फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Karnal News ›   handicaped sportsman Gulab singh

आर्थिक तंगी से जूझ रहा है नेशनल स्तर का दिव्यांग खिलाड़ी

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 23 Jul 2019 02:39 AM IST
विज्ञापन
handicaped sportsman Gulab singh
handicaped sportsman Gulab singh
नेशनल और स्टेट लेवल पर गोल्ड मेडल जीतने के बाद भी व्हील चेयर का दिव्यांग खिलाड़ी गुलाब सिंह आर्थिक मदद के लिए भटक रहा है। एक तरफ तो सरकार खेलों को बढ़ावा दे रही है। वहीं, प्रतिभावान खिलाड़ी मदद को भटक रहा है। दो बार तो मंत्री से मिल चुका है, लेकिन वहां से केवल आश्वासन ही मिला है। हालात ये रहे तो खिलाड़ी को मजबूरी में खेल ही छोड़ना पड़ सकता है।
विज्ञापन

हम बात कर रहे हैं प्रतिभावान खिलाड़ी गुलाब सिंह की, जिन्होंने नेशनल और स्टेट लेवल पर 6 मेडल जीते हैं। लेकिन आज आर्थिक मदद के लिए खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के मंत्री कर्णदेव कांबोज से दो बार गुहार लगा चुके हैं, लेकिन उसे आज तक आर्थिक मदद नहीं मिल पाई। गुलाब ने बताया कि वह गांव सलारू इंद्रीका रहने वाला है और अनुसूचित जाति से संबंध रखता है और उसकी आर्थिक स्थिति काफी कमजोर है। वह 23 जून, 2017-18 को मंत्री से दो बार व्हील चेयर फैंसिंग उपकरण के लिए लिखित में दो बार पत्र दे चुका है, लेकिन आज तक कोई सुनवाई नहीं हुई। गुलाब ने बताया कि उनकी मदद गांव का सरपंच पलविंद्र सिंहराज करते हैं, पहले भी सरपंच ने उनकी मदद की है।
विज्ञापन

गलत इंजेक्शन से गई टांग
गुलाब जब वह 5 वर्ष के थे, तब गलत इंजेक्शन गलने से उनकी दाई टांग खराब हो गई। मजदूर पिता पर जैसे मुसीबतों का पहाड़ टूट गया। एक तरफ भागदौड़ भरी जिंदगी और दूसरी तरफ हाथ में बैशाखी। हाथ में बैशाखी आई, लेकिन इंद्री के सलारू गांव के गुलाब से हिम्मत नहीं हारी और 2016 में व्हील चेयर फैंसिंग में कूद पड़े। दो साल के कड़े अभ्यास के बाद नेशनल पर 2 ब्रांज, 2 सिल्वर व स्टेट लेवल पर 2 गोल्ड मेडल जीते। गुलाब की मुसीबतें ज्यादा थीं, लेकिन हिम्मत और हौसला कहीं अधिक। फैंसिंग से जुड़े 11 महीने की कड़ी मेहनत रंग लाई और राष्ट्रीय स्तर पर दो ब्रांज मेडल जीत लिए। उसके बाद छत्तीसगढ़ की नेशनल व्हील फैंसिंग चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीत पर हरियाणा का खाता खोला।
विज्ञापन
विज्ञापन

अपनी ट्राईसाइकिल कर दी थी दान
गुलाब सिंह को 26 जनवरी को रेडक्रॉस की तरफ से उन्हें एक ट्राईसाइकिल मिला। तीन चार दिन बाद जब वह बाजार से जा रहा था तो उसने हाथ पैरों से लाचार दिव्यांग को देखा उसके हाथों में छाले पड़े थे, गुलाब का मन पसीज गया और उसने वह ट्राईसाइकिल उसे दे दी। पिता प्रेमचंद और माता कृष्णा देवी का कहना है उन्हें अपने बेटे पर काफी नाज है। हालात जरूर कमजोर हैं, लेकिन हौसला नहीं।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed