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गेहूं की नौ नई किस्में की ईजाद
सार
डीबीडब्ल्यू-222 किस्म पंजाब, हरियाणा दिल्ली व राजस्थान में बोई जाती है। इसका क्षेत्र विस्तार करके बिहार, बंगाल, पूर्वी उत्तरप्रदेश, झारखंड व आसाम के लिए अनुशंसित किया गया है। डीबीडब्ल्यू-187 उत्तर-पूर्वी मैदानी क्षेत्र व उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र के लिए अनुमोदित थी, अब इसे मध्य भारत के मध्यप्रदेश, गुजरात, राजस्थान व छत्तीसगढ़ क्षेत्र में विस्तार के लिए अनुशंसित किया गया है।
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wheat
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। गेहूं एवं जौ की अखिल भारतीय समन्वित सुधार परियोजना की 60वीं वार्षिक ऑनलाइन बैठक में गेहूं की नौ नई प्रजातियां चिन्हित की गई हैं। खास बात यह है कि इसमें भारतीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान संस्थान करनाल की तीन किस्में शामिल हैं। अब इन नई प्रजातियों के नाम केंद्रीय प्रजाति विमोचन समिति के पास अनुमोदन के लिए भेजे जाएंगे। रिलीज होने के बाद इनका बीज किसानों को उपलब्ध हो सकेगा। इसके अलावा गेहूं के दो और जौ की एक किस्म का क्षेत्र विस्तार किया गया है।
भारतीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान संस्थान करनाल में दो दिवसीय ऑनलाइन बैठक का आयोजन किया गया। मंगलवार को संपन्न हुई बैठक में देश के उत्तर-पश्चिमी मैदानी क्षेत्र (पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान व पश्चिमी उत्तरप्रदेश तथा जम्मू, हिमालच व राजस्थान के कुछ इलाके, उत्तराखंड का तराई वाला क्षेत्र) के लिए कुल पांच नई किस्में चिन्हित की गईं हैं।
इनमें भारतीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान संस्थान करनाल की तीन किस्में डीबीडब्ल्यू-296, डीबीडब्लयू-327 व डीबीडब्ल्यू-332 शामिल हैं। चौथी किस्म एचयूडब्ल्यू-838 (बीएचयू वाराणसी) और पांचवीं किस्म जेकेडब्ल्यू-261 (विरसा विश्वविद्यालय झारखंड) की है। मध्य जोन (मध्यप्रदेश, गुजरात, राजस्थान व छत्तीसगढ़) के लिए छठी किस्म जीडब्ल्यू-513 (गुजरात कृषि विश्वविद्यालय), सातवीं एचआई-1636 और आठवीं किस्म कठिया गेहूं एचआई-8823 (आईएआरआई पूसा केंद्र इंदौर) को चिन्हित किया है। प्रायद्वीपीय क्षेत्र (महाराष्ट्र, कर्नाटक व तमिलनाडु का मैदानी क्षेत्र) के लिए नौंवीं किस्म एमपी-1358 (जवाहरलाल नेहरू कृषि विवि-जबलपुर) चिन्हित की गई है।
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बैठक में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के उप महानिदेशक डा. टीआर शर्मा, सहायक महानिदेशक डा. वाईपी सिंह व डा. डीके यादव, आईएआरआई के निदेशक डा. एके सिंह, डा. संजय कुमार, भारतीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान संस्थान करनाल के निदेशक डा. ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह, डा. उदय सिंह त्यागी, डा. गोपाला रेड्डी के., प्रधान वैज्ञानिक डा. अनुज कुमार व अन्य वैज्ञानिक जुड़े।
गेहूं की दो व जौ की एक किस्म का किया क्षेत्र विस्तार
बैठक में भारतीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान संस्थान करनाल की गेहूं की किस्म डीबीडब्ल्यू-222, डीबीडब्ल्यू-187 तथा जौ की एक प्रजाति डीडब्ल्यूआरबी-137 का क्षेत्र विस्तार किया गया है। डीबीडब्ल्यू-222 किस्म पंजाब, हरियाणा दिल्ली व राजस्थान में बोई जाती है। इसका क्षेत्र विस्तार करके बिहार, बंगाल, पूर्वी उत्तरप्रदेश, झारखंड व आसाम के लिए अनुशंसित किया गया है। डीबीडब्ल्यू-187 उत्तर-पूर्वी मैदानी क्षेत्र व उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र के लिए अनुमोदित थी, अब इसे मध्य भारत के मध्यप्रदेश, गुजरात, राजस्थान व छत्तीसगढ़ क्षेत्र में विस्तार के लिए अनुशंसित किया गया है। इसके अलावा जौ की प्रजाति डीडब्ल्यूआरबी-137 का अब पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और राजस्थान में विस्तार किया गया है।
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करनाल। गेहूं एवं जौ की अखिल भारतीय समन्वित सुधार परियोजना की 60वीं वार्षिक ऑनलाइन बैठक में गेहूं की नौ नई प्रजातियां चिन्हित की गई हैं। खास बात यह है कि इसमें भारतीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान संस्थान करनाल की तीन किस्में शामिल हैं। अब इन नई प्रजातियों के नाम केंद्रीय प्रजाति विमोचन समिति के पास अनुमोदन के लिए भेजे जाएंगे। रिलीज होने के बाद इनका बीज किसानों को उपलब्ध हो सकेगा। इसके अलावा गेहूं के दो और जौ की एक किस्म का क्षेत्र विस्तार किया गया है।
भारतीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान संस्थान करनाल में दो दिवसीय ऑनलाइन बैठक का आयोजन किया गया। मंगलवार को संपन्न हुई बैठक में देश के उत्तर-पश्चिमी मैदानी क्षेत्र (पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान व पश्चिमी उत्तरप्रदेश तथा जम्मू, हिमालच व राजस्थान के कुछ इलाके, उत्तराखंड का तराई वाला क्षेत्र) के लिए कुल पांच नई किस्में चिन्हित की गईं हैं।
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इनमें भारतीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान संस्थान करनाल की तीन किस्में डीबीडब्ल्यू-296, डीबीडब्लयू-327 व डीबीडब्ल्यू-332 शामिल हैं। चौथी किस्म एचयूडब्ल्यू-838 (बीएचयू वाराणसी) और पांचवीं किस्म जेकेडब्ल्यू-261 (विरसा विश्वविद्यालय झारखंड) की है। मध्य जोन (मध्यप्रदेश, गुजरात, राजस्थान व छत्तीसगढ़) के लिए छठी किस्म जीडब्ल्यू-513 (गुजरात कृषि विश्वविद्यालय), सातवीं एचआई-1636 और आठवीं किस्म कठिया गेहूं एचआई-8823 (आईएआरआई पूसा केंद्र इंदौर) को चिन्हित किया है। प्रायद्वीपीय क्षेत्र (महाराष्ट्र, कर्नाटक व तमिलनाडु का मैदानी क्षेत्र) के लिए नौंवीं किस्म एमपी-1358 (जवाहरलाल नेहरू कृषि विवि-जबलपुर) चिन्हित की गई है।
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बैठक में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के उप महानिदेशक डा. टीआर शर्मा, सहायक महानिदेशक डा. वाईपी सिंह व डा. डीके यादव, आईएआरआई के निदेशक डा. एके सिंह, डा. संजय कुमार, भारतीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान संस्थान करनाल के निदेशक डा. ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह, डा. उदय सिंह त्यागी, डा. गोपाला रेड्डी के., प्रधान वैज्ञानिक डा. अनुज कुमार व अन्य वैज्ञानिक जुड़े।
गेहूं की दो व जौ की एक किस्म का किया क्षेत्र विस्तार
बैठक में भारतीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान संस्थान करनाल की गेहूं की किस्म डीबीडब्ल्यू-222, डीबीडब्ल्यू-187 तथा जौ की एक प्रजाति डीडब्ल्यूआरबी-137 का क्षेत्र विस्तार किया गया है। डीबीडब्ल्यू-222 किस्म पंजाब, हरियाणा दिल्ली व राजस्थान में बोई जाती है। इसका क्षेत्र विस्तार करके बिहार, बंगाल, पूर्वी उत्तरप्रदेश, झारखंड व आसाम के लिए अनुशंसित किया गया है। डीबीडब्ल्यू-187 उत्तर-पूर्वी मैदानी क्षेत्र व उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र के लिए अनुमोदित थी, अब इसे मध्य भारत के मध्यप्रदेश, गुजरात, राजस्थान व छत्तीसगढ़ क्षेत्र में विस्तार के लिए अनुशंसित किया गया है। इसके अलावा जौ की प्रजाति डीडब्ल्यूआरबी-137 का अब पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और राजस्थान में विस्तार किया गया है।