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सीएम दरबार पहुंची महापौर-निगमायुक्त की रार

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 20 Aug 2022 02:24 AM IST
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Mayor-Corporation Commissioner's rage reached CM's court
माई सिटी रिपोर्टर
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करनाल। नगर निगम की कृषि योग्य 50 एकड़ भूमि को वन विभाग को दिए जाने की तैयारी को लेकर निगमायुक्त नरेश नरवाल और महापौर रेनू बाला गुप्ता और पार्षदों के बीच शुरू हुई रार अब मुख्यमंत्री के साथ-साथ हरियाणा सरकार के उच्चाधिकारियों तक पहुंच गई है। क्योंकि इस मामले में शुक्रवार को महापौर ने मुख्यमंत्री मनोहर लाल, स्थानीय निकाय मंत्री कमल गुप्ता, सांसद संजय भाटिया, मुख्य सचिव हरियाणा सरकार, प्रधान सचिव स्थानीय निकाय को पत्र लिखकर निगमायुक्त पर मनमानी करते हुए करोड़ों की जमीन को वन विभाग को सौंपने की तैयारी करने का आरोप लगाया है। इसमें निगमायुक्त का जमीन देने का आदेश निरस्त कराने की मांग की गई है।
‘समूचा निर्वाचित सदन इसके खिलाफ’
मुख्यमंत्री और स्थानीय निकाय मंत्री को भेजे पत्र में महापौर रेनू बाला गुप्ता ने निगमायुक्त नरेश नरवाल पर निर्वाचित सदन को पूर्णत: दरकिनार करने का आरोप लगाते हुए कहा कि उन्होंने असंवैधानिक आदेश पारित किया है। यह जमीन राष्ट्रीय राजमार्ग पर वार्ड-एक व 20 के गांव उंचाना-उचानी में स्थित है, जो करीब 50 एकड़ कृषि योग्य भूमि है। निगमायुक्त के आदेश के तहत इसे वन विभाग को सौंपा जाना प्रस्तावित है। यह प्रशासनिक आदेश निगम की महापौर, वरिष्ठ उप महापौर, उप महापौर और सभी पार्षदों को विश्वास में लिए बगैर निजी विवेक से जारी किया है। निगम का समूचा निर्वाचित सदन इसके खिलाफ है। बैठक में एक स्वर से आपत्ति दर्ज करा चुका है। सदन की मांग है कि इस आदेश को तत्काल प्रभाव से निरस्त किया जाए। भूमि हस्तांतरित करने की पूरी कार्यवाही को भी स्थगित किया जाए, क्योंकि वन विभाग की ओर से भी कभी भी इस भूमि के लिए कोई विधिवत आवेदन नहीं किया गया है।
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‘वन विभाग से सिर्फ मांगा है सुझाव’
दूसरी ओर निगमायुक्त नरेश नरवाल ने बृहस्पतिवार को ही प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा था कि इस भूमि को निगम की आय बढ़ाने के लिए वन विभाग को देने पर विचार किया जा रहा है। अभी भूमि वन विभाग को नहीं दी गई है, बल्कि वन विभाग से सुझाव मांगा गया है कि इस खाली भूमि पर ऐसा क्या किया जाए, जिससे निगम की आय में वृद्धि हो सके। फिलहाल निगमायुक्त और महापौर एवं पार्षद अपनी-अपनी जिद पर अड़े हैं। मामला अब मुख्यमंत्री मनोहर लाल के संज्ञान में पहुंच गया है। महापौर और पार्षदों को अब मुख्यमंत्री के स्तर से ही इसमें अंतिम निर्णय लिए जाने की उम्मीद है।
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