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Hindi News ›   Haryana ›   Karnal News ›   Harendra crown of the head sentence of the District Council

हरेंद्र के सिर सजा जिला परिषद का ताज

Fri, 18 Apr 2014 12:00 AM IST
करनाल
करनाल Updated Fri, 18 Apr 2014 12:00 AM IST
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जिला परिषद की चौधर के चुनाव में कांग्रेस को तगड़ा झटका लगा है। वीरवार
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को हुए चुनाव में इनेलो के घरौंडा विधायक नरेंद्र सांगवान के भाई हरेंद्र सांगवान को चेयरमैन चुन लिया गया है।

चुनाव के लिए कांग्रेस व अन्य कई पार्टियों से संबंध रखने वाले पांच सदस्य ही नहीं पहुंच पाए। जिला परिषद के अध्यक्ष अंग्रेज सिंह धूमसी के बाद यह पद खाली हो गया था। अभी तक बसपा समर्थित जिला परिषद सदस्य अशोक मित्तल कार्यकारी अध्यक्ष के तौर पर कमान संभाले थे।

हरेंद्र सांगवान (पोल्लू) के जिला परिषद अध्यक्ष बनने की घोषणा होते ही उनके समर्थक ढोल नगाड़ों के साथ पहुंच गए। बारिश की परवाह किए बिना ही समर्थक खुले में विकास भवन के बाहर निकल आए। इन लोगों ने जमकर खुशी मनाई। करीब साढे़ दस बजे जिला परिषद के सदस्य हरेंद्र सांगवान अपने 16 समर्थकों के साथ विकास भवन पहुंचे।

वहां चुनाव कराने के लिए पहले से ही एडीसी गिरीश अरोड़ा, डीडीपीओ दलीप सिंह, कार्यकारी अध्यक्ष अशोक मित्तल पहुंचे। सुरक्षा व्यवस्था के लिए डीएसपी जोगिंद्र राठी ने पूरा मोर्चा पहले से ही संभाल रखा था। कड़ी सुरक्षा के बीच चुनाव सर्वसम्मति से कराया गया। चुनाव में हिस्सा लेने के लिए कांग्रेस नेता सुनील पंवार समेत पांच सदस्य नहीं पहुंचे। अन्य 16 लोगों ने हरेंद्र सांगवान के पक्ष में हाथ उठा कर समर्थन कर दिया।

जिला परिषद के सदस्य यशवीर कुक्कू ने हरेंद्र के नाम का प्रस्ताव रखा, तो गुरुदेव रंबा ने उनके नाम का अनुमोदन कर दिया। तालियाें की गड़गड़ाहट के साथ हरेंद्र को जिला परिषद का चेयरमैन घोषित किया गया। अध्यक्ष चुने जाने से पूर्व विधायक नरेंद्र सांगवान और नीलोखेड़ी के इनेलो के विधायक मामूराम गोंदर भी विकास भवन पहुंच गए थे। अध्यक्ष चुने जाने के बाद हरेंद्र उर्फ पोल्लू को फूलों की मालाओं से लाद दिया गया।

उन्हें खुली जीप में लेकर विधायक नरेंद्र सांगवान के मेरठ रोड स्थित आवास पर पहुंचे। खुली जीप में विधायक नरेंद्र सांगवान, विधायक मामूराम गोंदर, इनेलो जिलाध्यक्ष यशवीर राणा उर्फ कुक्कू, गुरदेव रंबा समेत काफी समर्थक मौजूद रहे।

सरकार की मंशा नहीं थी साफ : नरेंद्र सांगवान

विधायक नरेंद्र सांगवान ने कहा कि राज्य में कांग्रेस की सरकार होने के कारण सरकार ने अंग्रेज सिंह धूमसी को भी जबरदस्ती एक वोट से अध्यक्ष बनाया था। अब भी सरकार की मंशा चुनाव कराने की नहीं थी। सरकार को निश्चित समय अवधि में चुनाव कराने के लिए मजबूर कराने के खातिर हाईकोर्ट जाना पड़ा। हाईकोर्ट ने एक महीने के भीतर चुनाव कराने के लिए समय सीमा तय कर दी थी। इस कारण चुनाव कराना पड़ा।
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