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कोरोना काल में आगे रहे सरकारी अस्पताल

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 25 May 2020 02:15 AM IST
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government hospitals were ahead in the corona period
कोरोना काल में सरकारी अस्पतालों और डाक्टरों में लोगों का विश्वास बढ़ा है। कोरोना के मरीजों का चेकअप से लेकर इलाज तक सरकारी अस्पतालों और मेडिकल कालेजों में हुआ। अच्छी बात ये है कि अधिकांश मरीज ठीक होकर घर भी पहुंचे। सरकारी डॉक्टर, स्टाफ नर्स, फार्मासिस्ट, लैब टेक्निशियन और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी पिछले दो माह से बिना छुट्टी लिए काम कर रहे हैं। वहीं दूसरी ओर सीधे तौर पर निजी अस्पतालों की भूमिका कम नजर आई। स्थिति यह हुई कि संक्रमण के खतरे को देखते हुए अधिकांश निजी डाक्टरों ने अस्पताल बंद रखे।
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दो माह से टल रहे हैं आपरेशन
25 मार्च से लाकडाउन शुरू होने के कारण तभी से ऑॅपरेशन और सर्जरी टली हुई हैं। सरकारी अस्पताल जहां कोरोना के मरीजों को संभालने में लगे हैं। वहीं, निजी अस्पताल कोरोना के भय से सर्जरी और आपरेशन नहीं कर रहे हैं। जबकि इससे पहले जिले में 200 से 250 तक लोगों की सर्जरी होती थी। इनमें आंख, नाक, पत्थरी, स्कीन और हड्डी रोग समेत अन्य शामिल हैं। निजी अस्पतालों में बिना कोरोना टेस्ट कराए सर्जरी नहीं की जा रही है। ऐसे में फिलहाल ऐसे मरीजों को दवा ही दी जा रही है। इस दौरान मरीजों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा। सरकारी अस्पताल और मेडिकल कालेज की बात करें तो यहां पर भी सामान्य सर्जरी नहीं हो रही हैं, केवल इमरजेंसी सर्जरी ही की जा रही हैं।
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लॉकडाउन में स्वास्थ्य हो रहा सुधार : घटी ओपीडी
कल्पना चावला मेडिकल कालेज के डीएमएस डा. गौरव कांबोज ने बताया कि लॉकडाउन के पहले 2500 तक कालेज की ओपीडी थी। इसी प्रकार इनमें से रोजाना चार से पांच सर्जरी भी की जाती है, जो लॉकडाउन के दौरान 80 प्रतिशत तक कम हुई हैं। क्योंकि लोग घर से बाहर नहीं निकले। ऐसे में आंखों के रोग, चमड़ी के रोग, माइग्रेन व बुखार में काफी कमी आई। कारण कि इनका सीधा संबंध प्रदूषण और कड़क धूप से है, इसलिए यहां लोगों का स्वास्थ्य पहले से बेहतर हुआ। सड़क हादसे ना के बराबर हुए इसलिए हड्डी रोग की ओपीडी भी कम हुई है। इस समय कालेज में 500 से 700 के करीब ओपीडी है। इसी प्रकार, सिविल अस्पताल के पीएमओ डा. पीयूष शर्मा ने बताया कि इस समय केवल इमरजेंसी सर्जरी की जा रही हैं, सामान्य बंद हैं। ओपीडी पहले 2 हजार थी, अब 800 से 1000 के करीब आ रही है। पहले रोजाना 4 से 5 सर्जरी होती थी।
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निजी अस्पतालों ने किया पूरा सहयोग : डा. अरुण
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन करनाल के अध्यक्ष डा. अरुण गोयल ने बताया कि कोरोना काल के दौरान निजी अस्पतालों ने प्रदेश सरकार और जिला प्रशासन का पूरा साथ दिया है। बात चाहे फोन से निशुल्क ओपीडी की हो या फिर अन्य। ये कहना बिल्कुल गलत होगा कि निजी अस्पतालों की भूमिका कम रही। क्योंकि कोरोना के मरीजों का इलाज सरकारी अस्पतालों में किया जा रहा है और सरकार की गाइडलाइन भी यही है। जहां तक आपरेशन की बात है तो यकीनन इसमें कमी आई है, क्योंकि संक्रमण का खतरा सभी को है। ओपीडी सुबह 9 से 3 बजे तक है, पहले के मुकाबले यह आधी रह गई है।

सभी का साथ मिल रहा है : सीएमओ
लाकडाउन के दौरान सभी स्वास्थ्य विभाग का सहयोग कर रहे हैं। निजी अस्पतालों का भी पूरा स्पोर्ट है। सरकार की हिदायतों के अनुसार ही काम किया जा रहा है। ओपीडी पहले के मुकाबले कम हुई है। सरकारी अस्पताल में जरूरी सर्जरी की जा रही हैं, जो जरूरी नहीं है उनको अभी नहीं किया जा रहा है।-डा. अश्वनी आहूजा, सीएमओ
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