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LS Elections: कर्ण की नगरी में मनोहर लाल की दोहरी परीक्षा, पूर्व सीएम को मोदी... कांग्रेस को नाराजगी से उम्मीद

Wed, 22 May 2024 05:30 AM IST
दुष्यंत शर्मा चंद्रमोहन शर्मा, करनाल
चंद्रमोहन शर्मा, करनाल Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Wed, 22 May 2024 05:30 AM IST
सार

नौ साल राज करने के बाद मुख्यमंत्री पद से अचानक हटाए गए भाजपा के मनोहर लाल 70 साल की उम्र में अपना पहला लोकसभा चुनाव करनाल से लड़ रहे हैं। पिछले दो चुनाव से भाजपा का गढ़ रही इस सीट पर उनकी दोहरी परीक्षा है। एक तो विशाल जीत से अपनी बड़ी लकीर खींचनी है। दूसरा, उनकी जगह मुख्यमंत्री बनाए गए नायब सिंह सैनी का उपचुनाव में बेड़ा पार लगाना है। 2019 में कुरुक्षेत्र से सांसद चुने गए सैनी मनोहर के इस्तीफे से रिक्त करनाल विधानसभा सीट से ही उपचुनाव लड़ रहे हैं।

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Ground Report Karnal: Manohar Lal's double examination in Karna's city
कांग्रेस प्रत्याशी दिव्यांशु बुद्धिराजा, भाजपा प्रत्याशी मनोहर लाल। - फोटो : संवाद

विस्तार

करनाल लोकसभा क्षेत्र में ही बाबर-लोदी, अकबर-हेमू और अब्दाली-मराठों के युद्ध का गवाह पानीपत है। सम्राट पृथ्वीराज चौहान और मोहम्मद गोरी की जंग का मैदान तराइन भी यहां से दूर नहीं है। दानवीर कर्ण की नगरी में कई यादगार चुनावी मुकाबले हुए हैं, जिनमें बड़े-बड़े महारथियों को हार का मुंह देखना पड़ा। भाजपा की दिग्गज सुषमा स्वराज कांग्रेस के चिरंजी लाल शर्मा से लगातार तीन बार 1980, 1984 और 1989 में हारीं। पूर्व मुख्यमंत्री भजन लाल एक ही बार लड़े मगर जीत नहीं पाए।

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यहां समीकरण बदलते रहते हैं। पहले ब्राह्मण सांसद चुने जाते रहे, पर पिछले दो चुनाव से पंजाबियों की बल्ले-बल्ले हो रही है। करनाल में 18 में से 11 चुनाव कांग्रेस ने जीते हैं, लेकिन पिछले दो बार से भाजपा का परचम बुलंद है। 2014 में अश्विनी कुमार 3,60,147 वोट और 2019 में संजय भाटिया 6,56,142 वोटों से जीते। हालांकि इतनी बड़ी जीत के बाद भी उनका टिकट कट गया। 
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इस बार भाटिया की जगह पंजाबी समाज के ही पूर्व सीएम मनोहर लाल मैदान में हैं। उनका मुकाबला युवा कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष दिव्यांशु बुद्धिराजा से है। बुद्धिराजा भी पंजाबी हैं। प्रत्याशी घोषित होने के बाद  एक पुराने मामले में कोर्ट से उन्हें भगोड़ा घोषित किए जाने का मामला मीडिया में उछला था। कांग्रेस के लिए तो मानो यह सिर मुंड़ाते ही ओले पड़ने वाली बात हो गई थी। हालांकि, बाद में बुद्धिराजा को जमानत मिल गई और अब वह पूरे दमखम के साथ चुनाव मैदान में हैं। कांग्रेस में उन्हें भूपेंद्र हुड्डा गुट का बताया जाता है। इसीलिए अब तक उन्हें एसआरके (सैलजा-रणदीप-किरण) गुट का समर्थन नहीं मिला है। 
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जननायक जनता पार्टी से पूर्व विधानसभा अध्यक्ष सतबीर कादयान के बेटे देवेंद्र कादयान, एनसीपी ( शरद पवार ) से मराठा वीरेंद्र वर्मा उम्मीदवार हैं। एनसीपी ने इनेलो से गठबंधन किया है। बसपा से नरेंद्र कौर चुनाव लड़ रही हैं। मुख्य मुकाबला मनोहर और बुद्धिराजा के बीच माना जा रहा है। मनोहर का गांव रोहतक के महम क्षेत्र में है, लेकिन उन्होंने 2014 में अपना पहला और 2019 में दूसरा विधानसभा चुनाव करनाल से ही लड़ा और सीएम रहते हुए यहीं से विधायक रहे। भाजपा पंजाबी-ब्राह्मण समीकरण बनाकर चल रही है। यहां सबसे ज्यादा मतदाता पंजाबी समाज के ही हैं। इसके बाद जाट और फिर ब्राह्मण हैं। एससी, रोड (मराठा) और राजपूत मतदाता भी अहम हैं।

नौ विधायकों में से चार भाजपा के
करनाल लोकसभा क्षेत्र में नौ विधानसभा सीटें हैं। इनमें करनाल जिले की इंद्री और घरौंडा भाजपा के पास है, जबकि असंध में कांग्रेस और नीलीखेड़ी से निर्दलीय विधायक हैं। करनाल सीट पर उपचुनाव हो रहा है। 

  • पानीपत की चार सीटों में शहर और देहात भाजपा के पास हैं और इसराना व समालखा पर कांग्रेस का कब्जा है। नीलीखेड़ी के निर्दलीय विधायक धर्मपाल गोंदर चुनाव के बीच कांग्रेस के पाले में चले गए हैं।

चिरंजी लाल रहे सबसे लंबे समय तक सांसद
यहां मतदाताओं की पसंद पहले ब्राह्मण प्रत्याशी रहे हैं। हालांकि पिछले दो चुनाव से पंजाबी जीत रहे हैं। सबसे लंबा कार्यकाल कांग्रेस के चिरंजी लाल शर्मा का रहा। वह 1980, 1894, 1989 और 1991 में जीते। कांग्रेस के ही माधो राम शर्मा 1967 व 1971 में, अरविंद शर्मा 2004 और 2009 में जीते। अरविंद अब भाजपा में हैं। उपचुनाव मिलाकर यहां 18 चुनाव हुए हैं। इनमें 11 बार कांग्रेस जीती और 4 बार भाजपा। 



मनोहर को मोदी, कांग्रेस को नाराजगी से उम्मीद
मनोहर लाल को मोदी के नाम, संगठन और खुद की सरकार के कार्यों से वोटों की आस है। पीएम मोदी, जेपी नड्डा व अमित शाह रैली कर उनके लिए वोट की अपील कर चुके हैं। वहीं, कांग्रेस को सरकार के खिलाफ नाराजगी से ताकत मिल रही है। खासकर गांवों में भाजपा नेताओं को घुसने तक नहीं दिया जा रहा और उनका खुला विरोध हो रहा है। हालांकि, समीकरणों को देखे हैं तो बुद्धिराजा पर मनोहर लाल भारी पड़ते नजर आ रहे हैं। बुद्धिराजा यहां के लिए बाहरी हैं। वहीं, कांग्रेसी भितरघात कर रहे हैं। दूसरी तरफ, मनोहर लाल से नाराज लोगों को मौजूदा मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी साध रहे हैं।

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