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Karnal News: बाल तस्करी के खिलाफ लोगों को किया जागरूक
Sat, 16 Mar 2024 02:22 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
Updated Sat, 16 Mar 2024 02:22 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। महिला एवं बाल विकास विभाग की जिला कार्यक्रम अधिकारी राजबाला मोर के मार्गदर्शन में बाल संरक्षण कार्यालय करनाल के अधिकारियों ने जागरूकता अभियान चलाया गया। संरक्षण अधिकारी सुमन नैन व पूनम श्योरायण ने बताया कि महिला एवं बाल विकास विभाग के अंतर्गत यह यूनिट 0-18 वर्ष तक के जरूरतमंद व बेसहारा बच्चों के हित तथा सुरक्षा के लिए काम करती है।
बच्चों से आह्वान करते हुए उन्होंने कहा गया कि उनके साथ कोई गलत काम होता है तो चुप न रहकर अपने अधिकारों को जानकारी दे। स्कूलों में बच्चों को दुराचार, अत्याचार व यौन शोषण का शिकार होने तथा बचने के लिए पोक्सो एक्ट 2012 की जानकारी दी गई। और बताया गया कि इस एक्ट का मुख्य उद्देश्य 0-18 वर्ष तक के बच्चों को शारीरिक शोषण व यौन शोषण से बचने और यौन शोषण के खिलाफ सजा दिलवाने के प्रावधान बारे जागरूक किया गया।
ऐसे अपराध करने वालों को उम्र कैद की सजा हो सकती है। बच्चों को उनके अधिकारों के बारे में जानकारी दी गई। बच्चों को जानकारी देते हुए यह भी बताया गया कि बच्चों के साथ यदि किसी भी प्रकार का शोषण किया जा रहा हो तो वह चाइल्ड हेल्पलाइन नं0 1098 , 112 और जिला बाल संरक्षण कार्यालय में संपर्क कर सकते हैं।
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तपन पुनर्वास केंद्र की निदेशक डॉ. सुजाता ने जिला बाल संरक्षण कार्यालय से सुमन नैन व पूनम श्योरायण का धन्यवाद करते हुए कहा कि दिव्यांग बच्चे बाल यौन शोषण घटना से संबंधित कोई भी जानकारी बताने में सक्षम नहीं होते हैं इसलिए माता-पिता एवं शिक्षकों के लिए इस तरह के विषय पर जागरूकता शिविर बहुत लाभकारी होते हैं जो कि बहुत ही संवेदनशील विषय हैं।
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करनाल। महिला एवं बाल विकास विभाग की जिला कार्यक्रम अधिकारी राजबाला मोर के मार्गदर्शन में बाल संरक्षण कार्यालय करनाल के अधिकारियों ने जागरूकता अभियान चलाया गया। संरक्षण अधिकारी सुमन नैन व पूनम श्योरायण ने बताया कि महिला एवं बाल विकास विभाग के अंतर्गत यह यूनिट 0-18 वर्ष तक के जरूरतमंद व बेसहारा बच्चों के हित तथा सुरक्षा के लिए काम करती है।
बच्चों से आह्वान करते हुए उन्होंने कहा गया कि उनके साथ कोई गलत काम होता है तो चुप न रहकर अपने अधिकारों को जानकारी दे। स्कूलों में बच्चों को दुराचार, अत्याचार व यौन शोषण का शिकार होने तथा बचने के लिए पोक्सो एक्ट 2012 की जानकारी दी गई। और बताया गया कि इस एक्ट का मुख्य उद्देश्य 0-18 वर्ष तक के बच्चों को शारीरिक शोषण व यौन शोषण से बचने और यौन शोषण के खिलाफ सजा दिलवाने के प्रावधान बारे जागरूक किया गया।
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ऐसे अपराध करने वालों को उम्र कैद की सजा हो सकती है। बच्चों को उनके अधिकारों के बारे में जानकारी दी गई। बच्चों को जानकारी देते हुए यह भी बताया गया कि बच्चों के साथ यदि किसी भी प्रकार का शोषण किया जा रहा हो तो वह चाइल्ड हेल्पलाइन नं0 1098 , 112 और जिला बाल संरक्षण कार्यालय में संपर्क कर सकते हैं।
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तपन पुनर्वास केंद्र की निदेशक डॉ. सुजाता ने जिला बाल संरक्षण कार्यालय से सुमन नैन व पूनम श्योरायण का धन्यवाद करते हुए कहा कि दिव्यांग बच्चे बाल यौन शोषण घटना से संबंधित कोई भी जानकारी बताने में सक्षम नहीं होते हैं इसलिए माता-पिता एवं शिक्षकों के लिए इस तरह के विषय पर जागरूकता शिविर बहुत लाभकारी होते हैं जो कि बहुत ही संवेदनशील विषय हैं।