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पहले दिन ही खरीद व्यवस्था ध्वस्त, नहीं आए मिलर्स, भड़के किसान
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माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। धान खरीद के पहले दिन जिले की सभी अनाज मंडियों में भारी अव्यवस्थाएं रहीं। राइस मिलर्स मंडियों में नहीं पहुंचे तो खरीद एजेंसियां भी दिखाई नहीं दी। कहीं एजेंसियों के अधिकारी पहुंचे लेकिन धान की खरीद नहीं हो सकी। कई अनाज मंडियों में किसानों ने तालाबंदी करके प्रदर्शन कर हाईवे जाम किया। सभी अनाज मंडियों में सुबह से ही किसानों की धान भरी ट्रालियों की लंबी लाइनें लगी रहीं। हजारों किसान दिनभर परेशान रहे।
शेड्यूलिंग नहीं होने से गेटपास काटने में भी घंटों का समय लगा। जिसे देखकर दोपहर को उपायुक्त ने खुद की मोर्चा संभाला और एसपी के साथ मंडी का दौरा किया लेकिन धान में नमी 22 से 23 फीसदी मिली। जिसके कारण धान की खरीद नहीं हो सकी। हालांकि शाम तक जिलेभर की 15 मंडियों व खरीद केंद्रों पर सिर्फ 4210 क्विंटल धान खरीदने का दावा किया गया।
अनाज मंडियों में रविवार को सबसे बड़ी परेशान धान में नमी की रही। मुख्यत: इसी कारण राइस मिलर्स भी धान खरीद से पीछे हट रहे हैं। शनिवार को मुख्यमंत्री की तीन अक्तूबर से धान खरीद की घोषणा के बाद बड़ी संख्या में किसान रात को ही ट्रालियां लेकर मंडियों को ओर चल दिए। सुबह तक करनाल मंडी सहित जिले की कई मंडियों में लंबी लंबी लाइनें लग गई। पुलिस को यातायात व्यवस्था संभालनी पड़ी। क्षेत्रीय प्रशासक मार्केटिंग बोर्ड गगनदीप सिंह, डीएफएससी अशोक रावत, डीएमईओ ईश्वर राणा, सचिव चंद्रप्रकाश आदि सुबह से व्यवस्था संभालने में जुटे। लेकिन कोई राइस मिलर्स धान खरीदने नहीं पहुंचा तो आढ़तियों ने भी खरीद में कोई रुचि नहीं दिखाई। कुल मिलाकर धान की खरीद नहीं हो सकी। इसके बाद उपायुक्त निशांत कुमार यादव व एसपी गंगाराम पूनिया पहुंचे। खुद धान की ढेरी चेक कराए तो नमी 22 से 23 प्रतिशत निकली। जिसे देखकर वह भी एजेंसियों पर खरीद का दबाव नहीं बना सके, क्योंकि सरकार ने 17 प्रतिशत नमीं तक ही धान खरीदने के आदेश दिए हैं। यहां किसानों ने पोर्टल में दिक्कत, शेड्यूलिंग न होने से गेटपास में घंटों का समय लगने आदि कई समस्याएं बताई। जिनके निराकरण के निर्देश दिए। किसानों को भरोसा दिया कि उनका दाना दाना खरीदा जाएगा। उन्हें चिंता करने की जरूरत नहीं है। किसानों से कहा कि जिनकी फसल का पंजीकरण अभी तक नहीं हुआ है, वह तत्काल पंजीकरण करा लें। डीएफएससी अशोक रावत ने बताया कि सभी मंडियों में देर शाम तक पहले दिन 4210 क्विंटल धान खरीदा गया है। सोमवार से विधिवत तरीके से खरीद की जाएगी।
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शेड्यूलिंग के लिए मंडी में लगाए कर्मचारी
उपायुक्त निशांत कुमार यादव ने जिले की सभी मंडियों के अधिकारियों को निर्देशित किया कि बड़ी संख्या में किसान बिना शेड्यूलिंग के ही धान लेकर आए हैं, इसलिए किसान एक व दो अक्तूबर सहित आज लाए धान की शेड्यूलिंग कर लें। किसी को दिक्कत हैं तो मंडियों में कर्मचारी लगाए गए हैं। किसान कार्यालय जाकर शेड्यूलिंग करा लें। सारी फसल ई-खरीद के माध्यम से की जाएगी। चार अक्तूबर से किसान शेड्यूलिंग करके ही अपनी फसल अपनी बारी के हिसाब से मंडी में लेकर आएं। मंडियों में भीड़ न हो, इसकी व्यवस्था की जाए और खरीद के बाद तुरंत उठान किया जाए।
तीन दिन से धान लेकर मंडी में आया हूं। दो बार बारिश हो चुकी है,सरकार भी धान न खरीद कर कष्ट दे रही है। आखिर किसान क्या करें। 55 हजार रुपये प्रति एकड़ जमीन का ठेका दिया, 20 हजार लागत लगाई और धान की दुर्दशा हो रही है।
नवीन कुमार किसान नरूखेड़ी।
-सुबह से शाम हो गई है, कोई कर्मचारी धान खरीदने नहीं आया है। बार-बार काले बादल आ रहे हैं, धान खुले में पड़ा है। आखिर सरकार की यह कैसी व्यवस्था है। बारिश लगातार हो रही है, नमी बढ़ रही है।
- बलकार, किसान बजीदा जाटान
- सुबह 5 बजे धान की ट्राली लेकर आया हूं, दो बज चुके हैं, अभी तक पर्ची तक नहीं मिल सकी है। कभी कहते हैं कि आपका नंबर नहीं आया तो कभी कहते हैं आढ़ती से बात करो।
- राजेश किसान नगला
----------
- सुबह चार बजे से लाइन में हूं लेकिन गेटपास नहीं दिया जा रहा है। कह रहे हैं कि मोबाइल पर आपका मैसेज नहीं आया, इसलिए धान लेकर बाद में आना। अब धान खराब हो जाएगा।
जगजीत सिंह, किसान फूसगढ़
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करनाल। धान खरीद के पहले दिन जिले की सभी अनाज मंडियों में भारी अव्यवस्थाएं रहीं। राइस मिलर्स मंडियों में नहीं पहुंचे तो खरीद एजेंसियां भी दिखाई नहीं दी। कहीं एजेंसियों के अधिकारी पहुंचे लेकिन धान की खरीद नहीं हो सकी। कई अनाज मंडियों में किसानों ने तालाबंदी करके प्रदर्शन कर हाईवे जाम किया। सभी अनाज मंडियों में सुबह से ही किसानों की धान भरी ट्रालियों की लंबी लाइनें लगी रहीं। हजारों किसान दिनभर परेशान रहे।
शेड्यूलिंग नहीं होने से गेटपास काटने में भी घंटों का समय लगा। जिसे देखकर दोपहर को उपायुक्त ने खुद की मोर्चा संभाला और एसपी के साथ मंडी का दौरा किया लेकिन धान में नमी 22 से 23 फीसदी मिली। जिसके कारण धान की खरीद नहीं हो सकी। हालांकि शाम तक जिलेभर की 15 मंडियों व खरीद केंद्रों पर सिर्फ 4210 क्विंटल धान खरीदने का दावा किया गया।
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अनाज मंडियों में रविवार को सबसे बड़ी परेशान धान में नमी की रही। मुख्यत: इसी कारण राइस मिलर्स भी धान खरीद से पीछे हट रहे हैं। शनिवार को मुख्यमंत्री की तीन अक्तूबर से धान खरीद की घोषणा के बाद बड़ी संख्या में किसान रात को ही ट्रालियां लेकर मंडियों को ओर चल दिए। सुबह तक करनाल मंडी सहित जिले की कई मंडियों में लंबी लंबी लाइनें लग गई। पुलिस को यातायात व्यवस्था संभालनी पड़ी। क्षेत्रीय प्रशासक मार्केटिंग बोर्ड गगनदीप सिंह, डीएफएससी अशोक रावत, डीएमईओ ईश्वर राणा, सचिव चंद्रप्रकाश आदि सुबह से व्यवस्था संभालने में जुटे। लेकिन कोई राइस मिलर्स धान खरीदने नहीं पहुंचा तो आढ़तियों ने भी खरीद में कोई रुचि नहीं दिखाई। कुल मिलाकर धान की खरीद नहीं हो सकी। इसके बाद उपायुक्त निशांत कुमार यादव व एसपी गंगाराम पूनिया पहुंचे। खुद धान की ढेरी चेक कराए तो नमी 22 से 23 प्रतिशत निकली। जिसे देखकर वह भी एजेंसियों पर खरीद का दबाव नहीं बना सके, क्योंकि सरकार ने 17 प्रतिशत नमीं तक ही धान खरीदने के आदेश दिए हैं। यहां किसानों ने पोर्टल में दिक्कत, शेड्यूलिंग न होने से गेटपास में घंटों का समय लगने आदि कई समस्याएं बताई। जिनके निराकरण के निर्देश दिए। किसानों को भरोसा दिया कि उनका दाना दाना खरीदा जाएगा। उन्हें चिंता करने की जरूरत नहीं है। किसानों से कहा कि जिनकी फसल का पंजीकरण अभी तक नहीं हुआ है, वह तत्काल पंजीकरण करा लें। डीएफएससी अशोक रावत ने बताया कि सभी मंडियों में देर शाम तक पहले दिन 4210 क्विंटल धान खरीदा गया है। सोमवार से विधिवत तरीके से खरीद की जाएगी।
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शेड्यूलिंग के लिए मंडी में लगाए कर्मचारी
उपायुक्त निशांत कुमार यादव ने जिले की सभी मंडियों के अधिकारियों को निर्देशित किया कि बड़ी संख्या में किसान बिना शेड्यूलिंग के ही धान लेकर आए हैं, इसलिए किसान एक व दो अक्तूबर सहित आज लाए धान की शेड्यूलिंग कर लें। किसी को दिक्कत हैं तो मंडियों में कर्मचारी लगाए गए हैं। किसान कार्यालय जाकर शेड्यूलिंग करा लें। सारी फसल ई-खरीद के माध्यम से की जाएगी। चार अक्तूबर से किसान शेड्यूलिंग करके ही अपनी फसल अपनी बारी के हिसाब से मंडी में लेकर आएं। मंडियों में भीड़ न हो, इसकी व्यवस्था की जाए और खरीद के बाद तुरंत उठान किया जाए।
तीन दिन से धान लेकर मंडी में आया हूं। दो बार बारिश हो चुकी है,सरकार भी धान न खरीद कर कष्ट दे रही है। आखिर किसान क्या करें। 55 हजार रुपये प्रति एकड़ जमीन का ठेका दिया, 20 हजार लागत लगाई और धान की दुर्दशा हो रही है।
नवीन कुमार किसान नरूखेड़ी।
-सुबह से शाम हो गई है, कोई कर्मचारी धान खरीदने नहीं आया है। बार-बार काले बादल आ रहे हैं, धान खुले में पड़ा है। आखिर सरकार की यह कैसी व्यवस्था है। बारिश लगातार हो रही है, नमी बढ़ रही है।
- बलकार, किसान बजीदा जाटान
- सुबह 5 बजे धान की ट्राली लेकर आया हूं, दो बज चुके हैं, अभी तक पर्ची तक नहीं मिल सकी है। कभी कहते हैं कि आपका नंबर नहीं आया तो कभी कहते हैं आढ़ती से बात करो।
- राजेश किसान नगला
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- सुबह चार बजे से लाइन में हूं लेकिन गेटपास नहीं दिया जा रहा है। कह रहे हैं कि मोबाइल पर आपका मैसेज नहीं आया, इसलिए धान लेकर बाद में आना। अब धान खराब हो जाएगा।
जगजीत सिंह, किसान फूसगढ़

अनाज मंडी करनाल में धान खरीद का जायजा लेते उपायुक्त व डीएफएससी।