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Karnal News: नई पीढ़ी को थैलेसीमिया से है बचाना तो जांच अवश्य कराना

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 08 May 2023 02:26 AM IST
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If you want to save the new generation from Thalassemia, then you must get it checked.
- माइनर थैलेसीमिक युवक-युवती के विवाह से मेजर थैलेसीमिया की बीमारी से ग्रसित संतान हो रही पैदा, विवाह से पहले कराएं जांच
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- 89 थैलेसीमिया से पीड़ित बच्चे जिले में लड़ रहे जिदंगी की जंग


अनुज शर्मा
करनाल। थैलेसीमिया से पीड़ित बच्चों की संख्या बढ़ रही है, इसकी वजह है माइनर थैलेसीमिक युवक-युवतियों के बीच हो रहा विवाह। ऐसे में अगर नई पीढ़ी को थैलेसीमिया जैसी गंभीर बीमारी से बचाना है तो कुंडली मिलाने के साथ ही एचबीए-2 (हीमोग्लोबिन ए-2) की जांच भी करानी होगी। जिससे संतान थैलेसीमिक नहीं हो। करनाल में इस वक्त 89 थैलेसीमिया के मरीज हैं, इनमें 34 लड़कियां और 55 लड़के हैं।
सिविल अस्पताल के ब्लड बैंक के इंचार्ज डॉ. संजय वर्मा ने बताया कि थैलेसीमिया बच्चों को उनके माता-पिता से मिलने वाला आनुवांशिक रोग है। जिसकी पहचान बच्चे के जन्म के तीन महीने बाद ही हो पाती है। यही वजह है कि लोगों को रक्त संबंधित इस गंभीर बीमारी के प्रति जागरूक होना बहुत जरूरी है। इस बीमारी का पता चलने के बाद भी इससे बचा नहीं जा सकता है। हंसने-खेलने की उम्र में बच्चे लाचार हो जाते हैं। बच्चे को लेकर माता-पिता ब्लड बैंक के चक्कर काटने को मजबूर हो जाते हैं।
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24.4 प्रतिशत रक्त थैलेसीमिक बच्चों को दिया गया
करनाल की बात करें तो सिविल अस्पताल के ब्लड बैंक में वर्ष 2022 में 8076 यूनिट ब्लड एकत्रित हुआ था। जिसका 24.4 प्रतिशत यानी 1971 यूनिट ब्लड अकेले थैलेसीमिया से पीड़ित बच्चों को दिया गया है। यह आंकड़ा एक बड़ी चिंता का विषय है।
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दो प्रकार का होता है ये रोग

एसएनसीयू विंग की इंचार्ज डॉ. निधि शर्मा ने बताया कि थैलेसीमिया दो प्रकार का होता है। पैदा होने वाले बच्चे के माता-पिता, दोनों के जींस में माइनर थैलेसीमिया है तो बच्चे में मेजर थैलेसीमिया हो सकता है। जो घातक है। अभिभावकों में से एक को माइनर थैलेसीमिया होने पर बच्चे को थैलेसीमिक होने की संभावना कम होती है। ऐसे में दो माइनर थैलेसीमिक के बीच विवाह रोका जाना चाहिए।

लक्षण और बचाव
थैलेसीमिया विंग की इंचार्ज पूनम शर्मा व ज्योति सचदेवा ने बताया कि बार-बार बीमार होना, सर्दी, जुकाम रहना, कमजोरी और उदास रहना, आयु के अनुसार शारीरिक विकास न होना, शरीर में पीलापन, दांत बाहर की ओर निकल आना, सांस लेने में तकलीफ होना इसके लक्षण हैं। कई तरह का संक्रमण भी होता है। इससे बचाव के लिए विवाह से पहले महिला-पुरुष रक्त की जांच कराएं, गर्भावस्था के दौरान इसकी जांच कराएं, मरीज का हीमोग्लोबिन 11 या 12 बनाए रखने की कोशिश करें, समय पर दवाएं लें और इलाज पूरा लें।



ब्लड ग्रुप अनुसार बच्चों पर एक नजर
ग्रुप मरीज
ए पॉजिटिव 13
ए नेगेटिव 02
बी पॉजिटिव 48
बी नेगेटिव 02
ओ पॉजिटिव 15
ओ नेगेटिव 01
एबी पॉजिटिव 08
कुल 89
(यह डाटा सिविल अस्पताल की थैलेसीमिया विंग से लिया गया है)
सिविल अस्पताल में स्थापित ब्लड बैंक प्रदेश का सबसे बेहतर ब्लड बैंक है। जहां पर डॉ. संजय वर्मा के नेतृत्व में डबल फिल्टर ब्लड मरीजों को उपलब्ध करवाकर जान बचाने का काम कर रहे हैं।
- डॉ. रेणु चावला, पीएमओ, सिविल अस्पताल, करनाल।
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