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फसल अवशेष जलाए तो लगेगा 15 हजार रुपये जुर्माना
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करनाल। फसल अवशेष प्रबंधन के समुचित निपटान की जागरूकता को लेकर कृषि विभाग का प्रचार वाहन जिले के हर गांव और गली में दस्तक देगा। ताकि किसान अवशेषों को न जलाकर पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य को होने वाले नुकसानों से बचाए। फिर भी कोई अवशेष जलाएगा तो उसे आग लगाने की प्रति घटना पर 15 हजार रुपये तक जुर्माने का भुगतान करना पड़ेगा। साथ ही जमीन की सेहत से जो खिलवाड़ होगा, उससे होने वाली दिक्कतों से उसे भविष्य में जूझना पड़ेगा।
कृषि एवं किसान कल्याण विभाग की ओर से जागरूकता के लिए छह प्रचार वाहन तैयार किए गए हैं। जिन्हें शुक्रवार को उपायुक्त निशांत कुमार यादव ने विभाग के कार्यालय से हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। उपायुक्त ने कहा कि किसान फसल अवशेषों का समुचित प्रबंधन करने के लिए आधुनिक कृषि यंत्रों का उपयोग करें। पंचायतों को हैप्पी सीडर, एमबी प्लो, रोटावेटर और मल्चर जैसे कृषि यंत्र दिए जा रहे हैं। कोई भी किसान जरूरत अनुसार पहले आओ-पहले पाओ के आधार पर अपना ट्रैक्टर लाकर निशुल्क खेत में ले जा सकता है।
ये है जुर्माने का प्रावधान
अगर कोई फसल अवशेष जलाया पाया जाता है तो वह पर्यावरण के नुकसान की भरपाई देने के लिए उत्तरदायी होगा। 2 एकड़ भूमि तक 2500 रुपये प्रति एकड़ घटना, 2 से 5 एकड़ भूमि तक 5 हजार रुपये प्रति घटना, 5 एकड़ से ज्यादा भूमि 15 हजार रुपये प्रति एकड़ घटना का प्रावधान है। उपायुक्त ने कहा कि मानव स्वास्थ्य से जुड़े इस मुद्दे को लेकर अब सर्वोच्च न्यायालय, एनजीटी और प्रदूषण नियंत्रण विभाग गंभीर है। भारी जुर्माना और सजा का प्रावधान भी है।
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तो प्रति एकड़ है एक हजार रुपये का अनुदान
उप कृषि निदेशक डॉ. आदित्य प्रताप डबास ने बताया कि पराली को मशीन से काटकर पशुओं का चारा बनाना, पराली को गत्ता मिल में बेचकर धन कमाना, पराली को कंपोस्टिंग करके जैविक खाद बनाना और खुंदों को काटने या जलाने के बजाए जीरो टीलेज मशीनों द्वारा सीधी बिजाई करना प्रबंधन में शामिल है। पराली की गांठें बनाने पर प्रति एकड़ 1 हजार रुपये का अनुदान दिया जा रहा है।
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कृषि एवं किसान कल्याण विभाग की ओर से जागरूकता के लिए छह प्रचार वाहन तैयार किए गए हैं। जिन्हें शुक्रवार को उपायुक्त निशांत कुमार यादव ने विभाग के कार्यालय से हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। उपायुक्त ने कहा कि किसान फसल अवशेषों का समुचित प्रबंधन करने के लिए आधुनिक कृषि यंत्रों का उपयोग करें। पंचायतों को हैप्पी सीडर, एमबी प्लो, रोटावेटर और मल्चर जैसे कृषि यंत्र दिए जा रहे हैं। कोई भी किसान जरूरत अनुसार पहले आओ-पहले पाओ के आधार पर अपना ट्रैक्टर लाकर निशुल्क खेत में ले जा सकता है।
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ये है जुर्माने का प्रावधान
अगर कोई फसल अवशेष जलाया पाया जाता है तो वह पर्यावरण के नुकसान की भरपाई देने के लिए उत्तरदायी होगा। 2 एकड़ भूमि तक 2500 रुपये प्रति एकड़ घटना, 2 से 5 एकड़ भूमि तक 5 हजार रुपये प्रति घटना, 5 एकड़ से ज्यादा भूमि 15 हजार रुपये प्रति एकड़ घटना का प्रावधान है। उपायुक्त ने कहा कि मानव स्वास्थ्य से जुड़े इस मुद्दे को लेकर अब सर्वोच्च न्यायालय, एनजीटी और प्रदूषण नियंत्रण विभाग गंभीर है। भारी जुर्माना और सजा का प्रावधान भी है।
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तो प्रति एकड़ है एक हजार रुपये का अनुदान
उप कृषि निदेशक डॉ. आदित्य प्रताप डबास ने बताया कि पराली को मशीन से काटकर पशुओं का चारा बनाना, पराली को गत्ता मिल में बेचकर धन कमाना, पराली को कंपोस्टिंग करके जैविक खाद बनाना और खुंदों को काटने या जलाने के बजाए जीरो टीलेज मशीनों द्वारा सीधी बिजाई करना प्रबंधन में शामिल है। पराली की गांठें बनाने पर प्रति एकड़ 1 हजार रुपये का अनुदान दिया जा रहा है।