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Karnal News: कर्ज लेकर भेजा था विदेश, बेटे की मौत से टूटे सपने

Sat, 02 Sep 2023 02:21 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल Updated Sat, 02 Sep 2023 02:21 AM IST
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Had taken loan and sent abroad, dreams broken due to son's death
संवाद न्यूज एजेंसी
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करनाल। मां-बाप ने बेटे को विदेश भेजने के लिए तमाम सपने देखे थे। इसके लिए वर्षों से पूंजी जोड़ने लगे। रुपये कम पड़ने पर 40 लाख रुपये कर्ज लिया और डोंकी के रास्ते को अमेरिका भेजा। वहां बेटे की मौत के बाद परिवार के सपने टूट गए।
दस माह पहले राहडा का युवक पंकज राणा परिवार के सपने पूरे करने लिए अमेरिका के लिए रवाना हुआ। रास्ते में तमाम यातनाएं हुई, मगर अमेरिका पहुंचकर मां-बाप के सपनों को पूरा करना था। परिवार पर जो कर्ज था, उसे भी चुकाने की जिम्मेदारी थी। चार माह बाद युवक अमेरिका पहुंच गया और अलवामा में दुकानदार के पास नौकरी करने लगा। करीब छह माह से युवक दुकान पर नौकरी कर रहा था।
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युवक दुकान के अंदर बैठकर बंदूक को चेक कर रहा था। इसी दौरान ट्रि्ंगर दबने से गोली चल गई। युवक की गोली लगने से मौत हो गई थी। करीब दस दिन पहले परिवार के पास अमेरिका से फोन आया कि उनके बेटे की गोली लगने से मौत हो गई। मौत की खबर सुनते ही मां बेहोश हो गई। परिवार में मातम पसर गया। शुक्रवार को जब पैतृक गांव युवक का शव पहुंचा तो मां का कलेजा फफक पड़ा।
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युवक के परिवार में उसकी मां सुदेश, पिता नरेंद्र कुमार, छोटा भाई उज्ज्वल है। बेटे को विदेश भेजने के लिए चालीस लाख रुपये का कर्ज लिया था। बेटा भी परिवार का लिया कर्ज उतारने में पूरी मदद कर रहा था। बेटे ने परिवार से कहा था कि वह कर्ज चुकाने के बाद ही वतन लौटेगा। बेटे की मौत के बाद परिवार के सपने भी टूट गए।

अमेरिका से 10 दिन बाद शव पहुंचा स्वदेश
अमेरिका में करीब दस दिन पहले दुकान के अंदर बंदूक की जांच करते समय गोली लगने से असंध के राहडा गांव के पंकज राणा की हुई मौत के बाद शुक्रवार को शव स्वदेश पहुंचा। शव पहुंचने पैतृक गांव में हर किसी की आंखें नम थी। परिजनों ने गांव में ही युवक के शव का अंतिम संस्कार किया। दस दिनों से शव को पैतृक गांव असंध लाने के लिए परिजनों ने प्रशासनिक अधिकारी और सरकार से भी गुहार लगाई थी। अमेरिका दूतावास में भी परिजनों ने बेटे के शव को घर लाने की मदद भी मांगी। दस दिन बाद शुक्रवार को युवक का शव उसके पैतृक गांव पहुंचा। शव जैसे ही गांव में पहुंचा तो सन्नाटा छा गया।
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