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देसी गाय पालन में रूचि नहीं दिखा रहे पशुपालक
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प्रदेश सरकार और पशुपालन विभाग की ओर से भले ही देसी गाय संरक्षण पर जोर दिया जा रहा है, लेकिन पशुपालकों को सरकार की योजना रास नहीं आ रही है। यही कारण है कि देसी गाय पालन संबंधी सरकार की महत्वाकांक्षी योजना सिरे नहीं चढ़ पा रही है। स्थिति यह है कि एक साल बाद भी योजना का लाभ लेना तो दूर किसी पशुपालक ने आवेदन तक नहीं किया है।
पिछले साल देसी गाय संरक्षण संबंधी जारी हुई योजना के तहत 20 गायों की डेयरी इकाई स्थापित करने पर ऋण का शत-प्रतिशत ब्याज पशुपालन विभाग की ओर से देने का प्रावधान किया गया था। इसके तहत प्रति गाय 60 से 70 हजार रुपये और डेयरी इकाई पर 12 से 14 लाख रुपये का ऋण बैंक से लिया जा सकता था। योजना के लिए सरल पोर्टल पर कोई भी पशुपालक आवेदन कर सकता है। उसके बाद पशुपालन विभाग बैंक को फाइल भेजेगा। विभाग की प्रक्रिया महज एक सप्ताह की है। तमाम औपचारिकताएं पूरी होने पर बैंक की स्वीकृति के बाद आवेदनकर्ता इस योजना का लाभ ले सकता है।
इस संबंध में पशुपालन विभाग के उपनिदेशक डा. धर्मेंद्र का कहना है कि 20 देसी गायों की डेयरी इकाई स्थापित करने पर इसके ऋण पर विभाग की ओर से शत-प्रतिशत ब्याज देने की योजना है, लेकिन जिले में एक साल में किसी पशुपालक ने इसके लिए आवेदन नहीं किया।
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देसी गाय पर पुरस्कार की भी योजना
हरियाणा की देसी गाय जो आठ से 10 किलो दूध एक दिन में देती है, उस पर दस हजार का पुरस्कार है। दस से 12 किलो दूध पर 15 हजार व 12 किलो से अधिक दूध प्रतिदिन देने वाली गाय पर सरकार 20 हजार रुपये पुरस्कार देती है। साहिवाल गाय जो 10 से 12 किलो दूध प्रतिदिन देती है उस पर दस हजार रुपये, 12 से 15 किलो दूध देने वाली गाय पर 15 हजार रुपये व इससे अधिक दूध देने वाली गाय पर 20 हजार रुपये इनाम मिलता है।
ए-2 तत्व के गुणों से युक्त होता है दूध
राष्ट्रीय पशु आनुवंशिक संसाधन ब्यूरो करनाल के वैज्ञानिकों ने एक विशेष शोध के बाद फरवरी 2012 में यह खुलासा किया था कि भारतीय देसी गाय के दूध में ए-2 बीटा केसिन तत्व पाया जाता है। इस दूध के सेवन से हृदय रोग, मधुमेह, गठिया व मानसिक बीमारी दूर रहती है। शोध में संस्थान के वैज्ञानिकों ने अमेरिका, डेनमार्क, आस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड सहित कई देशों की गायों के दूध की गुणवत्ता की तुलना की थी।
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पिछले साल देसी गाय संरक्षण संबंधी जारी हुई योजना के तहत 20 गायों की डेयरी इकाई स्थापित करने पर ऋण का शत-प्रतिशत ब्याज पशुपालन विभाग की ओर से देने का प्रावधान किया गया था। इसके तहत प्रति गाय 60 से 70 हजार रुपये और डेयरी इकाई पर 12 से 14 लाख रुपये का ऋण बैंक से लिया जा सकता था। योजना के लिए सरल पोर्टल पर कोई भी पशुपालक आवेदन कर सकता है। उसके बाद पशुपालन विभाग बैंक को फाइल भेजेगा। विभाग की प्रक्रिया महज एक सप्ताह की है। तमाम औपचारिकताएं पूरी होने पर बैंक की स्वीकृति के बाद आवेदनकर्ता इस योजना का लाभ ले सकता है।
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इस संबंध में पशुपालन विभाग के उपनिदेशक डा. धर्मेंद्र का कहना है कि 20 देसी गायों की डेयरी इकाई स्थापित करने पर इसके ऋण पर विभाग की ओर से शत-प्रतिशत ब्याज देने की योजना है, लेकिन जिले में एक साल में किसी पशुपालक ने इसके लिए आवेदन नहीं किया।
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देसी गाय पर पुरस्कार की भी योजना
हरियाणा की देसी गाय जो आठ से 10 किलो दूध एक दिन में देती है, उस पर दस हजार का पुरस्कार है। दस से 12 किलो दूध पर 15 हजार व 12 किलो से अधिक दूध प्रतिदिन देने वाली गाय पर सरकार 20 हजार रुपये पुरस्कार देती है। साहिवाल गाय जो 10 से 12 किलो दूध प्रतिदिन देती है उस पर दस हजार रुपये, 12 से 15 किलो दूध देने वाली गाय पर 15 हजार रुपये व इससे अधिक दूध देने वाली गाय पर 20 हजार रुपये इनाम मिलता है।
ए-2 तत्व के गुणों से युक्त होता है दूध
राष्ट्रीय पशु आनुवंशिक संसाधन ब्यूरो करनाल के वैज्ञानिकों ने एक विशेष शोध के बाद फरवरी 2012 में यह खुलासा किया था कि भारतीय देसी गाय के दूध में ए-2 बीटा केसिन तत्व पाया जाता है। इस दूध के सेवन से हृदय रोग, मधुमेह, गठिया व मानसिक बीमारी दूर रहती है। शोध में संस्थान के वैज्ञानिकों ने अमेरिका, डेनमार्क, आस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड सहित कई देशों की गायों के दूध की गुणवत्ता की तुलना की थी।