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मक्का की खेती जलवायु के अनुकूल : डॉ. हरमिंदर
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माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। भारतीय मक्का अनुसंधान संस्थान (आईआईएमआर) लुधियाना और चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र करनाल के वैज्ञानिकों ने कुंजपुरा में शिविर लगाकर किसानों को मक्का की टिकाऊ खेती के लिए प्रशिक्षण दिया। वैज्ञानिकों ने किसानों को धान की जगह मक्का की खेती करने के लिए प्रेरित किया, ताकि उन्हें अधिक मुनाफा मिल सके।
वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं परियोजना प्रमुख डॉ. एसएल जाट ने मक्का की वैश्विक उपयोगिता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि विश्व स्तर पर मक्का खाद्यान्न फसलों में शीर्ष स्थान पर है। अमेरिका, चीन और ब्राज़ील जैसे देशों में इसका अत्यधिक उत्पादन होता है। अकेले अमेरिका का मक्का उत्पादन 3900 लाख टन से अधिक है, जो भारत के कुल खाद्यान्न उत्पादन से भी ज्यादा है। उन्होंने मक्का की उत्पादकता बढ़ाने के लिए समय पर खरपतवार नियंत्रण और पोषक तत्व प्रबंधन की आवश्यकता पर जोर दिया। ग्रो इंडिगो के प्रतिनिधि नवीन कुमार ने बताया कि मक्का की खेती जलवायु के अनुकूल है, और खेतों में कार्बन प्रबंधन के लिए भी उपयोगी है।
पैथोलॉजिस्ट डॉ. हरमिंदर सिंह ने कहा कि हरियाणा जैसे राज्यों में मक्का की खेती जलवायु परिवर्तन की चुनौती से निपटने का बेहतर विकल्प है। रिसर्च एसोसिएट डॉ. मनीष ककरालिया ने मक्का को जल संरक्षण और पर्यावरण की दृष्टि से लाभकारी बताया। ग्रो इंडिगो के प्रतिनिधि नवीन कुमार ने बताया कि मक्का की खेती जलवायु के अनुकूल है, और खेतों में कार्बन प्रबंधन के लिए भी उपयोगी है।
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करनाल। भारतीय मक्का अनुसंधान संस्थान (आईआईएमआर) लुधियाना और चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र करनाल के वैज्ञानिकों ने कुंजपुरा में शिविर लगाकर किसानों को मक्का की टिकाऊ खेती के लिए प्रशिक्षण दिया। वैज्ञानिकों ने किसानों को धान की जगह मक्का की खेती करने के लिए प्रेरित किया, ताकि उन्हें अधिक मुनाफा मिल सके।
वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं परियोजना प्रमुख डॉ. एसएल जाट ने मक्का की वैश्विक उपयोगिता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि विश्व स्तर पर मक्का खाद्यान्न फसलों में शीर्ष स्थान पर है। अमेरिका, चीन और ब्राज़ील जैसे देशों में इसका अत्यधिक उत्पादन होता है। अकेले अमेरिका का मक्का उत्पादन 3900 लाख टन से अधिक है, जो भारत के कुल खाद्यान्न उत्पादन से भी ज्यादा है। उन्होंने मक्का की उत्पादकता बढ़ाने के लिए समय पर खरपतवार नियंत्रण और पोषक तत्व प्रबंधन की आवश्यकता पर जोर दिया। ग्रो इंडिगो के प्रतिनिधि नवीन कुमार ने बताया कि मक्का की खेती जलवायु के अनुकूल है, और खेतों में कार्बन प्रबंधन के लिए भी उपयोगी है।
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पैथोलॉजिस्ट डॉ. हरमिंदर सिंह ने कहा कि हरियाणा जैसे राज्यों में मक्का की खेती जलवायु परिवर्तन की चुनौती से निपटने का बेहतर विकल्प है। रिसर्च एसोसिएट डॉ. मनीष ककरालिया ने मक्का को जल संरक्षण और पर्यावरण की दृष्टि से लाभकारी बताया। ग्रो इंडिगो के प्रतिनिधि नवीन कुमार ने बताया कि मक्का की खेती जलवायु के अनुकूल है, और खेतों में कार्बन प्रबंधन के लिए भी उपयोगी है।
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