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नैनो यूरिया की खपत में करनाल देश में नंबर वन
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देव शर्मा
करनाल। केंद्र सरकार जल्द यूरिया को पूर्णत: भारतीय तकनीक पर आधारित स्वदेशी खाद नैनो यूरिया (तरल) से बदलना चाहती है। उर्वरक क्षेत्र के इस क्रांतिकारी कदम में करनाल जिले के किसानों ने हरियाणा के साथ-साथ देशभर में सर्वाधिक नैनो यूरिया का प्रयोग करने की उपलब्धि हासिल की है।
जिले में नैनो यूरिया की खपत 100350 बोतल के साथ देश में नंबर वन है। दूसरे स्थान पर मध्यप्रदेश का इंदौर जिला है, जिसकी खपत 91388 बोतल हैं, जबकि तीसरे स्थान पर 85584 बोतल बिक्री के साथ महाराष्ट्र का नागपुर है। राज्य की बात की जाए तो हरियाणा में नैनो यूरिया की खपत 10.56 लाख शीशी है, लेकिन उत्तर प्रदेश की कुल खपत करीब 16.50 लाख शीशी है।
यूं तो दुनिया के कई देश तरल खाद बनाने की दिशा में वर्षों से लगे थे लेकिन इफको ने विश्व में पहली बार पूर्णत: भारतीय तकनीक पर आधारित नैनो यूरिया लॉन्च किया। करनाल में खाद की खपत को देखते हुए ही शायद जुलाई महीने में देश में नैनो यूरिया को करनाल इफको सेवा केंद्र के प्रबंधक डॉ. निरंजन सिंह के संयोजन में लॉन्च किया गया। अभी तक तो केंद्र सरकार ने पारंपरिक यूरिया (बैग वाली खाद) को 15 प्रतिशत नैनो यूरिया को रिप्लेस करने का लक्ष्य रखा है। पिछले छह महीने में करनाल इफको सेवा केंद्र ने अहम मुकाम हासिल किया है। इससे केंद्र सरकार को करोड़ों रुपये की बचत होती है, क्योंकि यूरिया का जो बैग किसान को 266.50 रुपये का मिलता है, उस पर केंद्र सरकार को इसी के बराबर की सब्सिडी भी देनी होती है। जबकि नैनो यूरिया की एक 500 मिली की शीशी 240 रुपये की है और केंद्र सरकार को इस पर एक रुपये की भी सब्सिडी नहीं देनी होती है। एक शीशी तरल खाद एक बैग परंपरागत खाद के बराबर काम करती है। इसमें किसी तरह का प्रदूषण भी नहीं होता है, लाना ले जाना भी बेहद आसान होता है।
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हरियाणा में नैनो यूरिया (तरल) की खपत
जिला खपत (प्रति 500 मिली बोतल)
करनाल 100350
जींद 76282
रेवाड़ी 71552
हिसार 63576
भिवानी 60196
डबवाली 56656
सिरसा 48516
कैथल 44328
अंबाला 36864
नैनो यूरिया पूर्णत: स्वदेशी तरल खाद है, जो विश्व में सबसे पहले इफको ने ही अपनी खुद की तकनीक के आधार पर करनाल से देशभर में लॉन्च किया था। अब करनाल के किसानों ने देश में सर्वाधिक नैनो यूरिया का प्रयोग करके इफको सेवा केंद्र करनाल को नंबर वन बनाया है। भविष्य में हरियाणा के सभी जिलों में अधिकाधिक नैनो यूरिया के प्रयोग का प्रयास किया जाएगा। अब किसान ड्रोन से फसलों पर नैनो यूरिया के छिड़काव में भी रुचि ले रहे हैं।
- डॉ. पुष्पेंद्र वर्मा, हरियाणा राज्य विपणन प्रबंधक इफको
- इस बात की बेहद खुशी है कि पिछले छह महीने में ही करनाल जिले ने नैनो यूरिया की बिक्री में एक लाख बोतल को पार कर दिया है, अभी तक देश का कोई भी जिला यह आंकड़ा नहीं छू पाया है। पूरे हरियाणा की बिक्री 10.56 लाख शीशी में से करीब 10 प्रतिशत सिर्फ करनाल की है। जिससे यह उम्मीद है कि बड़ी तेजी के साथ किसान नैनो यूरिया को अपनाएंगे।
डा. निरंजन सिंह प्रबंधक करनाल इफको सेवा केंद्र
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करनाल। केंद्र सरकार जल्द यूरिया को पूर्णत: भारतीय तकनीक पर आधारित स्वदेशी खाद नैनो यूरिया (तरल) से बदलना चाहती है। उर्वरक क्षेत्र के इस क्रांतिकारी कदम में करनाल जिले के किसानों ने हरियाणा के साथ-साथ देशभर में सर्वाधिक नैनो यूरिया का प्रयोग करने की उपलब्धि हासिल की है।
जिले में नैनो यूरिया की खपत 100350 बोतल के साथ देश में नंबर वन है। दूसरे स्थान पर मध्यप्रदेश का इंदौर जिला है, जिसकी खपत 91388 बोतल हैं, जबकि तीसरे स्थान पर 85584 बोतल बिक्री के साथ महाराष्ट्र का नागपुर है। राज्य की बात की जाए तो हरियाणा में नैनो यूरिया की खपत 10.56 लाख शीशी है, लेकिन उत्तर प्रदेश की कुल खपत करीब 16.50 लाख शीशी है।
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यूं तो दुनिया के कई देश तरल खाद बनाने की दिशा में वर्षों से लगे थे लेकिन इफको ने विश्व में पहली बार पूर्णत: भारतीय तकनीक पर आधारित नैनो यूरिया लॉन्च किया। करनाल में खाद की खपत को देखते हुए ही शायद जुलाई महीने में देश में नैनो यूरिया को करनाल इफको सेवा केंद्र के प्रबंधक डॉ. निरंजन सिंह के संयोजन में लॉन्च किया गया। अभी तक तो केंद्र सरकार ने पारंपरिक यूरिया (बैग वाली खाद) को 15 प्रतिशत नैनो यूरिया को रिप्लेस करने का लक्ष्य रखा है। पिछले छह महीने में करनाल इफको सेवा केंद्र ने अहम मुकाम हासिल किया है। इससे केंद्र सरकार को करोड़ों रुपये की बचत होती है, क्योंकि यूरिया का जो बैग किसान को 266.50 रुपये का मिलता है, उस पर केंद्र सरकार को इसी के बराबर की सब्सिडी भी देनी होती है। जबकि नैनो यूरिया की एक 500 मिली की शीशी 240 रुपये की है और केंद्र सरकार को इस पर एक रुपये की भी सब्सिडी नहीं देनी होती है। एक शीशी तरल खाद एक बैग परंपरागत खाद के बराबर काम करती है। इसमें किसी तरह का प्रदूषण भी नहीं होता है, लाना ले जाना भी बेहद आसान होता है।
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हरियाणा में नैनो यूरिया (तरल) की खपत
जिला खपत (प्रति 500 मिली बोतल)
करनाल 100350
जींद 76282
रेवाड़ी 71552
हिसार 63576
भिवानी 60196
डबवाली 56656
सिरसा 48516
कैथल 44328
अंबाला 36864
नैनो यूरिया पूर्णत: स्वदेशी तरल खाद है, जो विश्व में सबसे पहले इफको ने ही अपनी खुद की तकनीक के आधार पर करनाल से देशभर में लॉन्च किया था। अब करनाल के किसानों ने देश में सर्वाधिक नैनो यूरिया का प्रयोग करके इफको सेवा केंद्र करनाल को नंबर वन बनाया है। भविष्य में हरियाणा के सभी जिलों में अधिकाधिक नैनो यूरिया के प्रयोग का प्रयास किया जाएगा। अब किसान ड्रोन से फसलों पर नैनो यूरिया के छिड़काव में भी रुचि ले रहे हैं।
- डॉ. पुष्पेंद्र वर्मा, हरियाणा राज्य विपणन प्रबंधक इफको
- इस बात की बेहद खुशी है कि पिछले छह महीने में ही करनाल जिले ने नैनो यूरिया की बिक्री में एक लाख बोतल को पार कर दिया है, अभी तक देश का कोई भी जिला यह आंकड़ा नहीं छू पाया है। पूरे हरियाणा की बिक्री 10.56 लाख शीशी में से करीब 10 प्रतिशत सिर्फ करनाल की है। जिससे यह उम्मीद है कि बड़ी तेजी के साथ किसान नैनो यूरिया को अपनाएंगे।
डा. निरंजन सिंह प्रबंधक करनाल इफको सेवा केंद्र