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Karnal News: नियमित समय पर विषयों को दोहराना जरूरी
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- शिक्षक बोले, समय सारणी के अनुसार हर विषय पर करें फोकस
काजल पांचाल
संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। बोर्ड परीक्षा का समय नजदीक आते ही विद्यार्थियों पर पढ़ाई का दबाव बढ़ने लगता है। शहर के राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय की छात्राओं का कहना है कि वह समय सारणी बनाकर उन विषयों को प्राथमिकता दे रहे हैं, जो जटिल हैं। शिक्षकों ने बताया कि छात्राएं विषय को समझकर पढ़ाई करें, नियमित अंतराल पर उन्हें दोहराते रहें और मानसिक एकाग्रता बनाए रखें जिससे बेहतर परिणाम लाया जा सकता है। वहीं पढ़ाई में बीच-बीच में ब्रेक लेने से भी तनाव दूर हो जाता है व चीजें याद रखने में आसानी हो जाती है।
कठिन विषयों को दें अधिक समय
कशिश का कहना है कि सिलेबस बड़ा है, लेकिन हर विषय को प्राथमिकता देना भी जरूरी है इसके लिए हम समय सारणी बनाकर प्रत्येक विषय को समय दे पा रहे हैं। कुछ विषय आसान होते हैं जैसे कि अंग्रेजी। अगर तैयारी हो तो केवल बिंदुओं को याद करके अहम विषयों को समझा जा सकता है। अगर कोई विषय लगता है कि समझ में नहीं आ रहा है तो संबंधित अध्यापक से फोन पर बात कर जानकारी लेती हूं।
नोटस भी परीक्षा में सहायक
भूमि बताती है कि कई बार सवाल घुमाकर पूछे जाते हैं, जिससे नंबर कटने का डर रहता है। इसके लिए हम टॉपिक को हर एंगल से तैयार करते हैं ताकि जवाब देने में कठिनाई न आए। इसके अलावा, मेरी नॉन-मेडिकल स्ट्रीम में फिजिक्स और केमिस्ट्री सबसे कठिन विषय लगते हैं। फिजिक्स में बहुत सारे कठिन कांसेप्ट और सूत्र होते हैं उनको लिखकर याद करने से आसानी से याद हो जाते हैं। इसके अलावा, शुरुआत से बनाए गए नोट्स इन दिनों काफी सहायक साबित हो रहे हैं।
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सोशल मीडिया से बनाएं दूरी
खुशी ने बताया कि मोबाइल या सोशल मीडिया हमारी पीढ़ी की सबसे बड़ी समस्या बनी है, इसके लिए जरूरी है कि कम से कम बोर्ड परीक्षा तक तो सभी अगर सोशल मीडिया प्लेटफार्म से दूरी बनाकर रखें तो शायद पढ़ाई पर अच्छे से ध्यान दे पाएं। इसके अलावा, केमिस्ट्री में बहुत सारी रासायनिक अभिक्रियाएं और तत्वों के वैज्ञानिक नाम होते हैं, जिन्हें सही क्रम में लिखने से परीक्षा की बेहतर तैयारी की जा सकती है।
सुबह का समय पढ़ाई के लिए बेहतर
कनिका का कहना है कि बोर्ड परीक्षा के दौरान सबसे बड़ी समस्या कम समय में पूरे सिलेबस की सही रिवीजन करने की होती है। इसके लिए सबसे बड़ी भूमिका हमारे माता-पिता की है, जो हमें समय दे रहे हैं। कई बार घर के माहौल और अभिभावकों की वजह से भी पढ़ाई से ध्यान भटकता है। कनिका ने बताया कि सुबह का समय याद करने के लिए अच्छा माना जाता है, इसलिए मैं सुबह पांच बजे उठकर तैयारी करती हूं।
कठिन विषयों को दे रही ज्यादा समय
अंशु का कहना है कि नॉन-मेडिकल स्ट्रीम होने के कारण गणित मेरा जटिल विषय है। इसके लिए मैं फार्मूले अच्छे से रट लेती हूं जिससे हर सवाल को हल करने में आसानी हो जाती है। अंशु ने बताया कि जो विषय ऐसे लगते हैं कि उन पर कम समय देने से काम चल सकता है तो उन्हें कम समय देती हूं ताकि मुश्किल विषयों को अधिक समय मिल सके। इसके अलावा अंशु ने बताया कि आजकल एआई टूल्स भी पढ़ाई में मददगार बन रहा है। गूगल जेमिनी व चैट जीपीटी जैसे प्लेटफार्म से तस्वीरों सहित सवालों को हल करने में आसानी हो जाती है।
कठिन नाम रोजाना दोहराएं
आरजू का कहना है कि मैं मेडिकल स्ट्रीम से हूं। जीवविज्ञान में अलग-अलग पौधों और जीव-जंतुओं के वैज्ञानिक नाम होते हैं, जो काफी लंबे और जटिल होते हैं जिसे लिखना और याद रखना काफी कठिन हो जाता है। यह चुनौती न बने इसके लिए इन्हें याद करने के लिए मैं अलग-अलग तरीके अपनाती हूं। जैसे कि लंबे शब्दों को भागों में विभाजित करके याद करना और उन्हें रोजाना एक बार पढ़ना आदि।
समय सारणी बनाकर करें रिवीजन
पीएम श्री राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय की जीव विज्ञान शिक्षिका मीना का कहना है कि परीक्षा का तनाव छात्रों के प्रदर्शन को प्रभावित करता है। छात्रों की सबसे बड़ी समस्या यही होती है कि वे आखिरी समय में पूरी किताब को दोहराने की कोशिश करते हैं, जो व्यावहारिक रूप से संभव नहीं होता। उन्होंने कहा कि रिवीजन के लिए एक समय-सारणी बनानी चाहिए और एक ही विषय पर घंटों समय लगाने के बजाय छोटे-छोटे ब्रेक लेकर पढ़ाई करनी चाहिए।
सामाजिक गतिविधियों से रहें दूर
राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय के प्राचार्य मोहिंंदर नरवाल ने छात्राओं को सलाह दी कि परीक्षा तक छात्राएं स्कूल या घर में होने वाली गतिविधियां जैसे शादी समारोह आदि पर कम ध्यान दें, पढ़ाई पर फोकस करें। उन्होंने कहा कि रात के अलावा सुबह भी जल्दी उठकर पढ़ना चाहिए जिससे सारा सिलेबस कवर करने में आसानी होगी। थोड़ा समय सुबह मेडिटेशन को भी देना चाहिए ताकि ध्यान लगाने की शक्ति बढ़े।
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काजल पांचाल
संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। बोर्ड परीक्षा का समय नजदीक आते ही विद्यार्थियों पर पढ़ाई का दबाव बढ़ने लगता है। शहर के राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय की छात्राओं का कहना है कि वह समय सारणी बनाकर उन विषयों को प्राथमिकता दे रहे हैं, जो जटिल हैं। शिक्षकों ने बताया कि छात्राएं विषय को समझकर पढ़ाई करें, नियमित अंतराल पर उन्हें दोहराते रहें और मानसिक एकाग्रता बनाए रखें जिससे बेहतर परिणाम लाया जा सकता है। वहीं पढ़ाई में बीच-बीच में ब्रेक लेने से भी तनाव दूर हो जाता है व चीजें याद रखने में आसानी हो जाती है।
कठिन विषयों को दें अधिक समय
कशिश का कहना है कि सिलेबस बड़ा है, लेकिन हर विषय को प्राथमिकता देना भी जरूरी है इसके लिए हम समय सारणी बनाकर प्रत्येक विषय को समय दे पा रहे हैं। कुछ विषय आसान होते हैं जैसे कि अंग्रेजी। अगर तैयारी हो तो केवल बिंदुओं को याद करके अहम विषयों को समझा जा सकता है। अगर कोई विषय लगता है कि समझ में नहीं आ रहा है तो संबंधित अध्यापक से फोन पर बात कर जानकारी लेती हूं।
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नोटस भी परीक्षा में सहायक
भूमि बताती है कि कई बार सवाल घुमाकर पूछे जाते हैं, जिससे नंबर कटने का डर रहता है। इसके लिए हम टॉपिक को हर एंगल से तैयार करते हैं ताकि जवाब देने में कठिनाई न आए। इसके अलावा, मेरी नॉन-मेडिकल स्ट्रीम में फिजिक्स और केमिस्ट्री सबसे कठिन विषय लगते हैं। फिजिक्स में बहुत सारे कठिन कांसेप्ट और सूत्र होते हैं उनको लिखकर याद करने से आसानी से याद हो जाते हैं। इसके अलावा, शुरुआत से बनाए गए नोट्स इन दिनों काफी सहायक साबित हो रहे हैं।
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सोशल मीडिया से बनाएं दूरी
खुशी ने बताया कि मोबाइल या सोशल मीडिया हमारी पीढ़ी की सबसे बड़ी समस्या बनी है, इसके लिए जरूरी है कि कम से कम बोर्ड परीक्षा तक तो सभी अगर सोशल मीडिया प्लेटफार्म से दूरी बनाकर रखें तो शायद पढ़ाई पर अच्छे से ध्यान दे पाएं। इसके अलावा, केमिस्ट्री में बहुत सारी रासायनिक अभिक्रियाएं और तत्वों के वैज्ञानिक नाम होते हैं, जिन्हें सही क्रम में लिखने से परीक्षा की बेहतर तैयारी की जा सकती है।
सुबह का समय पढ़ाई के लिए बेहतर
कनिका का कहना है कि बोर्ड परीक्षा के दौरान सबसे बड़ी समस्या कम समय में पूरे सिलेबस की सही रिवीजन करने की होती है। इसके लिए सबसे बड़ी भूमिका हमारे माता-पिता की है, जो हमें समय दे रहे हैं। कई बार घर के माहौल और अभिभावकों की वजह से भी पढ़ाई से ध्यान भटकता है। कनिका ने बताया कि सुबह का समय याद करने के लिए अच्छा माना जाता है, इसलिए मैं सुबह पांच बजे उठकर तैयारी करती हूं।
कठिन विषयों को दे रही ज्यादा समय
अंशु का कहना है कि नॉन-मेडिकल स्ट्रीम होने के कारण गणित मेरा जटिल विषय है। इसके लिए मैं फार्मूले अच्छे से रट लेती हूं जिससे हर सवाल को हल करने में आसानी हो जाती है। अंशु ने बताया कि जो विषय ऐसे लगते हैं कि उन पर कम समय देने से काम चल सकता है तो उन्हें कम समय देती हूं ताकि मुश्किल विषयों को अधिक समय मिल सके। इसके अलावा अंशु ने बताया कि आजकल एआई टूल्स भी पढ़ाई में मददगार बन रहा है। गूगल जेमिनी व चैट जीपीटी जैसे प्लेटफार्म से तस्वीरों सहित सवालों को हल करने में आसानी हो जाती है।
कठिन नाम रोजाना दोहराएं
आरजू का कहना है कि मैं मेडिकल स्ट्रीम से हूं। जीवविज्ञान में अलग-अलग पौधों और जीव-जंतुओं के वैज्ञानिक नाम होते हैं, जो काफी लंबे और जटिल होते हैं जिसे लिखना और याद रखना काफी कठिन हो जाता है। यह चुनौती न बने इसके लिए इन्हें याद करने के लिए मैं अलग-अलग तरीके अपनाती हूं। जैसे कि लंबे शब्दों को भागों में विभाजित करके याद करना और उन्हें रोजाना एक बार पढ़ना आदि।
समय सारणी बनाकर करें रिवीजन
पीएम श्री राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय की जीव विज्ञान शिक्षिका मीना का कहना है कि परीक्षा का तनाव छात्रों के प्रदर्शन को प्रभावित करता है। छात्रों की सबसे बड़ी समस्या यही होती है कि वे आखिरी समय में पूरी किताब को दोहराने की कोशिश करते हैं, जो व्यावहारिक रूप से संभव नहीं होता। उन्होंने कहा कि रिवीजन के लिए एक समय-सारणी बनानी चाहिए और एक ही विषय पर घंटों समय लगाने के बजाय छोटे-छोटे ब्रेक लेकर पढ़ाई करनी चाहिए।
सामाजिक गतिविधियों से रहें दूर
राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय के प्राचार्य मोहिंंदर नरवाल ने छात्राओं को सलाह दी कि परीक्षा तक छात्राएं स्कूल या घर में होने वाली गतिविधियां जैसे शादी समारोह आदि पर कम ध्यान दें, पढ़ाई पर फोकस करें। उन्होंने कहा कि रात के अलावा सुबह भी जल्दी उठकर पढ़ना चाहिए जिससे सारा सिलेबस कवर करने में आसानी होगी। थोड़ा समय सुबह मेडिटेशन को भी देना चाहिए ताकि ध्यान लगाने की शक्ति बढ़े।