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गढ़ भी नहीं बचा पाया इनेलो, जमानत जब्त
करनाल
Updated Sat, 17 May 2014 12:41 AM IST
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लोकसभा चुनाव के नतीजों को अब प्रदेश के भावी राजनीतिक समीकरणों के तौर पर
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देखा जा रहा है। करनाल लोकसभा सीट के नतीजे इस बार न सिर्फ चौंकाने वाले
रहे, बल्कि अप्रत्याशित रहे। लोकसभा क्षेत्र के चार विधानसभा क्षेत्रों में
इनेलो के विधायक थे, लेकिन वे अपना ही गढ़ नहीं बचा सके।
नतीजा यह हुआ है कि इनेलो के प्रत्याशी जसविंद्र सिंह संधू की जमानत भी जब्त हो गई। वर्ष 2009 के चुनाव में रनरअप रहे मराठा वीरेंद्र वर्मा भी इस बार अपनी जमानत नहीं बचा सके। कांग्रेस प्रत्याशी डॉ. अरविंद शर्मा की ओवरऑल स्थिति बेहद ही निराशाजनक रही।
पिछले चुनाव में जहां से उन्होंने बड़ी जीत हासिल की थी, इस बार वे वहां पीछे चले गए। असंध हलके से वर्ष 2009 के चुनाव में उन्होंने 37373 वोट हासिल करके पहला स्थान हासिल किया था, लेकिन इस बार में यहां चौथे स्थान पर रहे। इनेलो के कार्यकर्ता हिसार में दुष्यंत चौटाला की जीत से गदगद होकर भले ही करनाल लोकसभा सीट पर जमानत जब्त होने के धब्बे को भुला बैठे हों, लेकिन तीन से चार महीने बाद होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए यह खतरे की घंटी है।
यहां इनेलो के विधायक
करनाल जिले के इंद्री हलके में डॉ. अशोक कश्यप विधायक हैं। यहां इनेलो तीसरे नंबर पर रही। घरौंडा में नरेंद्र सांगवान, नीलोखेड़ी में मामू राम गोंदर और इसराना में कृष्ण पंवार भी अपने यहां पार्टी प्रत्याशी को जीत नहीं दिला सके।
कांग्रेस को बड़ा नुकसान
इस चुनाव में सबसे बड़ा नुकसान कांग्रेस को उठाना पड़ा है। हालांकि कांग्रेस प्रत्याशी अपनी जमानत बचाने में कामयाब रहे, लेकिन करनाल शहर से लेकर हर विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस को भी मुंह की खानी पड़ी है।
ऐसे गई इनेलो-बसपा की जमानत
करनाल लोकसभा सीट पर 11 लाख 90 हजार 571 वोट पोल हुए। नियम के मुताबिक कुल पोल वोट का छठा हिस्सा प्रत्याशियों को जमानत बचाने के लिए लेना होता है। एक लाख 98 हजार 428 वोट हासिल करने वाले प्रत्याशी की जमानत इस चुनाव में बची, लेकिन इनेलो और बसपा के उम्मीदवार को इससे कम वोट पड़े।
नतीजा यह हुआ है कि इनेलो के प्रत्याशी जसविंद्र सिंह संधू की जमानत भी जब्त हो गई। वर्ष 2009 के चुनाव में रनरअप रहे मराठा वीरेंद्र वर्मा भी इस बार अपनी जमानत नहीं बचा सके। कांग्रेस प्रत्याशी डॉ. अरविंद शर्मा की ओवरऑल स्थिति बेहद ही निराशाजनक रही।
पिछले चुनाव में जहां से उन्होंने बड़ी जीत हासिल की थी, इस बार वे वहां पीछे चले गए। असंध हलके से वर्ष 2009 के चुनाव में उन्होंने 37373 वोट हासिल करके पहला स्थान हासिल किया था, लेकिन इस बार में यहां चौथे स्थान पर रहे। इनेलो के कार्यकर्ता हिसार में दुष्यंत चौटाला की जीत से गदगद होकर भले ही करनाल लोकसभा सीट पर जमानत जब्त होने के धब्बे को भुला बैठे हों, लेकिन तीन से चार महीने बाद होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए यह खतरे की घंटी है।
यहां इनेलो के विधायक
करनाल जिले के इंद्री हलके में डॉ. अशोक कश्यप विधायक हैं। यहां इनेलो तीसरे नंबर पर रही। घरौंडा में नरेंद्र सांगवान, नीलोखेड़ी में मामू राम गोंदर और इसराना में कृष्ण पंवार भी अपने यहां पार्टी प्रत्याशी को जीत नहीं दिला सके।
कांग्रेस को बड़ा नुकसान
इस चुनाव में सबसे बड़ा नुकसान कांग्रेस को उठाना पड़ा है। हालांकि कांग्रेस प्रत्याशी अपनी जमानत बचाने में कामयाब रहे, लेकिन करनाल शहर से लेकर हर विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस को भी मुंह की खानी पड़ी है।
ऐसे गई इनेलो-बसपा की जमानत
करनाल लोकसभा सीट पर 11 लाख 90 हजार 571 वोट पोल हुए। नियम के मुताबिक कुल पोल वोट का छठा हिस्सा प्रत्याशियों को जमानत बचाने के लिए लेना होता है। एक लाख 98 हजार 428 वोट हासिल करने वाले प्रत्याशी की जमानत इस चुनाव में बची, लेकिन इनेलो और बसपा के उम्मीदवार को इससे कम वोट पड़े।