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Karnal News: गाय की संकर नस्ल 'फ्रेजवाल' हो रही तैयार, दुग्ध उत्पादन में बनेगी मिसाल

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 26 Nov 2023 02:55 AM IST
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Hybrid breed of cow 'Freshwal' is getting ready, will become an example in milk production.
देव शर्मा
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करनाल। दूध उत्पादन बढ़ाने के लिए जिस कामधेनु स्वरूपा गाय की नस्ल तैयारी में देशभर के वैज्ञानिक पिछले साढ़े तीन दशक से जुटे हैं, उसका इंतजार जल्द खत्म होने वाला है। इसके तहत एक ऐसी गाय की संकर नस्ल तैयार की जा रही है जो दूध उत्पादन की दुनिया में क्रांति लाएगी। वैज्ञानिकों के अनुसार, अभी इसका कोई नाम नहीं रखा गया है, लेकिन फिलहाल इसे ''फ्रेजवाल'' के नाम से बुलाते हैं।
ये देशी गाय साहीवाल और यूरोपीय देश हालैंड की गाय हालेस्ट्रन का क्रास है। इसमें हॉलेस्ट्रन 62.5 प्रतिशत और साहीवाल 38.5 प्रतिशत है। अब तक नई नस्ल की गाय के 1.5 लाख बच्चे भी सामने आ चुके हैं, जिनसे पहले ब्यांत में ही 4500 से 7000 लीटर दूध प्राप्त किया गया है, जबकि फिलहाल औसत लक्ष्य तीन से चार हजार लीटर तक निर्धारित है।
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केंद्रीय गोवंश अनुसंधान संस्थान (सीआईआरसी) मेरठ के निदेशक डॉ. एके मोहंती ने करनाल स्थित राष्ट्रीय पशु अनुवांशिकी संसाधन ब्यूरो (एनबीएजीआर) में अमर उजाला से विशेष बातचीत में बताया कि वर्ष 2023 में देशभर में गाय और भैंस की संख्या 303 मिलियन है। देश में कुल दूध उत्पादन 2022 में 210 मिलियन टन था, जो 2023 में बढ़कर 221.1 मिलियन मीट्रिक टन पर पहुंच गया है। जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों के बीच अब सर्वाधिक दुधारू देशी गाय की संकर नस्ल पर शोध चल रहा है।
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इसके लिए ऑल इंडिया कोआर्डिनेटर रिसर्च प्रोजेक्ट (एआईसीआरपी) शुरू किया गया है, जिसमें दूध बढ़ाने के लिए विशेष तौर पर साहीवाल, गिर, कंकरेज, थारपारकर, राठी और लदाखी देशी गायों पर अलग-अलग संस्थानों में शोध चल रहा है। इनमें एनडीआरआई करनाल, बाल गंगाधर तिलक विश्वविद्यालय यानी गढ़मास यूनिवर्सिटी, लाला लाजपत राय पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय हिसार, जीबी पंत विश्वविद्यालय पंतनगर में जीनोम तकनीक सहित कई तरह के शोध व फील्ड टेस्टिंग के कार्य चल रहे हैं। इसके अलावा कंकरेज पर दंतेवाड़ा कृषि विश्वविद्यालय गुजरात, गिर पर जूनागढ़ कृषि विश्वविद्यालय गुजरात में शोध चल रहा है कि इन नस्लों में कितना दूध बढ़ाया जा सकता है।

सीआईआरसी मेरठ के निदेशक डॉ. मोहंती ने बताया कि सर्वाधिक महत्वपूर्ण शोध में अब वैज्ञानिकों को सफलता मिलने के करीब है, जिसमें 35 सालों से अनुसंधान चल रहा है। इसके तहत एक ऐसी गाय की नस्ल तैयार की जा रही है जो दूध उत्पादन की दुनिया में क्रांति ला दे। अभी तक इसके 18 सेट टेस्ट हो चुके हैं। इसके नतीजे चौंकाने वाले हैं, क्योंकि इनसे पहले ब्यांत में ही 4500 से 7000 लीटर तक दूध प्राप्त किया गया है।

इनकी टेस्टिंग किसानों के घरों पर भी हो रही हैं। टेस्ट पूरे होने के बाद औसत दूध निकाला जाएगा। इसके बाद इसकी नस्ल घोषित की जाएगी। संभावना है कि साल 2024 तक ये शोध पूरा हो जाएगा और सर्वाधिक दूध देने वाली इस गाय की नस्ल को देश के पशुपालकों तक पहुंचाया जा सकेगा।



किस गाय में कितना बढ़ा दूध

डॉ. मोहंती के अनुसार, 15 साल पहले गिर नस्ल की गाय का दूध 1800 लीटर प्रति ब्यांत था जो अब 2023 में 2500 लीटर प्रति ब्यांत हो चुका है। इसी तरह कंकरेज का 1600 से 2400, साहीवाल का 1500 से 2200 लीटर हो चुका है। कुल मिलाकर औसत स्थिति देखें तो गायों में पिछले डेढ़ दशक के दौरान 40 प्रतिशत दूध उत्पादन बढ़ाया गया है। फिलहाल लक्ष्य 3000 से 4000 लीटर का है।
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