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Karnal News: आजादी के बाद तीसरी बार 64 फीसदी से कम मतदान
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- देश के पहले चुनाव 1951 में सबसे कम 55.09 और 1999 में था 58.16 प्रतिशत, 1977 में सर्वाधिक 76.01 फीसदी रहा
- इस बार 61 पर सिमटा, प्रशासन के जागरूकता कार्यक्रम भी नहीं लाए रंग
गगन तलवार
करनाल। आजादी के बाद से हुए देश के पहले लोकसभा चुनाव से लेकर अब तक ऐसा तीसरा अवसर है, जब मतदान 64 प्रतिशत से कम रहा है। करनाल लोकसभा क्षेत्र में इस बार 61 फीसदी मतदान हुआ। जबकि पिछले चुनाव में भी 68.31 प्रतिशत मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया था।
इस बार प्रशासन के जागरूकता कार्यक्रम भी ज्यादा रंग नहीं लाए। करनाल विधानसभा क्षेत्र में ही सबसे कम महज 57.8 फीसदी मतदान हुआ। आजादी के बाद 1951 में हुए देश के पहले लोकसभा चुनाव में सबसे कम 55.09 फीसदी और 1999 में 58.16 प्रतिशत वोट डले थे। इसके अलावा 2019 तक हर बार के चुनाव में 64 प्रतिशत से अधिक लोगों ने वोट डाले। जबकि अब तक के इतिहास में महज 1977 का ही चुनाव ऐसा रहा है, जिसमें सर्वाधिक 76.01 प्रतिशत मतदान हुआ।
इस बार करीब तीन माह पूर्व प्रशासन की ओर से मताधिकार के प्रति जागरूकता कार्यक्रम शुरू कर दिए गए थे, इसके बावजूद प्रयास रंग नहीं लाए। चुनाव के अंतिम सप्ताह में भाजपा की ओर से केंद्रीय नेतृत्व के भी दौरे कराए गए। वहीं मुख्यमंत्री नायब सैनी, पूर्व सीएम मनोहर लाल और कांग्रेस से पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने भी कई जनसभाओं को संबोधित करके शत प्रतिशत मतदान की अपील की थी। इसके बावजूद 2019 के चुनाव की तुलना में लोग घरों से मतदान केंद्रों तक नहीं वोट डालने नहीं पहुंचे।
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पिछले लोकसभा चुनाव की तुलना में इस बार मतदाताओं के लिए विशेष इंतजाम किए गए थे। सुविधाएं भी अधिक दी गई, इतना सब कुछ होने के बावजूद लोगों ने कम वोट डाले। इसके लिए प्रशासनिक अधिकारी और स्थानीय नागरिक अपने-अपने तर्क दे रहे हैं लेकिन इतना जरूर है कि लोगों का वोट डालने के प्रति सुबह से ही उत्साह कम था। ब्यूरो
-- -- -
इस चुनाव में रहा इतना प्रतिशत मतदान
चुनाव
मतदान प्रतिशत
1951
55.09
1962
68.73
1967
75.51
1971
64.95
1977
76.01
1980
66.88
1984
69.23
1989
64.04
1991
68.11
1996
72.22
1998
70.85
1999
58.16
2004
66.04
2009
66.64
2014
70.87
2019
68.31
2024
61.00
-- -- -- -
कम मतदान के कारण
- प्रशासन की ओर से मतदाताओं के घरों पर पर्चियां नहीं पहुंचीं।
- स्वीप गतिविधियों के तहत शहर में कम हुए जागरूकता कार्यक्रम
- तेज गर्मी के कारण भी लोग घरों से बाहर नहीं निकले।
- मतदाता सूची में खामियों के कारण भी मतदाता वापस लौटे।
- कई जगह ईवीएम में खराबी के कारण काफी देर तक लाइनों में लगकर लौटे।
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- इस बार 61 पर सिमटा, प्रशासन के जागरूकता कार्यक्रम भी नहीं लाए रंग
गगन तलवार
करनाल। आजादी के बाद से हुए देश के पहले लोकसभा चुनाव से लेकर अब तक ऐसा तीसरा अवसर है, जब मतदान 64 प्रतिशत से कम रहा है। करनाल लोकसभा क्षेत्र में इस बार 61 फीसदी मतदान हुआ। जबकि पिछले चुनाव में भी 68.31 प्रतिशत मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया था।
इस बार प्रशासन के जागरूकता कार्यक्रम भी ज्यादा रंग नहीं लाए। करनाल विधानसभा क्षेत्र में ही सबसे कम महज 57.8 फीसदी मतदान हुआ। आजादी के बाद 1951 में हुए देश के पहले लोकसभा चुनाव में सबसे कम 55.09 फीसदी और 1999 में 58.16 प्रतिशत वोट डले थे। इसके अलावा 2019 तक हर बार के चुनाव में 64 प्रतिशत से अधिक लोगों ने वोट डाले। जबकि अब तक के इतिहास में महज 1977 का ही चुनाव ऐसा रहा है, जिसमें सर्वाधिक 76.01 प्रतिशत मतदान हुआ।
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इस बार करीब तीन माह पूर्व प्रशासन की ओर से मताधिकार के प्रति जागरूकता कार्यक्रम शुरू कर दिए गए थे, इसके बावजूद प्रयास रंग नहीं लाए। चुनाव के अंतिम सप्ताह में भाजपा की ओर से केंद्रीय नेतृत्व के भी दौरे कराए गए। वहीं मुख्यमंत्री नायब सैनी, पूर्व सीएम मनोहर लाल और कांग्रेस से पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने भी कई जनसभाओं को संबोधित करके शत प्रतिशत मतदान की अपील की थी। इसके बावजूद 2019 के चुनाव की तुलना में लोग घरों से मतदान केंद्रों तक नहीं वोट डालने नहीं पहुंचे।
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पिछले लोकसभा चुनाव की तुलना में इस बार मतदाताओं के लिए विशेष इंतजाम किए गए थे। सुविधाएं भी अधिक दी गई, इतना सब कुछ होने के बावजूद लोगों ने कम वोट डाले। इसके लिए प्रशासनिक अधिकारी और स्थानीय नागरिक अपने-अपने तर्क दे रहे हैं लेकिन इतना जरूर है कि लोगों का वोट डालने के प्रति सुबह से ही उत्साह कम था। ब्यूरो
इस चुनाव में रहा इतना प्रतिशत मतदान
चुनाव
मतदान प्रतिशत
1951
55.09
1962
68.73
1967
75.51
1971
64.95
1977
76.01
1980
66.88
1984
69.23
1989
64.04
1991
68.11
1996
72.22
1998
70.85
1999
58.16
2004
66.04
2009
66.64
2014
70.87
2019
68.31
2024
61.00
कम मतदान के कारण
- प्रशासन की ओर से मतदाताओं के घरों पर पर्चियां नहीं पहुंचीं।
- स्वीप गतिविधियों के तहत शहर में कम हुए जागरूकता कार्यक्रम
- तेज गर्मी के कारण भी लोग घरों से बाहर नहीं निकले।
- मतदाता सूची में खामियों के कारण भी मतदाता वापस लौटे।
- कई जगह ईवीएम में खराबी के कारण काफी देर तक लाइनों में लगकर लौटे।