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Karnal News: बिना मंगवाए घर आ जाए सामान तो हो जाएं सावधान.. ये है ठगी का नया पैंतरा

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 07 Oct 2025 01:32 AM IST
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If goods arrive at your home without being ordered, be careful. This is a new trick of fraud.
केस-1
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घर पर आ गया मोबाइल फोन, कट गए 15 हजार रुपये
रामनगर के अंकित ने बताया कि उनके घर पर मोबाइल फोन का ऑर्डर डिलिवरी के लिए आया। घर से उन्हें कॉल करके ऑर्डर के बारे में पूछा गया तो उन्होंने मना कर दिया। इसके बाद आरोपी ने कैंसिल करने के नाम पर उनसे ओटीपी मांग लिया। इसे देने के बाद शाम तक उनके बैंक खाते से 15 हजार रुपये कट गए। अच्छी बात यह थी कि उस समय बैंक बैलेंस कम था।


केस-2

प्रेस के नाम पर 250 रुपये लेकर दे गया खाली बॉक्स
सेक्टर-4 निवासी रजनी ने बताया कि उनके घर पर भी बिना मंगवाए ऑर्डर आया था। उन्होंने चेक किया तो आरोपी ने 250 रुपये नकद मांग और प्रेस होने का दावा किया। मना करने पर आरोपी ने पहले ऑर्डर कैंसिल करने के लिए ओटीपी मांगा। उन्होंने ओटीपी न देकर रुपये दे दिए और ऑर्डर ले लिया। चेक करने पर वह खाली बॉक्स मिला। अच्छा यह हुआ कि ओटीपी नहीं दिया वरना ठगी हो जाती।
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करनाल। बिना मंगवाए अगर घर पर कोई सामान ऑनलाइन आ जाए तो सावधान हो जाएं। यह साइबर ठगी का नया पैंतरा है। सामान देने जो व्यक्ति आपके घर पहुंच रहा है वह किसी कंपनी या डिजिटल मार्केट का डिलिवरी बॉय नहीं है, वह साइबर ठगों का गुर्गा हो सकता है। वह आपसे ऑर्डर रद्द करने के नाम पर ओटीपी मांगेगा। जैसे ही आप ओटीपी बताएंगे, उसके बाद बैंक खाते से रुपये कटना शुरू हो जाएंगे। त्योहारी सीजन में इस तरह से ठगी की शिकायतें आ रही हैं।
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इस वर्ष में होली के बाद अब नवरात्र और दिवाली की सेल में कई मामले इस तरह से धोखाधड़ी के सामने आ चुके हैं। पिछले साल भी त्योहारों में अलग-अलग तरीके से साइबर ठगी के 18 मामले सामने आए थे। जिसमें किसी का मोबाइल हैक किया गया था तो किसी के घर पर खाली बॉक्स की डिलिवरी हुई थी। इसके अलावा खराब आयटम भी भेजे गए थे। ऐसे हर मामले में लोगों के रुपये डूबे थे। इस वर्ष अब तक 141 साइबर ठगी के केस साइबर थाना में दर्ज हो चुके हैं। पिछले दिनों ऑनलाइन सेल के नाम पर भी लोगों को धोखाधड़ी का शिकार बनाया गया था।

साइबर थाना प्रभारी संजय कुमार कहना है कि अब तक की जांच में सामने आया है कि इस तरह की ठगी के लिए ऑनलाइन खुद मंगवाए गए सामान के बॉक्स या पेकिंग के फेंकने के बाद ही नाम, पता और मोबाइल नंबर आदि की जानकारी साइबर ठगों तक पहुंचती है। क्योंकि सामान आने के बाद जो बॉक्स या पैकिंग लोग फेंक देते हैं या कबाड़ी को दे देते हैं, उसके ऊपर लगा क्यूआर कोड व पर्ची को नहीं हटाते। इसी से ही जानकारी लीक होती है।

कैश ऑन डिलिवरी बताकर लाते हैं पार्सल

साइबर एक्सपर्ट प्रदीप नैन के अनुसार, अमेजन, फ्लीपकार्ट, मिंतरा आदि का डिलिवरी बॉय बनकर युवक घर आता है। और कहता है कि आपका पार्सल आया है और यह कैश ऑन डिलिवरी है। इसके बाद लोग जब कहते हैं कि उन्होंने ऑर्डर नहीं किया तो इसे कैंसिल करने के नाम पर ओटीपी मांगा जाता है। आरोपी के पास पता, नाम और मोबाइल नंबर पहले से होता है।





जो ऑर्डर खुद न किया हो और उसकी डिलिवरी घर पर हो जाए तो उसे न तो रिसीव करें और न ही कैंसिल करें। इससे भी साइबर ठगी हो सकती है। क्योंकि एक ओटीपी देने के बाद आरोपी मोबाइल फोन या बैंक खाते का नियंत्रण अपने पास ले सकता है। ऐसा कोई भी दस्तावेज जिस पर निजी जानकारी लिखी हो उसे भी बिना जानकारी हटाए फेंकना नहीं चाहिए। - गंगाराम पूनिया, एसपी करनाल
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