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स्कूलों में बच्चे कितने सुरक्षित और स्कूलों में क्या हैं इंतजाम, औचक निरीक्षण कर कमेटी करे जांच
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स्कूलों में बच्चे कितने सुरक्षित हैं और स्कूल प्रबंधन की ओर से क्या इंतजाम किये गये हैं। अब इसकी रेगुलर जांच होगी। डीसी ने इसके लिये जिला और खंड स्तर पर कमेटी का गठन किया है। जो हर माह स्कूलों में जांच करने के बाद अपनी रिपोर्ट उन्हें देगी। बेहतर कार्य करने वाले स्कूलों को सम्मानित किया जाएगा। वहीं, जिन स्कूलों में लापरवाही पाई जाएगी, उनके खिलाफ कार्रवाई होगी। स्कूल में बच्चे सुरक्षित रहें और शिक्षा का स्तर और बेहतर हो, इसको लेकर जिला प्रशासन की ओर से यह पहल की गई है। स्कूल सुरक्षा पॉलिसी 2017 के तहत शुक्रवार को लघु सचिवालय में हुई बैठक में यह निर्णय लिया गया। जिले के छह खंडों में 777 सरकारी, 250 एचबीएसई प्राइवेट और 119 सीबीएसई स्कूल हैं। जहां तीन लाख से ज्यादा विद्यार्थी शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं।
हर माह होगी अचानक स्कूलों की जांच
बैठक की अध्यक्षता डीसी विनय प्रताप सिंह ने की। वहीं, जिला शिक्षा अधिकारी रविंद्र चौधरी, मौलिक शिक्षा अधिकारी राजपाल, सीबीएसई स्कूलों के जिला प्रधान राजन लांबा के अतिरिक्त डिप्टी सीएमओ राजेश गोरिया, डीटीपी कार्यालय के प्रतिनिधि, जिला अग्निशमन अधिकारी राम पाल और कई निजी स्कूलों के प्रिंसिपल और प्रतिनिधि मौजूद रहे। डीसी ने बताया कि चेकिंग के बाद जो स्कूल पॉलिसी गाइडलाइन को सही-सही रूप में पालन करेंगे, उन्हें एक सर्टिफिकेट दिया जाएगा और स्कूल का नाम जिला वेबसाइट पर भी डाला जाएगा।
माह में एक बार स्कूल की कमेटी बैठक कर करे चर्चा
डीसी ने वर्ष 2017 में बनी स्कूल सुरक्षा पॉलिसी में दिए निर्देशों का हवाला देते हुए कहा कि सभी सरकारी और निजी स्कूलों में परिसर, गलियारा, सीढ़ियां, लाईब्रेरी, कंप्यूटर लैब, प्रवेश और निकास द्वार पर सीसीटीवी कैमरे जरूर होने चाहिये। छात्रों के लिये सुरक्षित परिवहन सुविधा और अच्छे और बुरे के प्रति जागरूकता पैदा की जाये। उन्होंने कहा कि कई स्कूलों में सुरक्षा को लेकर समितियां गठित है, लेकिन ऐसी समितियां सभी स्कूलों में होनी चाहिये। जो महीने में कम से कम एक बार इन बिंदुओं की सुरक्षा को लेकर बैठक करें।
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अभिभावकों से अपील, बच्चों को दें अच्छा माहौल
डीसी ने कहा कि स्कूल स्टाफ और अभिभावक की काउंसलिंग भी होनी चाहिये, जिसमें उनके सुझाव भी लिये जाये, क्योंकि बच्चों की जिम्मेदारी स्कूल के साथ-साथ अभिभावकों की भी है। घर पर बच्चेे को एक अच्छा माहौल अभिभावक ही प्रदान कर सकते हैं, अच्छा होगा यदि प्रतिदिन बच्चों के बैग भी चेक कर लिये जाएं।
जांच कमेटी में ये होंगे शामिल
स्कूलों की जांच के लिये डीसी की ओर से गठित की गई कमेटी में जिला शिक्षा अधिकारी, ब्लॉक स्तर पर खंड शिक्षा अधिकारी, आरटीए कार्यालय का प्रतिनिधि व फायर सेफ्टी ऑफिसर को शामिल किया गया है। गठित कमेटी हर महीने न केवल स्कूलों का औचक निरीक्षण करेगी। बल्कि वहां लगे अग्निशमन यंत्रों को चेक करने के साथ, इसके इस्तेमाल की भी जानकारी देगी।
ऑडिट में कमेटी इन बिंदुओं पर करेगी जांच
डीसी की ओर से जांच के लिये कमेटी को एक परफोर्मा भी जारी किया गया है, जिसमें फायर सेफ्टी यंत्रों के इस्तेमाल की जानकारी देने के अलावा स्कूल वाहन में भी फायर एस्टिंगविशर ठीक से हैं या नहीं, उन्हें भी चेक किया जाए। स्कूल का भवन, निर्माण की दृष्टि से सुरक्षित हो, उसके ऊपर बिजली की तार न हों, बच्चों के शौचालय इत्यादि सुरक्षित बने हों। फर्स्ट एड के लिये जरूरी चीजें भी होनी चाहिए। किसी भी दुर्घटना से बचाव की सूचना के लिये एंबुलेंस, महिला सुरक्षा व पुलिस के हेल्पलाइन नंबर भी लिखे होने चाहिये।
अलग-अलग समय में हुई घटनाओं को किया स्टडी : डीईओ
डीईओ आरके चौधरी ने बताया कि बच्चों की सुरक्षा और शिक्षा के स्तर में और सुधार आये, इस दिशा में ही यह प्रयास किया जा रहा है। बैठक में अलग-अलग समय में हुई स्कूलों की घटनाओं को ध्यान में रखते हुए जांच के बिंदुओं और कमेटी के सदस्यों को शामिल किया गया है, ताकि समय रहते निदान हो सके।
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हर माह होगी अचानक स्कूलों की जांच
बैठक की अध्यक्षता डीसी विनय प्रताप सिंह ने की। वहीं, जिला शिक्षा अधिकारी रविंद्र चौधरी, मौलिक शिक्षा अधिकारी राजपाल, सीबीएसई स्कूलों के जिला प्रधान राजन लांबा के अतिरिक्त डिप्टी सीएमओ राजेश गोरिया, डीटीपी कार्यालय के प्रतिनिधि, जिला अग्निशमन अधिकारी राम पाल और कई निजी स्कूलों के प्रिंसिपल और प्रतिनिधि मौजूद रहे। डीसी ने बताया कि चेकिंग के बाद जो स्कूल पॉलिसी गाइडलाइन को सही-सही रूप में पालन करेंगे, उन्हें एक सर्टिफिकेट दिया जाएगा और स्कूल का नाम जिला वेबसाइट पर भी डाला जाएगा।
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माह में एक बार स्कूल की कमेटी बैठक कर करे चर्चा
डीसी ने वर्ष 2017 में बनी स्कूल सुरक्षा पॉलिसी में दिए निर्देशों का हवाला देते हुए कहा कि सभी सरकारी और निजी स्कूलों में परिसर, गलियारा, सीढ़ियां, लाईब्रेरी, कंप्यूटर लैब, प्रवेश और निकास द्वार पर सीसीटीवी कैमरे जरूर होने चाहिये। छात्रों के लिये सुरक्षित परिवहन सुविधा और अच्छे और बुरे के प्रति जागरूकता पैदा की जाये। उन्होंने कहा कि कई स्कूलों में सुरक्षा को लेकर समितियां गठित है, लेकिन ऐसी समितियां सभी स्कूलों में होनी चाहिये। जो महीने में कम से कम एक बार इन बिंदुओं की सुरक्षा को लेकर बैठक करें।
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अभिभावकों से अपील, बच्चों को दें अच्छा माहौल
डीसी ने कहा कि स्कूल स्टाफ और अभिभावक की काउंसलिंग भी होनी चाहिये, जिसमें उनके सुझाव भी लिये जाये, क्योंकि बच्चों की जिम्मेदारी स्कूल के साथ-साथ अभिभावकों की भी है। घर पर बच्चेे को एक अच्छा माहौल अभिभावक ही प्रदान कर सकते हैं, अच्छा होगा यदि प्रतिदिन बच्चों के बैग भी चेक कर लिये जाएं।
जांच कमेटी में ये होंगे शामिल
स्कूलों की जांच के लिये डीसी की ओर से गठित की गई कमेटी में जिला शिक्षा अधिकारी, ब्लॉक स्तर पर खंड शिक्षा अधिकारी, आरटीए कार्यालय का प्रतिनिधि व फायर सेफ्टी ऑफिसर को शामिल किया गया है। गठित कमेटी हर महीने न केवल स्कूलों का औचक निरीक्षण करेगी। बल्कि वहां लगे अग्निशमन यंत्रों को चेक करने के साथ, इसके इस्तेमाल की भी जानकारी देगी।
ऑडिट में कमेटी इन बिंदुओं पर करेगी जांच
डीसी की ओर से जांच के लिये कमेटी को एक परफोर्मा भी जारी किया गया है, जिसमें फायर सेफ्टी यंत्रों के इस्तेमाल की जानकारी देने के अलावा स्कूल वाहन में भी फायर एस्टिंगविशर ठीक से हैं या नहीं, उन्हें भी चेक किया जाए। स्कूल का भवन, निर्माण की दृष्टि से सुरक्षित हो, उसके ऊपर बिजली की तार न हों, बच्चों के शौचालय इत्यादि सुरक्षित बने हों। फर्स्ट एड के लिये जरूरी चीजें भी होनी चाहिए। किसी भी दुर्घटना से बचाव की सूचना के लिये एंबुलेंस, महिला सुरक्षा व पुलिस के हेल्पलाइन नंबर भी लिखे होने चाहिये।
अलग-अलग समय में हुई घटनाओं को किया स्टडी : डीईओ
डीईओ आरके चौधरी ने बताया कि बच्चों की सुरक्षा और शिक्षा के स्तर में और सुधार आये, इस दिशा में ही यह प्रयास किया जा रहा है। बैठक में अलग-अलग समय में हुई स्कूलों की घटनाओं को ध्यान में रखते हुए जांच के बिंदुओं और कमेटी के सदस्यों को शामिल किया गया है, ताकि समय रहते निदान हो सके।