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सड़क हादसों में मौत पर एडीसी अब बंद कमरे में रहे हैं बात
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सड़क पर आपकी सुरक्षा के तमाम इंतजाम को लेकर प्रशासन अब गुपचुप तरीके से काम करेगा। रोड पर जहां खामियां हैं, उन्हें सुधारने के लिए क्या हुआ या होगा? इस पर अब कोई बात नहीं होगी। शुक्रवार को लघु सचिवालय में एडीसी अनीश यादव की अध्यक्षता में हुई रोड सेफ्टी कमेटी की बैठक से तो ऐसा ही लग रहा है। बैठक में जो लोग सड़कों की खामियों पर बोलते थे उन्हें कमेटी से ही बाहर कर दिया गया। वहीं, इन खामियों को उजागर करने वाली मीडिया को भी इस बैठक से इस बार दूर रखा गया, ताकि आपकी सुरक्षा के लिए प्रशासन कितनी चिंता करता है और जिम्मेवारों से जवाब मांगा जाता है या नहीं। इस बारे में आपको कुछ पता न चले। बैठक में कुल 29 एजेंडे शामिल किए गए। अब इनमें से कितनों का समाधान हुआ और किन खामियों को दूर करने का निर्णय लिया गया। इसके बारे में कुछ नहीं कह सकते। यानी रोड पर सुरक्षित चलने के लिए हम आपको अलर्ट कर सकते हैं, लेकिन सड़क की खामियों और खतरों का आपको खुद ही ख्याल रखना होगा।
..ताकि कोई जवाब मांगने वाला न हो
रोड सेफ्टी की कमेटी की बैठक में सड़क सुरक्षा संगठन और एनजीओ से जुड़े सदस्य नेशनल हाईवे और शहर की सड़कों के मुद्दों पर बैठक मेें अधिकारियों से जवाब मांगते थे। साथ ही समाचार पत्र में प्रकाशित खामियों की प्रतियां लेकर भी पहुंचते थे। अधिकारियों को जवाब न देना पड़े, इसलिए एडीसी ने एनजीओ और सड़क सुरक्षा संगठन के एक-एक सदस्य को ही बैठक में आने की अनुमति दी, ताकि अधिकारियों के बीच उनसे कोई जवाब मांगने वाला न हो।
...ताकि अमर उजाला अधिकारियों की नाकामी न उजागर करे
अमर उजाला लगातार सड़कों की खामियों को उजागर कर रहा है। हर माह होने वाली रोड सेफ्टी कमेटी की बैठक में भी अमर उजाला द्वारा उठाये गए मुद्दे भी चर्चा में रहते थे। इस पर अधिकारियों की नाकामी उजागर न हो और प्रशासन जनता की सुरक्षा के लिए क्या योजना बना रहा है। इसके बारे में लोगों को कुछ न पता चले। इसलिए इस बार रोड सेफ्टी कमेटी की बैठक में मीडिया को नहीं आने दिया। अमर उजाला ने 13 दिसंबर के अंक में भी नवंबर माह में हुई बैठक में अधिकारियों ने एडीसी के धुंध के सीजन से पहले रोड मार्किंग के दिए निर्देशों की कितनी पालना की, इसे प्रमुखता से उजागर किया है।
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औपचारिक बनती बैठक का मोटिव ही खत्म हो गया
एडवोकेट राजकुमार कनौजिया, एडवोकेट संदीप राणा और रोड सेफ्टी कमेटी के सदस्य रहे और बैंक के ब्रांच मैनेजर के पद से रिटायर्ड तेजपाल का कहना है कि रोड सेफ्टी कमेटी की औपचारिक बनती बैठक का मोटिव ही खत्म हो गया था। लोग सुरक्षित रहें, नेशनल हाईवे और शहर की सड़कें पूरी तरह से सुरक्षित हों इसलिए हम बैठक में मुद्दा उठाते थे। लेकिन इन पर काम न होना बैठक को औपचारिक बना रहा है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर सड़क सुरक्षा कमेटियां बनी थीं, ताकि सड़कों की दशा सुधरे और हादसों का ग्राफ भी कम हो।
जानिए बैठक की मीडिया से दूरी क्यों बनाई, इस पर उन्होंने क्या तर्क दिया। अमर उजाला के सवालों का जवाब नहीं दे पाए एडीसी
फोटो संख्या - 111
एडीसी से अमर उजाला की सीधी बात
मीडिया के सामने अधिकारियों से जवाब मांगना अच्छा नहीं : एडीसी
एडीसी अनीश यादव का कहना है कि जो गैर कमेटी सदस्य थे, सिर्फ उन्हें ही हमने बैठक में नहीं बुलाया।
सवाल : मीडिया को बैठक में क्यों नहीं आने दिया?
जवाब : मीडिया को बैठक का ब्रीफ चाहिए। वो तो हम बाद में भी दे सकते हैं, लेकिन अधिकारियों को सख्ती से कुछ बातें बोलनी पड़ती हैं या जवाब मांगना होता है। वो मीडिया के सामने अच्छा नहीं रहता।
सवाल : बैठक में कितने एजेंडे पास हुए?
जवाब : इसके बारे में मैं कुछ नहीं बता सकता। आपको मेरे ऑफिस से ये डाटा लेना होगा।
सवाल : अभी तो आपने कहा कि आप बैठक का ब्रीफ किया करेंगे, लेकिन एजेंडे पास होना नहीं बता पाये?
जवाब : हां कुछ पुराने एजेंडों पर चर्चा हुई है। जैसे अधूरे फुट ओवरब्रिज और स्लीप वे। आपकी अगर कोई शिकायत है तो आप हमें ई-मेल करें।
नोट : लेकिन वे ये नहीं बता पाये कि किस स्लीप वे और किस पुराने एजेंडे की वे बात कर रहे हैं।
मैं शुक्रवार को बाहर था। इसलिए बैठक में क्या हुआ, ये मैं नहीं बता सकता। एडीसी से बात कर लो। मीडिया को बैठक से क्यों दूर रखा गया। इसके बारे में एडीसी से मैं बात कर लूंगा। -विनय प्रताप सिंह, डीसी करनाल।
रोड सेफ्टी बैठक सिर्फ औपचारिकता : एनएच के ढहते पुल, अधूरे फुट ओवरब्रिज और खामियों का मुद्दा दो साल से पेंडिंग
शुक्रवार को रोड सेफ्टी कमेटी की बैठक में कुल 29 एजेंडा शामिल किये गए। इनमें नेशनल हाईवे के अधूरे फुटओवरब्रिज, कट, रोड मार्किंग और सड़कों के गड्ढे आदि शामिल रहे। लेकिन बैठक सिर्फ औपचारिक ही बनी हैं, क्योंकि बरसाती सीजन में हाईवे के पुलों का ढहना, ऊंचा समाना स्थित पक्का पुल की कम चौड़ाई, अधूरे फुटओवर ब्रिज और अन्य खामियों का मुद्दा जनवरी 2018 यानी दो साल से पेंडिंग है। अमर उजाला भी इन मुद्दों को लगातार उजागर कर रहा है, जबकि शुक्रवार को हुई बैठक के 29 एजेंडों में 3 मुद्दे 18 अप्रैल 2019, चार एजेंडे 19 जून, दो एजेंडे 7 जुलाई, आठ एजेंडे 26 अगस्त, दो एजेंडे 19 सितंबर और 7 एजेंडे 19 नवंबर की बैठक के पेंडिंग हैं।
अधिकारियों की मिलीभगत है, इसलिए आज तक कुछ नहीं हुआ
रोड सेफ्टी विशेषज्ञ एवं एडवोकेट संदीप राणा का कहना है कि एजेंडों में महीनों मुद्दों का बना रहना स्पष्ट करता है कि अधिकारियों की कार्यप्रणाली कैसी और कितने वे लोगों की सुरक्षा की चिंता करते हैं। उन्होंने कहा कि गुपचुप तरीके से बैठक करना अधिकारियों की मिलीभगत दर्शा रहा है। ऐसा लग रहा है जैसे उन्हें सिर्फ अपनी ही चिंता है। लोग चाहे सड़क पर मर जाऐं।
होना ये चाहिए : बैठक से पहले लगाए खुला दरबार
एडवोकेट राजकुमार कनौजिया का कहना है कि होना तो यह चाहिये कि अधिकारी रोड सेफ्टी की बैठक से पहले खुला दरबार लगाएं, ताकि लोग भी अपनी बात को रख सके। इसके बाद बैठक करके निर्णय लें। लेकिन यहां तो बैठक में गैर सरकारी सदस्यों और मीडिया का आना भी बंद किया जा रहा है। इससे ऐसा लग रहा है कि आपातकाल की स्थिति आ गई हो।
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..ताकि कोई जवाब मांगने वाला न हो
रोड सेफ्टी की कमेटी की बैठक में सड़क सुरक्षा संगठन और एनजीओ से जुड़े सदस्य नेशनल हाईवे और शहर की सड़कों के मुद्दों पर बैठक मेें अधिकारियों से जवाब मांगते थे। साथ ही समाचार पत्र में प्रकाशित खामियों की प्रतियां लेकर भी पहुंचते थे। अधिकारियों को जवाब न देना पड़े, इसलिए एडीसी ने एनजीओ और सड़क सुरक्षा संगठन के एक-एक सदस्य को ही बैठक में आने की अनुमति दी, ताकि अधिकारियों के बीच उनसे कोई जवाब मांगने वाला न हो।
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...ताकि अमर उजाला अधिकारियों की नाकामी न उजागर करे
अमर उजाला लगातार सड़कों की खामियों को उजागर कर रहा है। हर माह होने वाली रोड सेफ्टी कमेटी की बैठक में भी अमर उजाला द्वारा उठाये गए मुद्दे भी चर्चा में रहते थे। इस पर अधिकारियों की नाकामी उजागर न हो और प्रशासन जनता की सुरक्षा के लिए क्या योजना बना रहा है। इसके बारे में लोगों को कुछ न पता चले। इसलिए इस बार रोड सेफ्टी कमेटी की बैठक में मीडिया को नहीं आने दिया। अमर उजाला ने 13 दिसंबर के अंक में भी नवंबर माह में हुई बैठक में अधिकारियों ने एडीसी के धुंध के सीजन से पहले रोड मार्किंग के दिए निर्देशों की कितनी पालना की, इसे प्रमुखता से उजागर किया है।
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औपचारिक बनती बैठक का मोटिव ही खत्म हो गया
एडवोकेट राजकुमार कनौजिया, एडवोकेट संदीप राणा और रोड सेफ्टी कमेटी के सदस्य रहे और बैंक के ब्रांच मैनेजर के पद से रिटायर्ड तेजपाल का कहना है कि रोड सेफ्टी कमेटी की औपचारिक बनती बैठक का मोटिव ही खत्म हो गया था। लोग सुरक्षित रहें, नेशनल हाईवे और शहर की सड़कें पूरी तरह से सुरक्षित हों इसलिए हम बैठक में मुद्दा उठाते थे। लेकिन इन पर काम न होना बैठक को औपचारिक बना रहा है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर सड़क सुरक्षा कमेटियां बनी थीं, ताकि सड़कों की दशा सुधरे और हादसों का ग्राफ भी कम हो।
जानिए बैठक की मीडिया से दूरी क्यों बनाई, इस पर उन्होंने क्या तर्क दिया। अमर उजाला के सवालों का जवाब नहीं दे पाए एडीसी
फोटो संख्या - 111
एडीसी से अमर उजाला की सीधी बात
मीडिया के सामने अधिकारियों से जवाब मांगना अच्छा नहीं : एडीसी
एडीसी अनीश यादव का कहना है कि जो गैर कमेटी सदस्य थे, सिर्फ उन्हें ही हमने बैठक में नहीं बुलाया।
सवाल : मीडिया को बैठक में क्यों नहीं आने दिया?
जवाब : मीडिया को बैठक का ब्रीफ चाहिए। वो तो हम बाद में भी दे सकते हैं, लेकिन अधिकारियों को सख्ती से कुछ बातें बोलनी पड़ती हैं या जवाब मांगना होता है। वो मीडिया के सामने अच्छा नहीं रहता।
सवाल : बैठक में कितने एजेंडे पास हुए?
जवाब : इसके बारे में मैं कुछ नहीं बता सकता। आपको मेरे ऑफिस से ये डाटा लेना होगा।
सवाल : अभी तो आपने कहा कि आप बैठक का ब्रीफ किया करेंगे, लेकिन एजेंडे पास होना नहीं बता पाये?
जवाब : हां कुछ पुराने एजेंडों पर चर्चा हुई है। जैसे अधूरे फुट ओवरब्रिज और स्लीप वे। आपकी अगर कोई शिकायत है तो आप हमें ई-मेल करें।
नोट : लेकिन वे ये नहीं बता पाये कि किस स्लीप वे और किस पुराने एजेंडे की वे बात कर रहे हैं।
मैं शुक्रवार को बाहर था। इसलिए बैठक में क्या हुआ, ये मैं नहीं बता सकता। एडीसी से बात कर लो। मीडिया को बैठक से क्यों दूर रखा गया। इसके बारे में एडीसी से मैं बात कर लूंगा। -विनय प्रताप सिंह, डीसी करनाल।
रोड सेफ्टी बैठक सिर्फ औपचारिकता : एनएच के ढहते पुल, अधूरे फुट ओवरब्रिज और खामियों का मुद्दा दो साल से पेंडिंग
शुक्रवार को रोड सेफ्टी कमेटी की बैठक में कुल 29 एजेंडा शामिल किये गए। इनमें नेशनल हाईवे के अधूरे फुटओवरब्रिज, कट, रोड मार्किंग और सड़कों के गड्ढे आदि शामिल रहे। लेकिन बैठक सिर्फ औपचारिक ही बनी हैं, क्योंकि बरसाती सीजन में हाईवे के पुलों का ढहना, ऊंचा समाना स्थित पक्का पुल की कम चौड़ाई, अधूरे फुटओवर ब्रिज और अन्य खामियों का मुद्दा जनवरी 2018 यानी दो साल से पेंडिंग है। अमर उजाला भी इन मुद्दों को लगातार उजागर कर रहा है, जबकि शुक्रवार को हुई बैठक के 29 एजेंडों में 3 मुद्दे 18 अप्रैल 2019, चार एजेंडे 19 जून, दो एजेंडे 7 जुलाई, आठ एजेंडे 26 अगस्त, दो एजेंडे 19 सितंबर और 7 एजेंडे 19 नवंबर की बैठक के पेंडिंग हैं।
अधिकारियों की मिलीभगत है, इसलिए आज तक कुछ नहीं हुआ
रोड सेफ्टी विशेषज्ञ एवं एडवोकेट संदीप राणा का कहना है कि एजेंडों में महीनों मुद्दों का बना रहना स्पष्ट करता है कि अधिकारियों की कार्यप्रणाली कैसी और कितने वे लोगों की सुरक्षा की चिंता करते हैं। उन्होंने कहा कि गुपचुप तरीके से बैठक करना अधिकारियों की मिलीभगत दर्शा रहा है। ऐसा लग रहा है जैसे उन्हें सिर्फ अपनी ही चिंता है। लोग चाहे सड़क पर मर जाऐं।
होना ये चाहिए : बैठक से पहले लगाए खुला दरबार
एडवोकेट राजकुमार कनौजिया का कहना है कि होना तो यह चाहिये कि अधिकारी रोड सेफ्टी की बैठक से पहले खुला दरबार लगाएं, ताकि लोग भी अपनी बात को रख सके। इसके बाद बैठक करके निर्णय लें। लेकिन यहां तो बैठक में गैर सरकारी सदस्यों और मीडिया का आना भी बंद किया जा रहा है। इससे ऐसा लग रहा है कि आपातकाल की स्थिति आ गई हो।