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Karnal News: जूट मार्क इंडिया से होगी जूट उत्पादों की पहचान
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पानीपत। वस्त्र मंत्रालय की वस्त्र समिति ने शुक्रवार को सेक्टर 25 स्थित निजी होटल में जूट मार्क इंडिया (जेएमआई) योजना के अंतर्गत एक जागरूकता कार्यशाला का आयोजन किया । कार्यक्रम में जूट मार्क की जानकारी दी गई। अब जूट के उत्पादों की गुणवत्ता की पहचान करने के लिए जूट मार्क दिया गया है। जिस उत्पाद पर यह जूट मार्क होगा, वहीं असल होगा। इससे घटिया किस्म के जूट उत्पादों पर प्रतिबंध लगेगा। कार्यक्रम में वस्त्र समिति के संयुक्त निदेशक डॉ. केएस मुरलीधर और उप निदेशक शिल्पी चौहान ने उद्यमियों को जूट मार्क की जानकारी दी। कार्यक्रम में मुख्यातिथि के रूप में सयुंक्त आयुक्त संजय कुमार ने शिरकत की।
संयुक्त निदेशक डॉ. केएस मुरलीधर ने बताया कि जूट मार्क इंडिया योजना नौ जुलाई 2022 को भारत सरकार के कपड़ा मंत्रालय के सचिव द्वारा घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में जूट उत्पादों को बढ़ावा देने और पहचान दिलाने के उद्देश्य से शुरू की गई थी। कपड़ा मंत्रालय के तहत राष्ट्रीय जूट बोर्ड (एनजेबी) भारत में इस योजना को लागू करने के लिए जिम्मेदार नोडल निकाय है। जिसमें वस्त्र समिति एक प्रमुख कार्यान्वयन एजेंसी के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। पर्यावरण के अनुकूल और टिकाऊ फाइबर के रूप में जूट के बढ़ते महत्व के साथ, कार्यशाला का उद्देश्य घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों बाजारों में जूट उत्पादों की पहचान और विपणन क्षमता को मजबूत करना है। अब जूट के असल उत्पादों की पहचान जूट मार्क इंडिया से होगी। उद्यमी इस मार्क को देखकर उत्पाद खरीद सकेंगे। असल उत्पाद की पहचान जल्द होगी। उप निदेशक शिल्पी चौहान ने यहां बताया कि सरकार जूट की मशीनों पर 30 प्रतिशत तक सब्सिडी दे रही है। पानीपत अब जूट के क्षेत्र में अपनी पहचान बना रहा है। पानीपत देश के अन्य हिस्सों के साथ साथ विदेशों में भी जूट के उत्पाद निर्यात कर रहा है। तेज से जूट उद्योग फैल रहा है। इस मौके पर गुणवत्ता आश्वासन अधिकारी चिराग ढींगरा, अंकुर मदान, विवेक शर्मा, चैंबर ऑफ कॉमर्स के चेयरमैन विनोद धमीजा व अनिल बंसल मुख्य रूप से मौजूद रहे।
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संयुक्त निदेशक डॉ. केएस मुरलीधर ने बताया कि जूट मार्क इंडिया योजना नौ जुलाई 2022 को भारत सरकार के कपड़ा मंत्रालय के सचिव द्वारा घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में जूट उत्पादों को बढ़ावा देने और पहचान दिलाने के उद्देश्य से शुरू की गई थी। कपड़ा मंत्रालय के तहत राष्ट्रीय जूट बोर्ड (एनजेबी) भारत में इस योजना को लागू करने के लिए जिम्मेदार नोडल निकाय है। जिसमें वस्त्र समिति एक प्रमुख कार्यान्वयन एजेंसी के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। पर्यावरण के अनुकूल और टिकाऊ फाइबर के रूप में जूट के बढ़ते महत्व के साथ, कार्यशाला का उद्देश्य घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों बाजारों में जूट उत्पादों की पहचान और विपणन क्षमता को मजबूत करना है। अब जूट के असल उत्पादों की पहचान जूट मार्क इंडिया से होगी। उद्यमी इस मार्क को देखकर उत्पाद खरीद सकेंगे। असल उत्पाद की पहचान जल्द होगी। उप निदेशक शिल्पी चौहान ने यहां बताया कि सरकार जूट की मशीनों पर 30 प्रतिशत तक सब्सिडी दे रही है। पानीपत अब जूट के क्षेत्र में अपनी पहचान बना रहा है। पानीपत देश के अन्य हिस्सों के साथ साथ विदेशों में भी जूट के उत्पाद निर्यात कर रहा है। तेज से जूट उद्योग फैल रहा है। इस मौके पर गुणवत्ता आश्वासन अधिकारी चिराग ढींगरा, अंकुर मदान, विवेक शर्मा, चैंबर ऑफ कॉमर्स के चेयरमैन विनोद धमीजा व अनिल बंसल मुख्य रूप से मौजूद रहे।
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