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22 एकड़ में नहीं हुआ मटर का एक भी दाना, एनएचआरडीएफसी पर गलत बीज थमाने का आरोप...

Wed, 06 Jan 2021 11:47 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो अमर उजाला ब्यूरो, करनाल
अमर उजाला ब्यूरो, करनाल Published by: अमर उजाला ब्यूरो Updated Wed, 06 Jan 2021 11:47 AM IST
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harvest if ruined
मटर - फोटो : Pixabay

किसानों ने अपने खून पसीने की कमाई से बीज खरीदकर 22 एकड़ भूमि पर मटर की फसल लगाई। उम्मीद थी कि बीज मानकों के अनुसार 70 दिन बाद मेहनत का पूरा फल मिलेगा, लेकिन 80 दिन इंतजार के बाद भी जब पौध से मटर तो दूर फूल भी नहीं निकले तो उनकी उम्मीदों पर पानी फिर गया। निराश किसानों पहले विभागीय अधिकारियों से पहले खराब बीज की शिकायत दर्ज कराई। इसके बावजूद जब कोई कार्रवाई नहीं हुई तो उन्होंने मामले में सीएम विंडों पर गुहार लगाई। साथ ही नुकसान की भरपाई और सरकारी बीज केंद्र के खिलाफ जांच और कार्रवाई की मांग उठाई है।

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कुरुक्षेत्र के अमीन गांव के किसान अश्विनी, दलजीत और नवदीप ने 135 रुपये प्रति किलो की दर से करीब 1160 किलो वीएआर-एपी3 (टीएल) बीज करनाल स्थित नेशनल हॉर्टिकल्चर रिसर्च डेवलपमेंट फाउंडेशन सेंटर (एनएचआरडीएफसी) खरीदा था। 22 एकड़ जमीन में मटर की फसल के पूरा टाइम लेने के बाद एक दाना भी नहीं हुआ। किस्म के अनुसार, इस बीज पर 65 से 70 दिन के भीतर फसल मिलने लगती है, लेकिन बुआई के 80 दिन से ज्यादा बीतने पर फूल भी पूरे नहीं खिले। ऐसा कैसे हुआ यह जांच का विषय है।
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मामले में किसानों ने करनाल स्थित एनएचआरडीएफसी पर गलत किस्म का बीज देने का आरोप लगाया है। करनाल और कुरुक्षेत्र के कई अधिकारियों से गुहार के बाद अब किसानों ने सीएम विंडों पर शिकायत दी है। साथ ही कार्रवाई की मांग की है, ताकि भविष्य में किसी अन्य किसान के साथ ऐसा ना हो। क्योंकि कई जिलों के किसान इस केंद्र से लहसुन, आलू, प्याज और मटर के बीज लेते हैं। इधर, फाउंडेशन सेंटर के सहायक निदेशक डॉ. आरबी सिंह ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि हमारा बीज ठीक है, अक्तूबर के पहले सप्ताह में सर्दी शुरू हो गई थी। कम तापमान के कारण फसल ज्यादा समय ले रही है।
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अधिकारी के जवाब पर किसान बोला, कम तापमान का असर सिर्फ हमारे खेत पर?
अधिकारी के जवाब पर किसान अश्विनी का कहना है कि क्या कम तापमान का असर सिर्फ उनके खेत पर हुआ? जबकि उनके गांव के अन्य खेतों में मटर की तुड़वाई भी हो चुकी है। उन्होंने बीज मार्केट से खरीदा था। हमने केंद्र से लिया। अधिकारी खुद हमारा खेत देख चुके हैं। अब हमें झूठा साबित कर रहे हैं। खरीदी गई किस्म के मानकों के अनुसार ही हमने बुआई की थी। उनका कहना है कि गलत बीज की बुआई से उनकी मटर के साथ मिश्रित खेती में सैलरी की फसल भी खराब होगी। समय ज्यादा लगने से अगली फसल भी नहीं ले पाएंगे। ऐसे में करीब 35 लाख रुपये के नुकसान का अनुमान है।


हमारे बीज में मिलावट नहीं, गलती किसानों की..

हमारा बीज पूरी तरह से ठीक है। इसे कानपुर से मंगाया है। फसल क्रॉप मिलने की स्थिति मौसम पर भी निर्भर करती है। इस तरह की दिक्कत घरौंडा में भी आई है। हमारे बीज में कहीं कोई मिक्सिंग नहीं है, लेकिन अमीन के किसानों ने प्रति एकड़ डबल सीड डाल दिया, पानी ज्यादा दिया। इसलिए धूप कम निकलने के कारण फसल ओवरग्रोथ हो रही है।
-डॉ. आरबी सिंह, असिस्टेंट डायरेक्टर, नेशनल हॉर्टिकल्चर रिसर्च डेवलपमेंट फाउंडेशन सेंटर करनाल।

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