 प्रतिशत डॉक्टर्स की कमी है। रेगुलर डॉक्टर्स और डेमोस्ट्रेटर को मिलाकर 90 का स्टाफ है। जरूरत 108 की है। उन्होंने कहा कि उनका दूसरा चैलेंज यह है कि मरीजों और उनके अटेडेंट में कॉलेज में मिलने वाले इलाज के प्रति विश्वास कैसे पैदा किया जाए। लोगों में धारणा है कि मेडिकल कॉलेज में मरीजों को रेफर किया जाता है इसके लिये एक टीम का गठन किया हुआ है। जो इस पर निगरानी रख रही है।
विज्ञापन
टोकन और पर्ची लेने में होने वाली देरी पर किया जाएगा विचार
डॉ. हिमांशु ने कहा कि ओपीडी में मरीजों को टोकन और पर्ची लेने में काफी समय लगता है। इसके लिये विचार किया जा रहा है कि इस समय को कैसे कम किया जाए। फिलहाल ओपीडी में करीब 12 काउंटर हैं। इसके साथ जो डॉक्टर स्वीकृत हैं उन्हें जल्द भर्ती किया जाएगा। इनमें चार सुपर स्पेशलिस्ट डॉक्टर्स भी शामिल हैं। इस मौके पर उनके साथ डॉ. गुलशन, डॉ. अशोक जागलान, डॉ. जयंत मौजूद रहे।
विज्ञापन