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फिर से पीवी पर बिफरे मिलर्स, कस्टम मिलिंग कांट्रेस्ट आज से खत्म करने की चेतावनी, धान वापस देने को तैयार

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 17 Dec 2019 02:36 AM IST
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karnal rice millers meeting
आगामी 19 दिसंबर से तीसरी बार राइस मिलों में फिजिकल वेरिफिकेशन को लेकर प्रदेशभर के राइस मिलर्स में जबरदस्त आक्रोश है। सरकार व प्रशासनिक रवैये से गुस्साए प्रदेशभर के मिलर्स ने सरकार को चेताया है कि हालात यही रहे तो वे कस्टम मिलिंग बंद कर देंगे। हरियाणा राइस मिल एसोसिएशन ने सरकार के साथ कस्टम मिलिंग कांट्रेक्ट खत्म करते हुए अपने राइस मिलों को बंद करने का अल्टीमेटम दिया है। साथ ही ये भी कहा कि वे स्टाक किया गया धान वापस लौटाने को तैयार हैं। घरौंडा में हुई प्रदेशभर के राइस मिलर्स की बैठक में फैसला लिया गया कि सरकार से मिलिंग का कांट्रेक्ट खत्म करने के संबंध में 17 दिसंबर को डीसी को प्रदेश के हर जिले में ज्ञापन सौंपा जाएगा। इसके बाद 18 दिसंबर को एफसीआई को चावल की डिलीवरी बंद की जाएगी। इसके बाद भी अगर 19 दिसंबर को मिलों की फिजिकल वेरिफिकेशन कराई गई तो वे चेकिंग कमेटियों का खुलकर विरोध करेंगे। बता दें कि प्रदेश सरकार ने 19 से फिर से मिलों में पीवी के आदेश दिए हैं, जबकि इससे पहले सभी मिलों की फिजिकल वेरिफिकेशन कराई जा चुकी है।
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घरौंडा की नई अनाज मंडी स्थित कम्यूनिटी हाल में आयोजित प्रदेश स्तरीय बैठक में व्यापारियों ने सरकार के प्रति अपना रोष जाहिर किया। एसोसिएशन के प्रदेशाध्यक्ष हंसराज सिंगला ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि फिजिकल वेरिफिकेशन (पीवी) के नाम पर सरकार प्रदेश के व्यापारियों को प्रताड़ित ही नहीं, बल्कि अपमानित भी कर रही है, जिसे एसोसिएशन सहन नहीं करेगी। एसोसिएशन 19 दिसंबर को राइस मिलर्स पर होने वाली छापेमारी का पुरजोर विरोध करेगी। सरकार द्वारा कभी मिल के बाहर पुलिस तैनात की जाती है तो कभी दोबारा से पीवी के आदेश दिए जाते हैं। ऐसे फैसलों से न केवल मिलर्स का अपमान हुआ है, बल्कि इस उद्योग पर भारी असर पड़ा है। एसोसिएशन की बैठक में प्रदेशभर के सभी जिलों से मिलर्स ने हिस्सा लिया।
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पीवी के नाम पर किया जा रहा ब्लैकमेल
प्रदेशाध्यक्ष हंसराज सिंगला ने कहा कि सरकार अब तक दो बार पीवी कर चुकी है, जिसमें कोई भी अनियमिता नहीं मिली है। बावजूद इसके प्रदेश सरकार डंडे के दम पर 19 दिसंबर को एक बार फिर राइस मिलों में छापेमारी करना चाहती है, जिसे एसोसिएशन बर्दाश्त नहीं करेगी। उन्होंने आरोप लगाया कि पीवी के नाम पर व्यापारी को ब्लैकमेल किया जा रहा है। हरियाणा के सभी राइस मिलर्स 18 दिसंबर को सरकारी चावल की डिलीवरी बंद कर देंगे। सरकार कस्टम मिलिंग का कांट्रेक्ट रद्द समझे। मिलर्स सरकार की धान लौटाने को तैयार हैं। प्रदेशाध्यक्ष का कहना है कि सरकार के पास चावल लगाने की भी जगह नहीं है। सरकार चावल के लिए जगह तैयार ना करके व्यापारियों को पीवी के नाम पर परेशान करने का काम कर रही है, ताकि मिलर्स अपने आप दौड़ जाएं, लेकिन दौड़ सरकार रही है।
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मिलर्स की नीयत साफ, अधिकारी स्वार्थी
प्रदेशाध्यक्ष का कहना है कि पिछले वर्ष राइस मिलर्स ने सरकार का 99.9 प्रतिशत चावल सरकार को दिया था। हरियाणा के राइस मिलर्स की नीयत साफ है, लेकिन सरकार में बैठे कुछ अधिकारी अपने निजी स्वार्थ की पूर्ति के लिए व्यापारी वर्ग को जान बूझकर अपमानित कर रहे हैं। राइस मिलर्स अपना अपमान कतई सहन नहीं करेंगे। बार बार छापेमारी से पूरी ट्रेड पर असर पड़ रहा है और मिलर्स खुद को अपमानित समझ रहे हैं।
व्यापारियों में भय का माहौल, लगातार चेकिंग से नहीं हो रही मिलिंग
एसोसिएशन के चेयरमैन ज्वैल सिंगला का कहना है कि हरियाणा में लगभग 1300 राइस मिलर्स कस्टम मिलिंग का कार्य करते हैं। सरकार द्वारा पीवी और छापेमारी के नाम पर तंग किया जा रहा है। इन छापेमारी के कारण राइस मिलर्स सही तरीके से काम नहीं कर पा रहे हैं। इस कारण राइस मिलर्स मात्र 15 प्रतिशत चावल ही सरकार को दे पाए हैं, जबकि मिलर्स को 31 दिसंबर तक 30 प्रतिशत चावल सरकार को देना था। यदि व्यापारी समय पर चावल सरकार को नहीं देते हैं तो सरकार व्यापारियों पर ना सिर्फ जुर्माना लगाएगी, बल्कि व्यापारियों को डिफॉल्टर भी घोषित कर सकती है। इससे व्यापारियों में भय का माहौल है।

अगले साल भी नहीं करेगा कोई मिल सरकारी धान की मिलिंग
एसोसिएशन के सीनियर वाइस प्रेजीडेंट विनोद गोयल ने कहा कि अब कोई भी व्यापारी सरकारी काम नहीं करेगा। एसोसिएशन ने फैसला लिया है कि 17 दिसंबर को 12 बजे पूरे हरियाणा में जिला मुख्यालयों पर जिला प्रधान के नेतृत्व में कांट्रेक्ट रद्द करने के लिए डीसी को ज्ञापन सौंपे जाएंगे। इसके साथ ही उसमें ये भी लिखा जाएगा कि अगले साल भी कोई मिलर्स सरकारी धान की मिलिंग नहीं करेगा।
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