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Karnal News: जमीन का नहीं हुआ भुगतान, 10 साल से अटकी न्यायिक आवास परियोजना

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 05 Jul 2025 03:04 AM IST
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Land payment not made, judicial housing project stuck for 10 years
- सेक्टर-32 में 6.8 एकड़ जमीन पर होना है निर्माण, 2016 में देने थे 105 करोड़ रुपये, अब बढ़े रेट
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फोटो समाचार



माई सिटी रिपोर्टर

करनाल। जमीन की राशि का भुगतान न होने के कारण करनाल में न्यायिक ऑफिसर्स आवास परियोजना 10 साल से अटकी है। सरकार की स्वीकृति के बाद भी अधिकारियों की लापरवाही के कारण परियोजना सिरे नहीं चढ़ पाई। अब आर्केटेक्ट की ओर से ड्राइंग तैयार करने के बाद इस परियोजना के सिरे चढ़ने की उम्मीद है। हालांकि भुगतान पर निर्णय बाकी है।

सेक्टर-32 में एचएसवीपी की 6.8 एकड़ जमीन पर यह आवास तैयार किए जाने हैं। 2016 में सरकार की ओर से हरी झंडी दी गई थी। इसके बाद न्यायिक अधिकारियों की ओर से विभाग को इसके लिए निर्धारित करीब 105 करोड़ रुपये की राशि जमा नहीं कराई गई, न ही नक्शा बनाया गया। अब परियोजना को सिरे चढ़ाने के लिए अधिकारियों को जमीन के बढ़े हुए रेट पर भी भुगतान करना पड़ सकता है। हालांकि इस पर अंतिम निर्णय एचएसवीपी मुख्यालय की ओर से लिया जाएगा कि पुराने रेट पर जमीन देनी है या नए दाम लिए जाएंगे।
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परियोजना के अनुसार, जमीन की राशि लेकर एचएसवीपी ज्यूडिशरी को ट्रांसफर करेगा। इसके बाद पीडब्ल्यूडी की ओर से निर्माण कार्य किया जाना है। सेक्टर-32 में बनने वाले जिला नागरिक अस्पताल के साथ लगती जमीन पर ही न्यायिक ऑफिसर्स आवास बनाने के लिए जगह निर्धारित की हुई है। ब्यूरो
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किराये के मकानों में भी रह रहे कुछ जज

शहर में एक जगह न्यायिक आवास होने से सुरक्षा की दृष्टि से भी बेहतर होगा। मौजूदा समय में न्यायिक आवास अलग-अलग जगह स्थित हैं। कुछ जज सरकारी क्वार्टर में रह रहे हैं तो कुछ जजों को क्वार्टर न होने के कारण किराये के भवनों में रह रहे हैं। सेक्टर-32 के न्यायिक आवास में नौ एडीजे सीनियर जज, एक जिला सत्र न्यायाधीश व 32 सिविल जज जूनियर डिविजन के मकान तैयार किए जाएंगे। जहां पूरी एक सोसाइटी की तर्ज पर सुविधाएं दी जाएंगी।



वर्जन

2016 में सेक्टर-32 में न्यायिक आवास तैयार किए जाने थे। जब करीब 105 करोड़ रुपये की राशि जमीन के लिए न्यायिक अधिकारियों की ओर से जमा कराई जानी थी। अभी तक पूरी राशि नहीं आई है। अब मुख्यालय तय करेगा कि पुराने रेट पर ही राशि ली जाएगी या नया रेट लागू होगा। आवास निर्माण के लिए स्वीकृति आ चुकी है।

- देवराज, अधीक्षक, एचएसवीपी


वर्जन

न्यायिक आवास बनाने के लिए आर्केटेक्ट की ओर से नक्शा तैयार किया गया है। इसे स्वीकृति के लिए भेजा गया है। स्वीकृति के बाद बजट मिलते ही निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा।
- अनिल दहिया, एसडीओ, पीडब्ल्यूडी
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