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करनाल में ब्लैक फंगस के मरीज बढ़े तो कम पड़ने लगी सुविधाएं

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 06 Jun 2021 12:18 PM IST
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If the patient increases than facilities start decreasing
कोरोना के बाद अब ब्लैक फंगस पांव पसारने लगा है। ऐसे में कल्पना चावला राजकीय मेडिकल कॉलेज में सुविधाएं कम पड़ने लगी हैं। मेडिकल कॉलेज रेफर सेंटर बन गया है। अभी तक जिले में 101 ब्लैक फंगस के मरीज सामने आ चुके हैं। इनमें से 19 मरीजों को रेफर किया गया है। 16 मरीजों की मौत भी हो चुकी है।
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मेडिकल कॉलेज का कहना है कि ब्लैक फंगस के मरीज का ऑपरेशन करने के लिए उनके पास एक स्पेशल उपकरण नहीं है। इस कारण मरीजों को रेफर किया जा रहा है। वहीं दूसरी ओर मरीजों की संख्या इतनी बढ़ गई है कि उन्हें लाइपोसेमल एमफोटेरेसिन बी की डोज भी पूरी नहीं मिली रही है। हालांकि 12 मरीज ठीक होकर अपने घर भी चले गए हैं। फिलहाल मेडिकल कॉलेज में 95 मरीजों को इलाज चल रहा है।
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500 सैंपलों की हो चुकी है जांच
मेडिकल कॉलेज में अभी तक ब्लैक फंगस के 500 संदिग्ध मरीजों के सैंपलों की जांच हो चुकी है। इनमें से 106 मरीज पॉजिटिव आए हैं। चार मरीज करनाल के बाहर से है। इस कारण जिले में 101 मरीज का ही आंकड़ा जोड़ा गया है। मेडिकल कॉलेज में कुरुक्षेत्र, कैथल, यमुनानगर, अंबाला व पंचकूला के मरीजों का भी इलाज चल रहा है। यही कारण है कि मेडिकल कॉलेज प्रबंधक को मरीजों की जानकारी उच्च अधिकारियों को भेजनी पकड़ती है इसके बाद ही वहां से टीके आते हैं।
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वजन के हिसाब से औसतन लगती है चार डोज
डॉक्टरों का कहना है कि ब्लैक फंगस के मरीजों को लाइपोसेमल एमफोटेरेसिन बी टीके की डोज वजन के हिसाब से लगती है। औसतन वजन की बात करें तो एक व्यक्ति को दिन में चार डोज लगती है लेकिन मेडिकल कॉलेज में यह पूरी डोज नहीं लग रही है। शुरुआती दिनों में तो तीन से चार दिनों में मरीज को टीका लग रहा था।
आंख और जबड़ा निकाला फिर भी ऑपरेशन के बाद हो गई मौत
गांव राहड़ा निवासी विनोद ने बताया कि उसके पिता बिसंबर के मेडिकल कॉलेज में दो बार सैंपल लिए गए थे। इस दौरान उसके पिता के चेहरे पर सूजन आ गई थी। 25 मई को उसके पिता की रिपोर्ट आई तो 26 तो ऑपरेशन हुआ। उनकी आंख व जबड़ा निकाला गया लेकिन उसके खून बंद नहीं हुआ और जब वह अपने पिता के पास गया था तो वेंटिलेटर भी बंद था। 20 मई से 30 मई तक उसके पिता को एक ही टीका लगा था।
पीजीआई में हुआ ऑपरेशन, मेडिकल कॉलेज ने कर दिया था रेफर
गांव राहड़ा निवासी लाभ सिंह ने बताया कि उसका भाई पवन रोडवेज में ड्राइवर है। वह दस से 15 दिन तक मेडिकल कॉलेज में ही दाखिल था। जब उसका डॉक्टरों ने कहा कि पवन का ऑपरेशन करना पड़ेगा क्योंकि ब्लैक फंगस उसकी आंख के नीचे थे। इसके लिए उन्होंने रोहतक पीजीआई रेफर कर दिया। वहां उसका ऑपरेशन हुआ है।

मेडिकल कॉलेज में ब्लैक फंगस के मरीजों को लिए पूरी सुविधा है। ईएनटी विभाग के पास एक स्पेशल उपकरण नहीं है। इस कारण कुछ मरीजों को रेफर किया गया है। इस उपकरण की डिमांड सरकार को भेजी हुई है। मेडिकल कॉलेज में भी ऑपरेशन किए जा रहे हैं अभी तक करीब सात ऑपरेशन हो चुके हैं। इससे अलग 12 मरीजों को ठीक कर घर भी भेज दिया गया है।
डॉ. जगदीश दुरेजा, निदेशक, कल्पना चावला राजकीय मेडिकल कॉलेज, करनाल।
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