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आठ जिलों के थैलेसीमिया मरीजों को कर्ण नगरी दे रही जीवनदान
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दानवीर राजा कर्ण की नगरी के बाशिंदे रक्तदान कर दूसरों को जीवनदान दे रहे हैं। कोरोना काल में हुई खून की कमी के बाद से आठ जिलों के थैलेसीमिया मरीजों को हर माह रक्त दिया जा रहा है। सामाजिक संस्थाओं के सहयोग से पिछले दो साल में विभिन्न जिलों को 25 हजार यूनिट रक्त दिया जा चुका है।
नागरिक अस्पताल के क्षेत्रीय रक्त संचार अधिकारी डॉ. संजय वर्मा के अनुसार, प्रदेश में थैलेसीमिया के वर्तमान में ढाई हजार मरीज हैं। अब तक सामने आए मामलों में हुई रिसर्च में सामने आया है कि इनमें से ज्यादातर मरीज पाकिस्तान से माइग्रेंट होकर आए परिवारों के हैं। हर साल देश में करीब 10 हजार नए मरीज मिल रहे हैं। सरकार की ओर से इस बीमारी को खत्म करने के लिए विशेष रूप से जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। ताकि शादी से पहले युवाओं की थैलेसीमिया की जांच करके इसके नए पैदा होने वाले मरीजों पर रोक लगाई जा सके। करनाल से कुरुक्षेत्र, सोनीपत, पानीपत, कैथल, यमुनानगर और उत्तर प्रदेश के शामली और सहारनपुर के मरीजों के लिए भी रक्त दिया जाता है। ब्यूरो
माता-पिता से बच्चे भी होते हैं थैलेसीमिक
डॉक्टरों के अनुसार, थैलेसीमिया आनुवांशिक बीमारी है। अगर मां-बाप को माइनर थैलेसीमिया है तो बच्चों को मेजर थैलेसीमिया होने की संभावना ज्यादा है। शुरू में तो बच्चे को महीने में ब्लड चढ़ता है, लेकिन जैसे-जैसे बच्चे की उम्र बढ़ती है उसे दो हफ्ते में ब्लड चढ़ने लगता है। ब्लड बार-बार चढ़ने से शरीर के कई हिस्सों में आयरन जमता है। ऐसा न हो, इसके लिए भी मरीज को दवाई दी जाती है। अस्पताल में गर्भवती का टेस्ट किया जाता है। यदि वह माइनर थैलेसीमिया है तो उसके पति का टेस्ट होता है। यदि वह भी माइनर मिले तो बच्चे की जांच होती है।
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मरीजों की दर में आठ प्रतिशत तक वृद्धि
करनाल जिले में स्वास्थ्य विभाग के पास थैलेसीमिया के 85 मरीज पंजीकृत हैं। जिन्हें हर दो माह में तीन बार रक्त चढ़ता है। इन मरीजों के लिए नागरिक अस्पताल के ब्लड बैंक में करीब 270 यूनिट रक्त उपलब्ध रहता है। वहीं जीटी रोड बेल्ट में पानीपत, कुरुक्षेत्र, यमुनानगर और अंबाला को मिलाकर कुल 350 मरीज हैं। मरीजों की दर पांच से आठ प्रतिशत तक बढ़ रही है।
बीमारी खत्म करने के लिए यह जरूरी
- शादी से पहले युवक-युवती का एचपीएलसी टेस्ट जरूर कराएं। ताकि उनके एचबी की टाइप पता चले। यदि दोनों का थैलेसीमिया माइनर मिले तो शादी न करें।
- शादी हो चुकी है तो गर्भवती महिला की जांच कराएं। यदि बच्चा मेजर थैलेसीमिक मिलता है तो गर्भपात करवा सकते हैं। माइनर थैलेसीमिक मिलना बीमारी नहीं है।
- मरीज की पुष्टि हो चुकी है तो रक्त चढ़वाने के अलावा बोनमैरो ट्रांसप्लांट करके पूरी तरह से ठीक किया जा सकता है। प्रदेश में अब तक 19 मरीज इस पद्धति से ठीक हुए हैं।
फोटो--102 नंबर है।
15 लाख रुपये तक सरकार से मिलती है मदद
बोनमैरो के लिए जीन्स परिवार से मिलता है। 25 प्रतिशत मामलों में जीन्स मैच करता है। बाकी बाहर से जीन्स मैच होने के चांस एक प्रतिशत ही रहते हैं। इस प्रक्रिया में करीब 25 लाख खर्च आता है। 15 लाख रुपये तक सरकार की ओर से भी दिए जाते हैं। जागरूकता के लिए मेडिकल कॉलेज के सभागार में वीरवार को कार्यशाला का आयोजन होगा। जिसमें लोगों को पूरी प्रक्रिया समझाई जाएगी।
- डॉ. संजय वर्मा, क्षेत्रीय रक्त संचार अधिकारी
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नागरिक अस्पताल के क्षेत्रीय रक्त संचार अधिकारी डॉ. संजय वर्मा के अनुसार, प्रदेश में थैलेसीमिया के वर्तमान में ढाई हजार मरीज हैं। अब तक सामने आए मामलों में हुई रिसर्च में सामने आया है कि इनमें से ज्यादातर मरीज पाकिस्तान से माइग्रेंट होकर आए परिवारों के हैं। हर साल देश में करीब 10 हजार नए मरीज मिल रहे हैं। सरकार की ओर से इस बीमारी को खत्म करने के लिए विशेष रूप से जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। ताकि शादी से पहले युवाओं की थैलेसीमिया की जांच करके इसके नए पैदा होने वाले मरीजों पर रोक लगाई जा सके। करनाल से कुरुक्षेत्र, सोनीपत, पानीपत, कैथल, यमुनानगर और उत्तर प्रदेश के शामली और सहारनपुर के मरीजों के लिए भी रक्त दिया जाता है। ब्यूरो
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माता-पिता से बच्चे भी होते हैं थैलेसीमिक
डॉक्टरों के अनुसार, थैलेसीमिया आनुवांशिक बीमारी है। अगर मां-बाप को माइनर थैलेसीमिया है तो बच्चों को मेजर थैलेसीमिया होने की संभावना ज्यादा है। शुरू में तो बच्चे को महीने में ब्लड चढ़ता है, लेकिन जैसे-जैसे बच्चे की उम्र बढ़ती है उसे दो हफ्ते में ब्लड चढ़ने लगता है। ब्लड बार-बार चढ़ने से शरीर के कई हिस्सों में आयरन जमता है। ऐसा न हो, इसके लिए भी मरीज को दवाई दी जाती है। अस्पताल में गर्भवती का टेस्ट किया जाता है। यदि वह माइनर थैलेसीमिया है तो उसके पति का टेस्ट होता है। यदि वह भी माइनर मिले तो बच्चे की जांच होती है।
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मरीजों की दर में आठ प्रतिशत तक वृद्धि
करनाल जिले में स्वास्थ्य विभाग के पास थैलेसीमिया के 85 मरीज पंजीकृत हैं। जिन्हें हर दो माह में तीन बार रक्त चढ़ता है। इन मरीजों के लिए नागरिक अस्पताल के ब्लड बैंक में करीब 270 यूनिट रक्त उपलब्ध रहता है। वहीं जीटी रोड बेल्ट में पानीपत, कुरुक्षेत्र, यमुनानगर और अंबाला को मिलाकर कुल 350 मरीज हैं। मरीजों की दर पांच से आठ प्रतिशत तक बढ़ रही है।
बीमारी खत्म करने के लिए यह जरूरी
- शादी से पहले युवक-युवती का एचपीएलसी टेस्ट जरूर कराएं। ताकि उनके एचबी की टाइप पता चले। यदि दोनों का थैलेसीमिया माइनर मिले तो शादी न करें।
- शादी हो चुकी है तो गर्भवती महिला की जांच कराएं। यदि बच्चा मेजर थैलेसीमिक मिलता है तो गर्भपात करवा सकते हैं। माइनर थैलेसीमिक मिलना बीमारी नहीं है।
- मरीज की पुष्टि हो चुकी है तो रक्त चढ़वाने के अलावा बोनमैरो ट्रांसप्लांट करके पूरी तरह से ठीक किया जा सकता है। प्रदेश में अब तक 19 मरीज इस पद्धति से ठीक हुए हैं।
फोटो--102 नंबर है।
15 लाख रुपये तक सरकार से मिलती है मदद
बोनमैरो के लिए जीन्स परिवार से मिलता है। 25 प्रतिशत मामलों में जीन्स मैच करता है। बाकी बाहर से जीन्स मैच होने के चांस एक प्रतिशत ही रहते हैं। इस प्रक्रिया में करीब 25 लाख खर्च आता है। 15 लाख रुपये तक सरकार की ओर से भी दिए जाते हैं। जागरूकता के लिए मेडिकल कॉलेज के सभागार में वीरवार को कार्यशाला का आयोजन होगा। जिसमें लोगों को पूरी प्रक्रिया समझाई जाएगी।
- डॉ. संजय वर्मा, क्षेत्रीय रक्त संचार अधिकारी