फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Karnal News ›   Haryana Day Special: Karnal before independence, has done wonders in every field

हरियाणा दिवस विशेष: आजादी से पहले का करनाल, हर क्षेत्र में कर चुका कमाल

Mon, 01 Nov 2021 02:39 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो गगन तलवार, अमर उजाला ब्यूरो, करनाल
गगन तलवार, अमर उजाला ब्यूरो, करनाल Published by: अमर उजाला ब्यूरो Updated Mon, 01 Nov 2021 02:39 AM IST
सार

हरियाणा राज्य का गठन 1 नवंबर 1966 को हुआ लेकिन आजादी से भी सालों पहले करनाल अस्तित्व में आया। करनाल शहर महाभारत के राजा दानवीर कर्ण द्वारा स्थापित किया गया था। 1739 में करनाल प्रमुखता से अस्तित्व में आया, जब नादिर शाह ने करनाल में मोहम्मद शाह को हराया था।

विज्ञापन
Haryana Day Special: Karnal before independence, has done wonders in every field
55 साल का हरियाणा(सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हरियाणा के गठन से ही नहीं बल्कि आजादी से भी सालों पहले करनाल अस्तित्व में आया। इसके बाद से अब तक 282 साल के इतिहास में करनाल ने कई कमाल किए हैं। न केवल कृषि, खेल, अनुसंधान और शिक्षा के क्षेत्र में नाम कमाया है, बल्कि पर्यटन स्थल के रूप में भी पहचान बनाने के लिए कदम बढ़ा रहा है।
विज्ञापन

 

आजादी के बाद भी साथ लगते जिले पानीपत, कैथल और कुरुक्षेत्र भी कर्ण नगरी का ही हिस्सा थे, जिनका आजादी के बाद 1959 तक का संयुक्त रिकॉर्ड भी यहां मौजूद है। कर्ण नगरी कई ऐतिहासिक धरोहर, महाभारत काल, मुगल काल और ब्रिटिश काल की निशानियां भी यहां हैं, जिनके पुराने वजूद को नए रूप में जिंदा करने के लिए भी काम हो रहा है।

विज्ञापन


पुराने शहर की कुछ निशानियों को अब स्मार्ट सिटी के तहत हैरीटेज कॉरीडोर में भी विकसित किया जा रहा है। जिनमें 200 साल पुरानी क्रिश्चियन सिमेटरी, ब्रिटिश काल में बना ओल्ड कचहरी भवन, रिकॉर्ड रूम, कोस मीनार और आजादी से पूर्व का विक्टोरिया मेमोरियल हाल शामिल है। वहीं कर्ण लेक जैसे कई स्थलों को पर्यटन स्थल के रूप में तैयार किया जा रहा है। यहां कई ऐतिहासिक मंदिर और गुरुद्वारे भी हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

 

वर्तमान स्थिति

  •  करनाल का क्षेत्रफल 2520 वर्ग किलोमीटर
  •  जनसंख्या 1505324
  •  साक्षरता दर 74.13 प्रतिशत
  •  खंड- 8, गांव 435, पंचायत 382

सात द्वारों के अंदर था शहर, प्रिंसिपल स्ट्रीट के नाम से जाना जाता था बाजार
पुराना शहर केवल सात द्वारों के अंदर बसा था। शाम छह बजते ही सुरक्षा के लिहाज से इन्हें बंद कर दिया जाता था। इसके बाद पूरी जांच के बाद ही आने और जाने दिया जाता था। 1960 तक कमेटी रात में इन पर दीये जलाती थी। आजादी से पहले जुंडला गेट पर दो चुंगी हुआ करती थी। बासों गेट में बांस की मंडी लगती थी। कर्ण गेट और कलंदरी गेट बाजार का रस्ता था, कलंदरी गेट में ही मीना बाजार भी लगता था। अंग्रेजों के जमाने में वर्तमान के सराफा बाजार की गली को प्रिंसिपल स्ट्रीट के नाम से जाना जाता था।
 

2013 में दोबारा बने द्वार, 2019 में मिले नए नाम
2013 में निगम की हाउस की बैठक में शहर के पुराने शहर के सात द्वारों को बनाने का प्रस्ताव पास हुआ था। वार्ड-10 की पूर्व पार्षद सोनिया पंडित ने बताया कि पहले सात दरवाजे बनाने की योजना थी लेकिन नगर निगम ने नौ द्वार बनाए हैं। 14 जून 2019 को इन पुराने द्वारों को महाभारत के इतिहास से जोड़ते हुए और कर्ण की नगरी होने के कारण नए नाम दिए गए। इनमें कलंदरी गेट को कृष्ण द्वार, कर्ण गेट को कर्ण द्वार, सुभाष गेट को सहदेव द्वार, बांसो गेट को भीम द्वार, दयालपुरा गेट को नकुल द्वार, जुंडला गेट को युद्घिष्ठिर द्वार और अर्जुन गेट को अर्जुन द्वार का नाम दिया गया।

1865 से रखा है चार जिलों का संयुक्त रिकॉर्ड
पुरानी कचहरी स्थल में बना रिकॉर्ड रूम अंग्रेजों के जमाने का है। यहां 1865 से 1964 तक का राजस्व रिकॉर्ड है। 1905 से 31 मार्च 1987 तक का ज्यूडिशियल रिकॉर्ड भी है। आजादी के बाद पानीपत, कुरुक्षेत्र व कैथल जिले भी करनाल के ही भाग थे। 1959 तक का पानीपत, 1956 तक का कुरुक्षेत्र और 1957 तक का कैथल जिले का राजस्व रिकॉर्ड यहां है। रिकॉर्ड रूम का भवन पुराना होने के कारण इसके 50 लाख से ज्यादा पेजों को डिजिटल किया जा रहा है।
 

राजा कर्ण ने किया था स्थापित, 1739 में अस्तित्व में आया करनाल
मान्यता के अनुसार करनाल शहर महाभारत के राजा दानवीर कर्ण द्वारा स्थापित किया गया था। 1739 में करनाल प्रमुखता से अस्तित्व में आया, जब नादिर शाह ने करनाल में मोहम्मद शाह को हराया था। प्रशासन के रिकॉर्ड के अनुसार जींद के राजा गोपाल सिंह ने 1863 में करनाल पर कब्जा कर लिया और 1785 में मराठों ने करनाल में खुद को स्थापित किया था। 1795 में मराठों ने अंत में जींद के राजा भाग सिंह से करनाल शहर को जीत लिया। 1805 में अंग्रेजों ने यहा पर कब्जा किया और मंडल बनाया। करनाल को ब्रिटिश छावनी में तब्दील कर दिया गया।
 

1819 तक विलियम फरैजर थे उपायुक्त
हरियाणा गठन के समय 63वें उपायुक्त कुलवंत सिंह थे, निशांत कुमार यादव 107 वें उपायुक्त हैं।

1974 में कटा था पहला सेक्टर, आज 20 हुई संख्या
हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण 1977 में गठित हुआ था। इससे पहले ही अर्बन अस्टेट के तहत 1974 में सबसे पहले सेक्टर-13 बना था। इससे पहले कॉलोनियों में ही लोग रहते थे। आज एचएसवीपी के कमर्शियल और आवासीय मिलाकर 20 सेक्टर हैं। 2013 में करनाल नगर निगम बना, इससे पहले नगर पालिका थी। कई कॉलोनियां निगम में भी कटी हैं। लाइन पार क्षेत्र को भी पुराने समय से कैंप कहा जाता है।
 

किस साल कौनसा सेक्टर बना

  • सेक्टर-13 1974
  • सेक्टर-13 एक्सटेंशन 1977
  • सेक्टर-14 1980
  • सेक्टर-6 1982
  • सेक्टर-7 1986
  • सेक्टर-8 1987
  • सेक्टर-4 1992
  • महिला कांप्लेक्स 1992
  • सेक्टर-8 पार्ट-2 1994
  • सेक्टर-16 1995
  • सेक्टर-5 2000
  • सेक्टर-12 2000
  • सेक्टर-9 2001
  • पुरानी तहसील 2002
  • सेक्टर-33 2007
  • ट्रांसपोर्ट नगर 2008
  • सेक्टर-32 2012
  • सेक्टर-32 पार्ट-2 2017
  • सेक्टर-33 पार्ट-2 2018

तांगे से हवाई और रैपिड रेल से सफर की तैयारी
पहले करनाल में केवल तांगे पर लोग सफर करते थे। कर्ण ताल पार्क के पास आज भी तांगा स्टैंड की निशानियां हैं। यहीं से लोग दूर-दूर तक सफर करते थे। लेकिन पिछले 55 साल में मोटर कार के बाद अब हवाई अड्डे और रैपिड रेल से सफर की तैयार चल रही है। सरकार ने इन दोनों योजनाओं के लिए घोषणा कर दी है। रैपिड रेल के लिए जमीन का सर्वे हो चुका है और हवाई अड्डे के लिए जमीन अधिग्रहण का कार्य चल रहा है।
 

कर्ण गेट से निकलता था राष्ट्रीय राजमार्ग, अब कई बाईपास
शहर में सभी सड़कें सिंगल रोड ही थीं। दयाल सिंह कॉलेज के पूर्व प्रिंसिपल डॉ. रामजी लाल ने बताया कि राष्ट्रीय राजमार्ग भी नमस्ते चौक से होते हुए कर्ण गेट मार्केट से निकलता था। यहां से बस स्टैंड के रास्ते होते हुए बलड़ी बाईपास पर मिलता था। आज सड़कों का जाल बिछा है। पांच स्टेट हाईवे भी फोर लेन हो चुके हैं। मेरठ रोड पर काम चल रहा है। इसके अलावा रिंग रोड शहर के चारों तरफ से बाईपास निकालने के लिए भी काम शुरू हो चुका है।
 

नवाबों की डिस्पेंसरी में चल रहा कन्या महाविद्यालय, अब 14 कॉलेज हैं

शहर में हरियाणा गठन तक केवल तीन कॉलेज थे। इनमें राजकीय कन्या महाविद्यालय 1897 में बनीं नवाबों की डिस्पेंसरी में चल रहा है। दयाल सिंह कॉलेज 1949 और केवीए डीएवी कॉलेज 1958 से चल रहा है। अब कॉलेजों की संख्या बढ़कर 14 हो गई है। कन्या महाविद्यालय 1991 तक लड़के और लड़कियों दोनों के लिए रहा। पंडित चिरंजीलाल शर्मा कॉलेज 1976, गुरुनानक खालसा कॉलेज 1969 और डीएवी कॉलेज 1973 में बना। इसी तरह राजकीय स्कूलों की संख्या भी कम थी। आज 749 राजकीय स्कूल हैं।
 

शहर को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जा रहा है। स्मार्ट सिटी के तहत शहर का स्वरूप बदलने में 1100 करोड़ रुपये खर्च होंगे। करनाल शहर काफी ऐतिहासिक है। इसकी धरोहरों को भी सहेजने के लिए काम किया जा रहा है। -निशांत कुमार यादव, उपायुक्त

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed