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Karnal News: सजा के पहले की जेल, सजा के समान नहीं होनी चाहिए

Sun, 12 Apr 2026 02:05 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल Updated Sun, 12 Apr 2026 02:05 AM IST
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Imprisonment before sentence should not be equivalent to sentence itself
संवाद न्यूज एजेंसी
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करनाल। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश जसबीर सिंह कुंडू की अदालत ने साइबर अपराध के मामले में यूपी के बरेली निवासी आरोपी मोहम्मद साबू को नियमित जमानत दे दी है। आरोपी ने अगस्त, 2025 में शिकायतकर्ता की भाभी विभा गोयल को अमेरिका में व्हाट्सएप पर मैसेज भेजकर परिचित के अस्पताल में भर्ती होने का झांसा देकर दो बार में एक लाख रुपये की राशि बैंक खाते में डलवाई थी। जमानत मंजूर करते हुए अदालत ने कहा कि सजा से पहले की जेल, सजा के समान नहीं होनी चाहिए।

अदालत के फैसले के अनुसार, इंदिरा काॅलोनी निवासी सीमा गुप्ता ने साइबर थाना पुलिस को शिकायत दी थी कि मोहम्मद साबू ने अमेरिका निवासी भाभी विभा गोयल के पास व्हाट्सएप मैसेज भेजकर रिश्तेदार होने का झांसा दिया था। जानकार के अस्पताल में भर्ती होने का झूठ बोलकर आरोपी ने एक बार में 55 हजार और दूसरी बार में 45 हजार रुपये बैंक खाते में डलवा लिए थे।
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भाभी को ठगी का शक हुआ तो उन्हें बताया। जिस पर उन्होंने साइबर क्राइम पुलिस थाना में शिकायत दी। पुलिस ने धोखाधड़ी की धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की थी। आरोपी मोहम्मद साबू को गिरफ्तार कर 6 सितंबर, 2025 को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था।
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जांच के दाैरान साबू ने खुलासा किया कि उसने सह-आरोपी मोहम्मद तोसिफ के कहने पर गलत पते पर बैंक खाता खुलवाया था। बदले में उसे 35 हजार रुपये मिले थे। पुलिस ने तोसिफ को भी गिरफ्तार किया था। बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने तर्क दिया कि आरोपी को झूठा फंसाया गया है और जांच पूरी होने के कारण उसे अब जेल में रखने का कोई औचित्य नहीं है।
अदालत ने पाया कि मुख्य सह-आरोपी मोहम्मद तोसिफ को पहले ही पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय से जमानत दी जा चुकी है। मामले की जांच पूरी हो चुकी है और चालान अदालत में पेश किया जा चुका है। इसलिए अब पुलिस पूछताछ की आवश्यकता नहीं है।


रूपा सिंह बनाम पंजाब राज्य का दिया हवालाअदालत ने रूपा सिंह बनाम पंजाब राज्य मामले का हवाला देते हुए कहा कि सजा से पहले की जेल, सजा के समान नहीं होनी चाहिए। अदालत ने 50 हजार रुपये के मुचलके और इतनी ही राशि की एक जमानत पर रिहाई के आदेश दिए हैं। साथ ही कहा है कि आरोपी गवाहों को डराएगा या धमकाएगा नहीं। इसके अलावा प्रत्येक सुनवाई पर अदालत में उपस्थित रहना होगा। आरोपी जमानत के दौरान वह किसी भी अन्य आपराधिक गतिविधि में शामिल नहीं होगा। शर्तों का उल्लंघन करने पर अभियोजन पक्ष जमानत रद्द करने के लिए आवेदन कर सकता है।
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