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बिना महात्म्य ज्ञान के प्रेम चिरंजीवी नहीं हो सकता
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तरावड़ी। नव वर्ष के पहले दिन शहर के महावीर मंदिर डेरी वाले में श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ सप्ताह का आरंभ हुआ। इससे पहले सुबह मंदिर परिसर से भव्य कलश यात्रा निकाली गई। कथा वाचन के दौरान पंडित नरेंद्र शास्त्री ने कहा कि महात्म्य ज्ञान के बिना प्रेम चिरंजीव नहीं हो सकता, वह अस्थायी हो जाता है।
आचार्य ने विधिविधान पूर्वक पूजन संपन्न कराया। वृंदावन से आए आचार्य पंडित नरेंद्र शास्त्री का व्यास पीठ पर फूल मालाओं व शॉल ओढ़ाकर स्वागत किया गया। पंडित नरेंद्र शास्त्री ने धुंधकारी चरित्र पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इसे आत्मसात कर लेें तो जीवन से सारी उलझनें समाप्त हो जाएगी। द्रोपदी, कुंती महाभागवत नारी हैं। कुंती स्तुति को समझाते हुए परीक्षित जन्म एवं शुकदेव आगमन की कथा सुनाई। अंत में संगीत एवं झांकी ने सबको कृष्ण रंग में सराबोर कर दिया। इसके पश्चात गोकर्ण की कथा सुनाई गई। शास्त्री ने कहा कि भगवान की लीला अपरंपार है। वे अपनी लीलाओं के माध्यम से मनुष्य व देवताओं के धर्मानुसार आचरण करने के लिए प्रेरित करते हैं। श्रीमद्भागवत कथा के महत्व को समझाते हुए कहा कि भागवत कथा में जीवन का सार तत्व मौजूद है, आवश्यकता है निर्मल मन और स्थिर चित्त के साथ कथा श्रवण करने की। भागवत श्रवण से मनुष्य को परमानंद की प्राप्ति होती है। भागवत श्रवण प्रेतयोनि से मुक्ति मिलती है। चित्त की स्थिरता के साथ ही श्रीमद्भागवत कथा सुननी चाहिए। इस अवसर पर बिटटू सरदाना, नंद लाल पाहुजा, गणेश खन्ना सहित बड़ी संख्या में महिलाएं उपस्थित थीं।
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आचार्य ने विधिविधान पूर्वक पूजन संपन्न कराया। वृंदावन से आए आचार्य पंडित नरेंद्र शास्त्री का व्यास पीठ पर फूल मालाओं व शॉल ओढ़ाकर स्वागत किया गया। पंडित नरेंद्र शास्त्री ने धुंधकारी चरित्र पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इसे आत्मसात कर लेें तो जीवन से सारी उलझनें समाप्त हो जाएगी। द्रोपदी, कुंती महाभागवत नारी हैं। कुंती स्तुति को समझाते हुए परीक्षित जन्म एवं शुकदेव आगमन की कथा सुनाई। अंत में संगीत एवं झांकी ने सबको कृष्ण रंग में सराबोर कर दिया। इसके पश्चात गोकर्ण की कथा सुनाई गई। शास्त्री ने कहा कि भगवान की लीला अपरंपार है। वे अपनी लीलाओं के माध्यम से मनुष्य व देवताओं के धर्मानुसार आचरण करने के लिए प्रेरित करते हैं। श्रीमद्भागवत कथा के महत्व को समझाते हुए कहा कि भागवत कथा में जीवन का सार तत्व मौजूद है, आवश्यकता है निर्मल मन और स्थिर चित्त के साथ कथा श्रवण करने की। भागवत श्रवण से मनुष्य को परमानंद की प्राप्ति होती है। भागवत श्रवण प्रेतयोनि से मुक्ति मिलती है। चित्त की स्थिरता के साथ ही श्रीमद्भागवत कथा सुननी चाहिए। इस अवसर पर बिटटू सरदाना, नंद लाल पाहुजा, गणेश खन्ना सहित बड़ी संख्या में महिलाएं उपस्थित थीं।
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