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करनाल में दाल जमाखोरी का भंडाफोड़
ब्यूरो/अमर उजाला,करनाल
Updated Thu, 22 Oct 2015 12:35 AM IST
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खाद्य एवं पूर्ति विभाग की टीम ने बुधवार को करनाल में दाल जमाखोरी का भंडाफोड़ किया। शहर के आठ होल शैलरों पर छापा मारा गया। इनमें एक होल शैलर पर 100 से 150 क्विंटल की लिमिट से अधिक जमाखोरी मिली। वहीं टीम ने रिकॉर्ड जब्त कर लिया है और जांच शुरू कर दी है। सूत्रों का कहना है कि जिलेभर में काफी संख्या में ऐसे दाल व्यापारी हैं, जिनके स्टॉक में भारी मात्रा में दाल की जमाखोरी की हुई है। एक तरफ आम आदमी की पहुंच से दाल दूर हो रही है, वहीं व्यापारियों के गोदाम अटे पड़े हैं।
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बुधवार को डीएफएससी निशांत राठी के नेतृत्व में छापामार कार्रवाई की गई और कहा कि जिलेभर में छापामारी जारी रहेगी। अभी तक 23 दाल व्यापारियों का स्टॉक किया जा चुका है और एक व्यापारी के स्टॉक में भारी मात्रा में दाल मिली है। शहर में दाल 40 होल शैलर व्यापारी हैं और हजारों की संख्या में दुकानें हैं। दाल की डिमांड बढ़ने के कारण रेट बढ़ गए हैं।
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बढ़ती कीमत को देखकर व्यापारी दाल की जमाखोरी करके मार्केट में और ज्यादा शॉर्टेज दिखा रहे हैं। इससे व्यापारी कम रेट में खरीदी दाल महंगे दाम होने पर स्टॉक से बाहर निकालते हैं। अभी तक टीम 23 दाल शैलरों को चेक कर चुकी है। लोगों का कहना है कि व्यापारियों के गोदामों में भारी मात्रा में जमाखोरी की हुई है। सूत्र बताते हैं कि नियमों के खिलाफ व्यापारियों ने अपने गोदामों और घरों में दाल का स्टाक जमा कर रखा है।
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यहां की छापेमारी
डीएफएससी निशांत राठी ने बताया कि बुधवार को गुड़ मंडी, रामनगर, नेहरू पैलेस, जनता मंडी, प्रेम नगर, हांसी रोड एरिया में छापेमारी की। इसमें जनता मंडी स्थित गोयल दाल मिल में भारी मात्रा में दाल बरामद की है। डीएफएससी का कहना है कि इस गोदाम में 500 क्विंटल दाल मिली है।
250 क्विंटल दाल की क्षमता है। व्यापारी ने इसको अपना मिल बताया है। इसके मुताबिक भी 100 क्विंटल दाल अतिरिक्त है। मामले की जांच की जा रही है। विभाग की टीम की इस कार्रवाई से काफी व्यापारी दाल गोदामों को बंद करके मौके से खिसक गए। ऐसे में जमाखोरों पर नजर रखने की आवश्यकता है। छापेमार टीम में डीएफएससी निशांत राठी, सुपरिटेंडेंट गुरनाम सिंह, सुरेंद्र सैनी, डिंपल, सतीश आदि मौजूद रहे।
38 हजार हेक्टेयर भूमि पर दाल
कृषि विभाग के उपनिदेशक डॉ. प्रदीप मील ने बताया कि जिले में 38 हजार हेक्टेयर भूमि पर दाल लगाई गई है। फरवरी माह में दाल की बिजाई होती है और अगस्त तक दाल की पैदावार ले ली जाती है। जिले में मूंग का एरिया अधिक है। दाल की फसल उठाये कम ही समय हुआ है। ऐसे में शॉर्टेज होना जमाखोरी की तरफ संदेह डाल रही है। उन्होंने किसानों का आह्वान किया कि वे परंपरागत खेती के अलावा दालों की खेती करें।
निर्धारित सीमा से अधिक दालों का स्टॉक रखने वालों पर होगी कार्रवाई
खाद्य एवं पूर्ति मंत्री कर्णदेव कांबोज ने बताया कि अब दाल मीलों की स्टॉक क्षमता नए तरीके से निर्धारित कर दी गई हैं। पहले जो मिलें दो हजार क्विंटल तक स्टॉक कर सकती थी, अब संबंधित मिलों की स्टॉक सीमा वार्षिक पिसाई क्षमता का 1/24 कच्चे माल के लिए तथा 1/48 तैयार वस्तु के लिए कर दी गई है। इसी प्रकार थोक विक्रेता वितरक एजेंट अब 250 क्विंटल तक ही स्टॉक कर सकते हैं।
पहले थोक विक्रेता 500 क्विंटल तक दालों का स्टॉक कर सकते थे, जबकि परचून विक्रेताओं के लिए स्टॉक की सीमा अब 25 क्विंटल तक ही रहेगी। इससे पहले परचून विक्रेता 50 क्विंटल तक दलहन का स्टॉक कर सकते थे। खाद्य एवं पूर्ति विभाग द्वारा जारी आदेशों में कहा गया है कि यह आदेश जमाखोरों पर अंकुश लगाने के लिए जारी किए गए हैं।