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Karnal News: अरे द्वारपालों कन्हैया से कह दो, दर पे... भजन पर झूमे
Sat, 23 Nov 2024 05:20 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
Updated Sat, 23 Nov 2024 05:20 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। चांद एन्कलेव सोसाइटी की ओर चल रही श्रीमद्भागवत कथा के सातवें दिन शुक्रवार को आचार्य मिथलेश नंदन ने सुदामा चरित्र व परीक्षित मोक्ष का वर्णन किया। इस दौरान उन्होंन राधा का भी श्याम बोलो मीरा का भी श्याम और अरे द्वारपालों कन्हैया से कह दो, दर पे सुदामा गरीब... भजन गाकर सभी को भावविभाेर कर दिया।
आचार्य ने बताया कि सुदामा भगवान श्रीकृष्ण के परम मित्र थे। भिक्षा मांगकर अपने परिवार का पालन पोषण करते थे। गरीबी के बावजूद भी हमेशा भगवान के ध्यान में लगे रहते। उनकी पत्नी सुदामा से बार बार आग्रह करती कि आपके मित्र तो द्वारकाधीश हैं, उनसे जाकर मिलो शायद वह हमारी मदद कर दें।
सुदामा पत्नी के बार बार कहने पर द्वारका पहुंचते हैं और जब द्वारपाल भगवान कृष्ण को बताते हैं कि सुदामा नाम का कोई गरीब ब्राह्मण आपका दोस्त बता रहा हैं। यह सुनकर कृष्ण नंगे पैर दौडक़र आते हैं और अपने मित्र को गले से लगा लेते उनकी दीन दशा देखकर कृष्ण के आंखों से आंसुओं की धारा बहने लगती है। सिंहासन पर बैठाकर कृष्ण सुदामा के चरण धोते हैं।
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सुदामा विदा लेकर अपने स्थान पर लौटते हैं तो भगवान कृष्ण की कृपा से अपने यहां महल बना पाते हैं, लेकिन सुदामा अपनी कुटिया में रहकर भगवान का सुमिरन करते हैं। उन्होंने कहा कि श्रीमद् भागवत कथा श्रवण से जीव का मोक्ष का रास्ता प्रशस्त होता है। इस मौके पर प्रधान रमेश जिंदल, सचिव सत्यदेव शर्मा, सुरेंद्र पाल शर्मा व राजीव गुप्ता आदि मौजूद रहे।
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करनाल। चांद एन्कलेव सोसाइटी की ओर चल रही श्रीमद्भागवत कथा के सातवें दिन शुक्रवार को आचार्य मिथलेश नंदन ने सुदामा चरित्र व परीक्षित मोक्ष का वर्णन किया। इस दौरान उन्होंन राधा का भी श्याम बोलो मीरा का भी श्याम और अरे द्वारपालों कन्हैया से कह दो, दर पे सुदामा गरीब... भजन गाकर सभी को भावविभाेर कर दिया।
आचार्य ने बताया कि सुदामा भगवान श्रीकृष्ण के परम मित्र थे। भिक्षा मांगकर अपने परिवार का पालन पोषण करते थे। गरीबी के बावजूद भी हमेशा भगवान के ध्यान में लगे रहते। उनकी पत्नी सुदामा से बार बार आग्रह करती कि आपके मित्र तो द्वारकाधीश हैं, उनसे जाकर मिलो शायद वह हमारी मदद कर दें।
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सुदामा पत्नी के बार बार कहने पर द्वारका पहुंचते हैं और जब द्वारपाल भगवान कृष्ण को बताते हैं कि सुदामा नाम का कोई गरीब ब्राह्मण आपका दोस्त बता रहा हैं। यह सुनकर कृष्ण नंगे पैर दौडक़र आते हैं और अपने मित्र को गले से लगा लेते उनकी दीन दशा देखकर कृष्ण के आंखों से आंसुओं की धारा बहने लगती है। सिंहासन पर बैठाकर कृष्ण सुदामा के चरण धोते हैं।
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सुदामा विदा लेकर अपने स्थान पर लौटते हैं तो भगवान कृष्ण की कृपा से अपने यहां महल बना पाते हैं, लेकिन सुदामा अपनी कुटिया में रहकर भगवान का सुमिरन करते हैं। उन्होंने कहा कि श्रीमद् भागवत कथा श्रवण से जीव का मोक्ष का रास्ता प्रशस्त होता है। इस मौके पर प्रधान रमेश जिंदल, सचिव सत्यदेव शर्मा, सुरेंद्र पाल शर्मा व राजीव गुप्ता आदि मौजूद रहे।