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मिलों में चावल कम मिला तो ब्याज सहित देनी होगी रकम
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राइस मिलों को दिए गए सरकारी धान के बदले सीएमआर के चावल की रिकवरी के मामले में 90 प्रतिशत से कम आपूर्ति करने वाले 77 राइस मिलों की जांच अभी जारी है। मंगलवार को सात में से सिर्फ तीन टीमों ने ही अपनी रिपोर्ट डीएफएससी कार्यालय को सौंपी है, जबकि राइस मिलों के लिए सीएमआर के चावल की आपूर्ति के लिए बुधवार को अंतिम तारीख है। इसी बीच में खाद्य एवं आपूर्ति विभाग ने कम चावल मिलने पर राइस मिलों से रिकवरी की नीति में बड़ा बदलाव किया है। इसके तहत अब डीएफएससी, राइस मिलों से सत्यापन के दौरान कम पाए गए चावलों की रिकवरी करने की बजाय अब चावल ना लेकर उसकी कीमत 12 प्रतिशत ब्याज के साथ वसूल करेगा।
अतिरिक्त उपायुक्त अशोक कुमार बंसल की ओेर से 41 राइस मिलों की फिजिकल वेरिफिकेशन रिपोर्ट उपायुक्त को सौंपे जाने के बाद अब निगाहें डीएफएसपी निशांत कुमार राठी द्वारा गठित सात टीमों की जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं। यह टीमें अब 90 प्रतिशत से कम चावल आपूर्ति करने वाले जिले के 77 राइस मिलों का फिजकिल वेरिफिकेशन कर रही हैं। मंगलवार को सात में से तीन टीमों ने 25 राइस मिलों की रिपोर्ट सौंपी है, जिसमें एक राइस मिल पर तो ताला लगा मिला, हालांकि राइस मिलर्स ने फोन कर विभागीय अधिकारियों को बताया है कि उसके परिवार में एक दुखद घटना हो जाने के कारण राइस मिल बंद है, दो दिन बाद जांच करा देंगे। वहीं सूत्रों के अनुसार मंगलवार को चंडीगढ़ में हुई विभाग की उच्च स्तरीय बैठक में जांच प्रक्रिया के बीच ही विभाग ने चावल की रिकवरी की रणनीति को बदल दिया है। जिला खाद्य एवं आपूर्ति नियंत्रक (डीएफएससी) निशांत कुमार राठी ने बताया कि जिस राइस मिल को जितना धान दिया गया है, उसके 67 प्रतिशत की दर से चावल लेना है। जांच में जिस राइस मिल पर जितना चावल उपलब्ध मिलेगा, उसे तो लिया जाएगा लेकिन जितना चावल कम मिलेगा। उसकी रिकवरी चावल के रूप में नहीं की जाएगी, बल्कि कम चावल की कीमत ब्याज समेत वसूल की जाएगी। उदाहरण के तौर पर किसी राइस मिल को 100 क्विंटल चावल देना था, उसके पास अभी 80 क्विंटल ही चावल मिला है, तो 20 क्विंटल जो चावल कम है, उसके बदले चावल नहीं लिया जाएगा बल्कि डीएफएससी का जो चावल रेट है 3200 या 3300 रुपये प्रति क्विंटल, इसी दर से चावल की कीमत वसूली जाएगी, वह भी 12 प्रतिशत ब्याज के साथ।
उपायुक्त ने कार्रवाई के लिए शासन को भेजी रिपोर्ट
-अतिरिक्त उपायुक्त अशोक कुमार बंसल ने जो रिपोर्ट उपायुक्त को सौंपी है, उसे उपायुक्त ने अतिरिक्त मुख्य सचिव (खाद्य) को भेज दिया है। इस रिपोर्ट में 13 राइस मिलों में स्थिति असामान्य पाई गई थी। पांच राइस मिलों में चावल कम मिले थे तो आठ में अधिक मिले थे। एक राइस मिल ने अभिलेख नहीं दिखाए थे तो दूसरा बंद मिला था। इसमें अब शासन स्तर से ही कार्रवाई किया जाना प्रस्तावित है।
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राइस मिलों की संपत्ति होगी अटैच
-डीएफएससी निशांत कुमार राठी ने प्रथम दृष्टया जांच में जिन राइस मिलों में चावल कम पाए गए थे। उनकी संपत्ति अटैच करने के लिए रिपोर्ट उपायुक्त को भेजी है। उपायुक्त स्तर से इन राइस मिलों की संपत्ति को डीएफएससी विभाग से अटैच करने की कार्रवाई की जानी है।
आज खत्म हो रही चावल आपूर्ति की समय सीमा, बढ़ सकती है तारीख
डिप्टी डायरेक्टर (खाद्य एवं आपूर्ति) डा.घनश्याम दास ने लिखी भारत सरकार को चिट्ठी
करनाल। हरियाणा सरकार द्वारा राइस मिलों को दिए गए धान के बदले चावल की आपूर्ति करने की अंतिम तिथि बुधवार की शाम को खत्म हो रही है। करनाल ही नहीं बल्कि हरियाणा राज्यभर की राइस मिलर्स एसोसिएशन ने खाद्य एवं आपूर्ति विभाग से समय सीमा बढ़ाने की मांग की है, जिसके बाद विभाग के डिप्टी डायरेक्टर डा. घनश्याम दास नेे समय सीमा बढ़ाने के लिए भारत सरकार को पत्र लिख दिया है। इसमें 30 अगस्त तक का समय दिए जाने की बात कही गई है।
हरियाणा सरकार ने करनाल के 313 राइस मिल समेत हरियाणा राज्य के करीब 1300 राइस मिलों को धान दिया था। जिसके बदले 67 फीसदी रिकवरी के आधार पर राइस मिलों को 30 जून तक चावल सरकार को देना था। लेकिन लॉकडाउन व लेबर की अनुपलब्धता के कारण 15 जुलाई तक चावल की आपूर्ति करने का समय बढ़ा दिया था, जो अब बुधवार को खत्म हो रहा है लेकिन करनाल जिले के करीब 77 राइस मिलों की आपूर्ति 90 प्रतिशत से काफी कम है। जिनकी जांच तो चल रही है लेकिन डिप्टी डायरेक्टर डा.घनश्याम दास ने बताया कि यह खाद्य पदार्थ है, जिसकी प्रक्रिया लंबी होती है। वैसे भी लॉकडाउन से राइस मिल भी प्रभावित हुए हैं। इसलिए राइस मिलों को चावल की आपूर्ति देने के लिए 30 अगस्त तक का समय दिए केंद्र सरकार को चिट्ठी लिख दी है। उम्मीद है कि शीघ्र ही समय सीमा को आगे बढ़ा दिया जाएगा। रही बात राइस मिलों में चावल के कम होने की तो ऐसी स्थिति काफी कम है, करीब 92 प्रतिशत चावल की आपूर्ति कर दी गई है, सिर्फ आठ फीसदी ही चावल शेष है।
-हरियाणा राइस मिलर्स एसोसिएशन के कई वरिष्ठ पदाधिकारियों ने डिप्टी डायरेक्टर (फूड एंड सप्लाई) से बातचीत की है, उन्होंने अवशेष चावल की आपूर्ति के लिए समय सीमा बढ़ाने के लिए भारत सरकार को पत्र लिख दिया है। उम्मीद है कि शीघ्र ही राइस मिलों को कुछ और मोहलत मिल जाएगी। उम्मीद है कि यदि 30 अगस्त तक नहीं मिली तो 30 जुलाई तक तो मिल ही जाएगी। विभागीय अधिकारियों ने इसके लिए आश्वस्त भी किया है।
-विनोद गोयल, उप प्रधान-हरियाणा राइस मिलर्स एसोसिएशन।
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अतिरिक्त उपायुक्त अशोक कुमार बंसल की ओेर से 41 राइस मिलों की फिजिकल वेरिफिकेशन रिपोर्ट उपायुक्त को सौंपे जाने के बाद अब निगाहें डीएफएसपी निशांत कुमार राठी द्वारा गठित सात टीमों की जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं। यह टीमें अब 90 प्रतिशत से कम चावल आपूर्ति करने वाले जिले के 77 राइस मिलों का फिजकिल वेरिफिकेशन कर रही हैं। मंगलवार को सात में से तीन टीमों ने 25 राइस मिलों की रिपोर्ट सौंपी है, जिसमें एक राइस मिल पर तो ताला लगा मिला, हालांकि राइस मिलर्स ने फोन कर विभागीय अधिकारियों को बताया है कि उसके परिवार में एक दुखद घटना हो जाने के कारण राइस मिल बंद है, दो दिन बाद जांच करा देंगे। वहीं सूत्रों के अनुसार मंगलवार को चंडीगढ़ में हुई विभाग की उच्च स्तरीय बैठक में जांच प्रक्रिया के बीच ही विभाग ने चावल की रिकवरी की रणनीति को बदल दिया है। जिला खाद्य एवं आपूर्ति नियंत्रक (डीएफएससी) निशांत कुमार राठी ने बताया कि जिस राइस मिल को जितना धान दिया गया है, उसके 67 प्रतिशत की दर से चावल लेना है। जांच में जिस राइस मिल पर जितना चावल उपलब्ध मिलेगा, उसे तो लिया जाएगा लेकिन जितना चावल कम मिलेगा। उसकी रिकवरी चावल के रूप में नहीं की जाएगी, बल्कि कम चावल की कीमत ब्याज समेत वसूल की जाएगी। उदाहरण के तौर पर किसी राइस मिल को 100 क्विंटल चावल देना था, उसके पास अभी 80 क्विंटल ही चावल मिला है, तो 20 क्विंटल जो चावल कम है, उसके बदले चावल नहीं लिया जाएगा बल्कि डीएफएससी का जो चावल रेट है 3200 या 3300 रुपये प्रति क्विंटल, इसी दर से चावल की कीमत वसूली जाएगी, वह भी 12 प्रतिशत ब्याज के साथ।
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उपायुक्त ने कार्रवाई के लिए शासन को भेजी रिपोर्ट
-अतिरिक्त उपायुक्त अशोक कुमार बंसल ने जो रिपोर्ट उपायुक्त को सौंपी है, उसे उपायुक्त ने अतिरिक्त मुख्य सचिव (खाद्य) को भेज दिया है। इस रिपोर्ट में 13 राइस मिलों में स्थिति असामान्य पाई गई थी। पांच राइस मिलों में चावल कम मिले थे तो आठ में अधिक मिले थे। एक राइस मिल ने अभिलेख नहीं दिखाए थे तो दूसरा बंद मिला था। इसमें अब शासन स्तर से ही कार्रवाई किया जाना प्रस्तावित है।
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राइस मिलों की संपत्ति होगी अटैच
-डीएफएससी निशांत कुमार राठी ने प्रथम दृष्टया जांच में जिन राइस मिलों में चावल कम पाए गए थे। उनकी संपत्ति अटैच करने के लिए रिपोर्ट उपायुक्त को भेजी है। उपायुक्त स्तर से इन राइस मिलों की संपत्ति को डीएफएससी विभाग से अटैच करने की कार्रवाई की जानी है।
आज खत्म हो रही चावल आपूर्ति की समय सीमा, बढ़ सकती है तारीख
डिप्टी डायरेक्टर (खाद्य एवं आपूर्ति) डा.घनश्याम दास ने लिखी भारत सरकार को चिट्ठी
करनाल। हरियाणा सरकार द्वारा राइस मिलों को दिए गए धान के बदले चावल की आपूर्ति करने की अंतिम तिथि बुधवार की शाम को खत्म हो रही है। करनाल ही नहीं बल्कि हरियाणा राज्यभर की राइस मिलर्स एसोसिएशन ने खाद्य एवं आपूर्ति विभाग से समय सीमा बढ़ाने की मांग की है, जिसके बाद विभाग के डिप्टी डायरेक्टर डा. घनश्याम दास नेे समय सीमा बढ़ाने के लिए भारत सरकार को पत्र लिख दिया है। इसमें 30 अगस्त तक का समय दिए जाने की बात कही गई है।
हरियाणा सरकार ने करनाल के 313 राइस मिल समेत हरियाणा राज्य के करीब 1300 राइस मिलों को धान दिया था। जिसके बदले 67 फीसदी रिकवरी के आधार पर राइस मिलों को 30 जून तक चावल सरकार को देना था। लेकिन लॉकडाउन व लेबर की अनुपलब्धता के कारण 15 जुलाई तक चावल की आपूर्ति करने का समय बढ़ा दिया था, जो अब बुधवार को खत्म हो रहा है लेकिन करनाल जिले के करीब 77 राइस मिलों की आपूर्ति 90 प्रतिशत से काफी कम है। जिनकी जांच तो चल रही है लेकिन डिप्टी डायरेक्टर डा.घनश्याम दास ने बताया कि यह खाद्य पदार्थ है, जिसकी प्रक्रिया लंबी होती है। वैसे भी लॉकडाउन से राइस मिल भी प्रभावित हुए हैं। इसलिए राइस मिलों को चावल की आपूर्ति देने के लिए 30 अगस्त तक का समय दिए केंद्र सरकार को चिट्ठी लिख दी है। उम्मीद है कि शीघ्र ही समय सीमा को आगे बढ़ा दिया जाएगा। रही बात राइस मिलों में चावल के कम होने की तो ऐसी स्थिति काफी कम है, करीब 92 प्रतिशत चावल की आपूर्ति कर दी गई है, सिर्फ आठ फीसदी ही चावल शेष है।
-हरियाणा राइस मिलर्स एसोसिएशन के कई वरिष्ठ पदाधिकारियों ने डिप्टी डायरेक्टर (फूड एंड सप्लाई) से बातचीत की है, उन्होंने अवशेष चावल की आपूर्ति के लिए समय सीमा बढ़ाने के लिए भारत सरकार को पत्र लिख दिया है। उम्मीद है कि शीघ्र ही राइस मिलों को कुछ और मोहलत मिल जाएगी। उम्मीद है कि यदि 30 अगस्त तक नहीं मिली तो 30 जुलाई तक तो मिल ही जाएगी। विभागीय अधिकारियों ने इसके लिए आश्वस्त भी किया है।
-विनोद गोयल, उप प्रधान-हरियाणा राइस मिलर्स एसोसिएशन।