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गाय दुग्ध उत्पादन में पाकिस्तान आगे
अमर उजाला/ब्यूरो/करनाल
Updated Sat, 30 Jul 2016 11:38 PM IST
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प्रतिभागियो को सम्मानित किया गया
- फोटो : amar ujala
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सार्क कृषि केंद्र बांग्लादेश की ओर से राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान में ‘प्रजनन जैव प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में प्रगति’ विषय पर आधारित छह दिवसीय क्षेत्रीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का शनिवार को समापन हो गया। गुरु अंगद देव पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति डॉ. वीके तनेजा ने मुख्य अतिथि के तौर पर शिरकत की और प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया। इसमें छह सार्क देशों के 19 प्रतिभागियों ने पशु प्रजनन में आ रही समस्याओं पर मंथन किया।
डॉ. वीके तनेजा ने कहा कि दुनिया के दुधारू पशुओं की आबादी का 21 प्रतिशत डेयरी पशु सार्क देशों में हैं। दुनिया का 25 प्रतिशत गाय और भैंस, 15 प्रतिशत भेड़ व बकरी और 7 प्रतिशत ऊंट सार्क देशों के पास हैं। सार्क देशों में वर्ष 2011 के दौरान गाय का दुग्ध उत्पादन औसत 628 किलोग्राम वार्षिक था, जबकि भैंस के प्रति औसत दुग्ध उत्पादन 1258 किलो वार्षिक रहा है। प्रति वर्ष प्रति गाय दूध उत्पादकता पाकिस्तान में सबसे ज्यादा है और दूसरे नंबर पर भारत है। उन्होंने कहा कि न्यूक्लियर ट्रांसफर और क्लोनिंग एक जानवर से उसी प्रकार के कई जानवर पैदा करने की अनुमति देता है। मेल व फिमेल क्लोन का प्रजनन सामान्य जानवरों की तरह है और एनडीआरआई के वैज्ञानिकों ने उनकी क्षमता को सफलतापूर्वक सत्यापित किया है। उन्होंने कहा कि प्रजनन जैव प्रौद्योगिकी से पशुधन में जेनेटिक सुधार की प्रबल संभावनाएं हैं।
भारत दुनिया का सबसे बड़ा दूध उत्पादक देश
केंद्रीय भैंस अनुसंधान संस्थान हिसार के निदेशक डॉ. इंद्रजीत सिंह ने कहा कि भारत में भैंस को काले सोने के रूप में जाना जाता है। कुल दूध का 53 प्रतिशत दूध भैंस से आता है। इसके योगदान से आज हिंदुस्तान दुनिया का सबसे अधिक दूध उत्पादक देश है। उन्होंने कहा कि भैंस में एंब्रीयोट्रांसफर की बजाय क्लोनिंग तकनीक सबसे उत्तम है। केंद्रीय भैंस अनुसंधान संस्थान हिसार ने भी एनडीआरआई से क्लोनिंग सीखकर इस क्षेत्र में बेहतर कार्य किया है।
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कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा
डॉ. एके श्रीवास्तव ने कहा कि संकर नस्ल की वजह से देश के दूध उत्पादन में वृद्धि हुई है, लेकिन इस नस्ल के 50 प्रतिशत नर पशु समय से पहले ही बांझपन का शिकार हो जाते हैं। उन्होंने संकर नस्ल 40 से 70 प्रतिशत सांड कम गुणवत्तापूर्ण सीमन पैदा करता है, जोकि स्टोर करने के लायक नहीं होता। भारत में इस समय 140 मिलियन डोजिजन फ्रोजन सिमन की आवश्यकता, लेकिन 97 लाख डोज ही उपलब्ध है। इस कार्यशाला में इन्हीं महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की गई। डॉ. श्रीवास्तव ने कहा कि एनडीआरआई ने सार्क क्षेत्रीय केंद्र ढाका के सहयोग से पशु जैव प्रौद्योगिकी में आ रही विभिन्न प्रकार की समस्याओं सेे निपटने के लिए एक मंच प्रदान किया है।
इस अवसर पर डॉ. आरआरबी सिंह, संयुक्त निदेशक शैक्षणिक, डा. टीके दत्ता, डॉ. राकेश कुमार आदि मौजूद रहे।
सार्क क्षेत्र में डेयरी विकास के क्षेत्र में प्रमुख बाधाएं
1. बेहतर डेयरी पशु रोगाणु प्लाज्म और प्रजनन सुविधाओं की कमी
2. चारे की कमी
3. अपर्याप्त डेयरी पशु प्रबंधन कौशल
4. अपर्याप्त डेयरी विस्तार सेवाएं
5. सस्ती ऋण के लिए सीमित पहुंच
6. खराब विनियमित दूध खरीद और विपणन
7. अल्प प्रसंस्करण और मूल्य वर्धन
ये कदम उठाए जाने जरूरी
1. संरक्षण और संभावित डेयरी नस्लों के उपयोग
2. बिना पहचान के मवेशी और भैंस के आनुवंशिक सुधार
3. प्रजनन बैल की उपलब्धता में सुधार के लिए नीति को वापस खरीदने
4. कृत्रिम प्रजनन सुविधाओं की बढ़ाना
5. प्रजनन दक्षता का अनुकूलन
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डॉ. वीके तनेजा ने कहा कि दुनिया के दुधारू पशुओं की आबादी का 21 प्रतिशत डेयरी पशु सार्क देशों में हैं। दुनिया का 25 प्रतिशत गाय और भैंस, 15 प्रतिशत भेड़ व बकरी और 7 प्रतिशत ऊंट सार्क देशों के पास हैं। सार्क देशों में वर्ष 2011 के दौरान गाय का दुग्ध उत्पादन औसत 628 किलोग्राम वार्षिक था, जबकि भैंस के प्रति औसत दुग्ध उत्पादन 1258 किलो वार्षिक रहा है। प्रति वर्ष प्रति गाय दूध उत्पादकता पाकिस्तान में सबसे ज्यादा है और दूसरे नंबर पर भारत है। उन्होंने कहा कि न्यूक्लियर ट्रांसफर और क्लोनिंग एक जानवर से उसी प्रकार के कई जानवर पैदा करने की अनुमति देता है। मेल व फिमेल क्लोन का प्रजनन सामान्य जानवरों की तरह है और एनडीआरआई के वैज्ञानिकों ने उनकी क्षमता को सफलतापूर्वक सत्यापित किया है। उन्होंने कहा कि प्रजनन जैव प्रौद्योगिकी से पशुधन में जेनेटिक सुधार की प्रबल संभावनाएं हैं।
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भारत दुनिया का सबसे बड़ा दूध उत्पादक देश
केंद्रीय भैंस अनुसंधान संस्थान हिसार के निदेशक डॉ. इंद्रजीत सिंह ने कहा कि भारत में भैंस को काले सोने के रूप में जाना जाता है। कुल दूध का 53 प्रतिशत दूध भैंस से आता है। इसके योगदान से आज हिंदुस्तान दुनिया का सबसे अधिक दूध उत्पादक देश है। उन्होंने कहा कि भैंस में एंब्रीयोट्रांसफर की बजाय क्लोनिंग तकनीक सबसे उत्तम है। केंद्रीय भैंस अनुसंधान संस्थान हिसार ने भी एनडीआरआई से क्लोनिंग सीखकर इस क्षेत्र में बेहतर कार्य किया है।
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कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा
डॉ. एके श्रीवास्तव ने कहा कि संकर नस्ल की वजह से देश के दूध उत्पादन में वृद्धि हुई है, लेकिन इस नस्ल के 50 प्रतिशत नर पशु समय से पहले ही बांझपन का शिकार हो जाते हैं। उन्होंने संकर नस्ल 40 से 70 प्रतिशत सांड कम गुणवत्तापूर्ण सीमन पैदा करता है, जोकि स्टोर करने के लायक नहीं होता। भारत में इस समय 140 मिलियन डोजिजन फ्रोजन सिमन की आवश्यकता, लेकिन 97 लाख डोज ही उपलब्ध है। इस कार्यशाला में इन्हीं महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की गई। डॉ. श्रीवास्तव ने कहा कि एनडीआरआई ने सार्क क्षेत्रीय केंद्र ढाका के सहयोग से पशु जैव प्रौद्योगिकी में आ रही विभिन्न प्रकार की समस्याओं सेे निपटने के लिए एक मंच प्रदान किया है।
इस अवसर पर डॉ. आरआरबी सिंह, संयुक्त निदेशक शैक्षणिक, डा. टीके दत्ता, डॉ. राकेश कुमार आदि मौजूद रहे।
सार्क क्षेत्र में डेयरी विकास के क्षेत्र में प्रमुख बाधाएं
1. बेहतर डेयरी पशु रोगाणु प्लाज्म और प्रजनन सुविधाओं की कमी
2. चारे की कमी
3. अपर्याप्त डेयरी पशु प्रबंधन कौशल
4. अपर्याप्त डेयरी विस्तार सेवाएं
5. सस्ती ऋण के लिए सीमित पहुंच
6. खराब विनियमित दूध खरीद और विपणन
7. अल्प प्रसंस्करण और मूल्य वर्धन
ये कदम उठाए जाने जरूरी
1. संरक्षण और संभावित डेयरी नस्लों के उपयोग
2. बिना पहचान के मवेशी और भैंस के आनुवंशिक सुधार
3. प्रजनन बैल की उपलब्धता में सुधार के लिए नीति को वापस खरीदने
4. कृत्रिम प्रजनन सुविधाओं की बढ़ाना
5. प्रजनन दक्षता का अनुकूलन